असम में इस साल आई भीषण बाढ़ से अब तक 99 लोगों की मौत हो चुकी है और करीब 7.21 लाख लोग प्रभावित हुए हैं। शिवसागर, चराइदेव और जोरहाट के कई इलाकों में भारी बारिश के बाद बाढ़ की स्थिति गंभीर हो गई। बिहुबर में तेज बहाव से ज्यादा नुकसान हुआ, जबकि तमुली गांव में बांध मजबूत रहने से बड़ी तबाही टल गई। मानसून अभी जारी है, इसलिए प्रभावित इलाकों में आगे भी सतर्कता जरूरी है।
असम में इस साल आई भीषण बाढ़ ने राज्य के कई हिस्सों में भारी तबाही मचाई है। अब तक बाढ़ और इससे जुड़ी घटनाओं में 99 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि करीब 7.21 लाख लोग प्रभावित हुए हैं। सबसे ज्यादा चिंता की बात यह है कि शिवसागर और चराइदेव जैसे इलाकों में भी बाढ़ ने गंभीर स्थिति पैदा कर दी, जिन्हें आमतौर पर राज्य के दूसरे बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों की तुलना में सुरक्षित माना जाता है।
18 से 22 जुलाई के बीच हुई तेज बारिश के बाद इन इलाकों में पानी तेजी से बढ़ा। कई जगह लोगों को अचानक आई बाढ़ के कारण संभलने और सुरक्षित स्थानों पर जाने का पर्याप्त समय नहीं मिल पाया। शिवसागर जिले का बिहुबर इस दौरान सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों में रहा। 19 और 20 जुलाई को तेज बहाव के साथ आया बाढ़ का पानी यहां तेजी से फैल गया और लोगों के सामने मुश्किल हालात खड़े हो गए।
बिहुबर से करीब 40 किलोमीटर दूर जोरहाट जिले का तमुली गांव भी बाढ़ के पानी से घिर गया। गांव में पानी पहुंचने के बाद आसपास के निचले इलाकों और धान के खेत पूरी तरह जलमग्न हो गए। करीब 110 परिवारों वाला यह गांव कुछ समय के लिए चारों तरफ से पानी से घिरा हुआ नजर आया और एक तरह से छोटे से द्वीप जैसा बन गया। हालांकि तमुली गांव में स्थिति बिहुबर जैसी गंभीर नहीं हुई। यहां पानी की रफ्तार अपेक्षाकृत कम रही और बांध भी नहीं टूटा। इसी वजह से गांव में बड़े स्तर पर नुकसान होने से बच गया। स्थानीय लोगों के लिए मजबूत बांध इस दौरान काफी अहम साबित हुआ, क्योंकि तेज बहाव के बावजूद पानी उसे तोड़ नहीं सका।
स्थानीय शिक्षक बिजू कुमार सरमा ने बताया कि उनके इलाके में बांध मजबूत होने के कारण पानी के तेज बहाव का असर उस पर नहीं पड़ा। लेकिन उनका कहना है कि अभी पूरी तरह निश्चिंत होने की स्थिति नहीं है। आने वाले महीनों में अगर फिर से तेज बारिश होती है तो बाढ़ का खतरा दोबारा बढ़ सकता है।
असम में हर साल बारिश के करीब छह महीनों के दौरान बाढ़ का खतरा बना रहता है। राज्य के कई बाढ़ प्रभावित जिलों में रहने वाले लोग इस स्थिति के लिए पहले से तैयार रहते हैं। बाढ़ के मौसम में निचले इलाकों में पानी भरना और खेतों का डूबना यहां आम समस्या रही है। लेकिन इस बार शिवसागर और चराइदेव जैसे इलाकों में जिस तेजी से पानी बढ़ा, उसने स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ा दी है।
बाढ़ की स्थिति का असर सिर्फ घरों और खेतों तक सीमित नहीं रहता। पानी बढ़ने से गांवों का आसपास के इलाकों से संपर्क प्रभावित हो सकता है और लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचने में परेशानी होती है। तमुली में भी निचले धान के खेतों के पानी में डूब जाने से खेती प्रभावित हुई है।
इस बार की बाढ़ ने यह भी दिखाया है कि जिन इलाकों को अब तक अपेक्षाकृत सुरक्षित माना जाता रहा है, वहां भी अचानक बाढ़ की स्थिति पैदा हो सकती है। शिवसागर और चराइदेव में तेज बारिश के बाद जिस तरह पानी बढ़ा, उससे स्थानीय स्तर पर बाढ़ से निपटने की तैयारियों को लेकर चिंता बढ़ी है।
फिलहाल असम में राहत और पुनर्वास के साथ आने वाले दिनों की बारिश पर भी नजर रखना जरूरी है। मानसून का दौर अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। ऐसे में प्रभावित इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए आगे भी सतर्क रहना जरूरी है, क्योंकि ज्यादा बारिश होने पर बाढ़ की स्थिति फिर बिगड़ सकती है।
असम में हुई इस बाढ़ में 99 लोगों की मौत और 7.21 लाख लोगों के प्रभावित होने का आंकड़ा स्थिति की गंभीरता को बताता है। शिवसागर, चराइदेव और जोरहाट जैसे इलाकों में सामने आई स्थिति के बाद बाढ़ से निपटने की तैयारी को लेकर भी ध्यान बढ़ा है। खासकर उन इलाकों में जहां पहले बड़े स्तर पर बाढ़ का खतरा कम माना जाता था, वहां बदलती स्थिति को देखते हुए सावधानी और तैयारी बनाए रखना जरूरी है।
असम बाढ़, असम में बाढ़, असम बाढ़ का कहर, 99 लोगों की मौत, 7.21 लाख लोग प्रभावित, शिवसागर बाढ़ Assam baadh, Assam mein baadh, Assam baadh ka kahar, 99 logon ki maut, 7.21 lakh log prabhavit असम में बाढ़ से 99 लोगों की मौत, असम बाढ़ से 7.21 लाख लोग प्रभावित, शिवसागर में बाढ़ की स्थिति Assam Flood, Assam News, Sivasagar, Charaideo, Jorhat, Bihubar, Tamuli Village, Flood News NetGramNews
Disclaimer
Disclaimer:
Images are for illustrative purposes only and some editing of images done by using AI. इस लेख में इस्तेमाल की गई तस्वीरें सिर्फ समझाने के लिए हैं। कुछ तस्वीरों को AI की मदद से एडिट किया गया है।
Published by: Ishrat. For newsroom standards, byline transparency, and correction requests, review our editorial standards and corrections policy.
Need to contact the newsroom directly? Email netgramnews@gmail.com or visit the team page.