14 जुलाई को भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत कमजोर रहने के संकेत मिल रहे हैं। एशियाई बाजारों में गिरावट, अमेरिका-ईरान तनाव, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली का असर बाजार पर पड़ सकता है। हालांकि, पिछले कारोबारी दिन आईटी शेयरों की तेजी की वजह से सेंसेक्स और निफ्टी बढ़त के साथ बंद हुए थे।
मंगलवार, 14 जुलाई को भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत कमजोर हो सकती है। बाजार खुलने से पहले मिले संकेत बताते हैं कि निफ्टी और सेंसेक्स दबाव में रह सकते हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह एशियाई बाजारों में गिरावट, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और विदेशी निवेशकों की बिकवाली मानी जा रही है।
बाजार पर नजर रखने वाले निवेशकों के लिए आज का दिन काफी अहम हो सकता है। कई ऐसे कारण हैं जो बाजार की चाल तय करेंगे। इनमें विदेशी निवेशकों की गतिविधियां, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव, वैश्विक बाजारों का रुख और कच्चे तेल की कीमतें सबसे ज्यादा चर्चा में हैं।
बाजार की शुरुआत कमजोर रहने के संकेत गिफ्ट निफ्टी के शुरुआती संकेत बताते हैं कि भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत गिरावट के साथ हो सकती है। गिफ्ट निफ्टी में करीब 182 अंकों की कमजोरी देखी गई, जिससे यह माना जा रहा है कि बाजार खुलते ही बिकवाली का दबाव बन सकता है।
हालांकि, बाजार की असली दिशा पूरे दिन निवेशकों की खरीद और बिक्री पर भी निर्भर करेगी। अगर दिन के दौरान अच्छी खरीदारी होती है तो बाजार संभल भी सकता है।
पिछले कारोबारी दिन बाजार ने की थी वापसी सोमवार को शुरुआती गिरावट के बाद भारतीय शेयर बाजार ने अच्छी वापसी की थी। दिन की शुरुआत कमजोर रही, लेकिन बाद में आईटी कंपनियों के शेयरों में खरीदारी बढ़ने से बाजार संभल गया।
सेंसेक्स दिन के निचले स्तर से करीब 932 अंक तक उछल गया था। कारोबार खत्म होने पर सेंसेक्स 47 अंकों की बढ़त के साथ 77,616 पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी 50 भी 4 अंक बढ़कर 24,211 पर बंद हुआ। इस तेजी में इंफोसिस, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) और एचसीएल टेक जैसी बड़ी आईटी कंपनियों के शेयरों का अहम योगदान रहा।
एशियाई बाजारों में क्यों आई गिरावट? मंगलवार सुबह एशिया के कई प्रमुख शेयर बाजार लाल निशान में कारोबार करते दिखाई दिए। जापान का निक्केई, हांगकांग का हैंगसेंग, चीन का शंघाई कंपोजिट और दक्षिण कोरिया का कोस्पी सभी में गिरावट दर्ज की गई।
एशियाई बाजारों में कमजोरी की एक बड़ी वजह कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ता तनाव है। जब दुनिया में किसी बड़े भू-राजनीतिक मुद्दे को लेकर चिंता बढ़ती है, तब निवेशक जोखिम वाले निवेश से दूरी बनाने लगते हैं। इसका असर शेयर बाजारों पर भी दिखाई देता है।
अमेरिका और ईरान के तनाव का असर रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने कहा है कि उसकी सेना 14 जुलाई से ईरानी बंदरगाहों की ओर आने-जाने वाले समुद्री रास्तों पर फिर से नाकाबंदी लागू करेगी।
इस फैसले के बाद दुनिया भर के बाजारों में चिंता बढ़ गई है। निवेशकों को डर है कि अगर तनाव और बढ़ा तो तेल की सप्लाई प्रभावित हो सकती है।
कच्चे तेल की कीमतों में तेजी अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर कच्चे तेल की कीमतों पर भी दिखाई दिया। ब्रेंट क्रूड की कीमत 85 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गई।
जब कच्चा तेल महंगा होता है तो भारत जैसे देशों पर इसका सीधा असर पड़ता है क्योंकि भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से खरीदता है। तेल महंगा होने से कंपनियों की लागत बढ़ सकती है और इसका असर शेयर बाजार पर भी पड़ सकता है।
विदेशी निवेशकों ने की बड़ी बिकवाली नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के आंकड़ों के अनुसार, सोमवार को विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने 3,062.27 करोड़ रुपये के शेयर बेचे।
वहीं घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने 2,171.70 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे। घरेलू निवेशकों की खरीदारी से बाजार को कुछ सहारा मिला, लेकिन विदेशी निवेशकों की बिकवाली अभी भी चिंता का विषय बनी हुई है।
नेशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी लिमिटेड (NSDL) के आंकड़ों के मुताबिक, इस साल अब तक विदेशी निवेशक भारतीय बाजार से 2.55 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की निकासी कर चुके हैं।
अमेरिकी शेयर बाजार में भी कमजोरी सोमवार को अमेरिकी शेयर बाजार भी गिरावट के साथ बंद हुए। डॉव जोंस, एसएंडपी 500 और नैस्डैक तीनों प्रमुख सूचकांकों में कमजोरी दर्ज की गई।
तेल की बढ़ती कीमतों और एआई से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में बिकवाली की वजह से अमेरिकी बाजार दबाव में रहे। अमेरिकी बाजारों की कमजोरी का असर अक्सर अगले दिन एशियाई और भारतीय बाजारों पर भी देखने को मिलता है।
आज किन स्तरों पर रहेगी नजर? बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, निफ्टी के लिए 24,000 का स्तर काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सोमवार को भी निफ्टी इस स्तर से ऊपर बना रहा और बाद में इसमें अच्छी रिकवरी देखने को मिली।
ऊपर की ओर 24,500 का स्तर बाजार के लिए बड़ी रुकावट माना जा रहा है। अगर निफ्टी इस स्तर के ऊपर निकलता है तो बाजार में नई तेजी देखने को मिल सकती है। वहीं 24,000 के नीचे जाने पर दबाव बढ़ सकता है।
निवेशकों को क्या करना चाहिए? बाजार में उतार-चढ़ाव के दौरान निवेशकों को जल्दबाजी में फैसला लेने से बचना चाहिए। किसी भी शेयर में निवेश करने से पहले उसकी पूरी जानकारी लेना जरूरी है।
वैश्विक घटनाओं, विदेशी निवेशकों की चाल, कच्चे तेल की कीमत और कंपनियों के तिमाही नतीजों पर नजर रखना भी जरूरी है। इन सभी कारणों का असर आने वाले दिनों में शेयर बाजार की दिशा तय कर सकता है।
फिलहाल बाजार पर कई घरेलू और वैश्विक कारणों का असर दिखाई दे रहा है। ऐसे में निवेशकों की नजर आज पूरे दिन बाजार की चाल, विदेशी निवेशकों की गतिविधियों और दुनिया भर से आने वाली नई खबरों पर बनी रहेगी।
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