मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत गिरावट के साथ हुई। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 600 अंक से ज्यादा टूट गया, जबकि निफ्टी 24,000 के करीब पहुंच गया। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में तेजी, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और दुनिया के कमजोर बाजारों का असर भारतीय शेयर बाजार पर देखने को मिला।
भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार की शुरुआत कमजोर रही। कारोबार शुरू होते ही सेंसेक्स 600 अंकों से ज्यादा नीचे आ गया और निफ्टी भी 24,000 के करीब पहुंच गया। बाजार में लगभग सभी बड़े सेक्टरों में बिकवाली देखने को मिली। निवेशकों ने नए निवेश करने के बजाय सावधानी बरतना बेहतर समझा।
बाजार में आई इस गिरावट के पीछे कई वजहें हैं। सबसे बड़ा कारण अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव माना जा रहा है। इसके अलावा कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और एशियाई बाजारों की कमजोरी ने भी भारतीय शेयर बाजार पर दबाव बनाया।
सुबह से ही बाजार पर रहा दबाव कारोबार शुरू होने के कुछ ही समय बाद सेंसेक्स और निफ्टी दोनों लाल निशान में कारोबार करने लगे। कई बड़ी कंपनियों के शेयरों में बिकवाली देखने को मिली। बैंक, ऑटो, मेटल और ऊर्जा क्षेत्र के शेयरों में ज्यादा कमजोरी रही।
हालांकि बाजार में उतार-चढ़ाव सामान्य बात है, लेकिन जब कई बड़े कारण एक साथ सामने आते हैं तो निवेशकों की चिंता बढ़ जाती है। मंगलवार को भी ऐसा ही देखने को मिला।
अमेरिका और ईरान के तनाव का असर इन दिनों अमेरिका और ईरान के बीच हालात फिर से तनावपूर्ण बने हुए हैं। दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव का असर दुनिया के कई वित्तीय बाजारों पर दिखाई दे रहा है। निवेशकों को चिंता है कि अगर यह तनाव और बढ़ता है तो वैश्विक कारोबार और तेल की सप्लाई प्रभावित हो सकती है।
जब दुनिया में इस तरह की स्थिति बनती है तो निवेशक सुरक्षित निवेश की ओर बढ़ते हैं और शेयर बाजार में बिकवाली बढ़ जाती है। भारतीय बाजार पर भी इसी वजह से दबाव देखने को मिला।
कच्चे तेल की कीमतों में तेजी अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर कच्चे तेल के बाजार पर भी पड़ा। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमत बढ़ गई।
भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल विदेशों से खरीदता है। जब तेल महंगा होता है तो कंपनियों का खर्च बढ़ सकता है। इससे कई उद्योगों पर असर पड़ता है और निवेशकों की चिंता भी बढ़ जाती है। यही कारण है कि तेल की कीमतों में तेजी को शेयर बाजार के लिए अच्छा संकेत नहीं माना जाता।
विदेशी निवेशकों की बिकवाली जारी भारतीय शेयर बाजार में विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी FII की भूमिका काफी महत्वपूर्ण होती है। हाल के समय में विदेशी निवेशकों ने लगातार बिकवाली की है।
जब विदेशी निवेशक बड़ी मात्रा में शेयर बेचते हैं तो बाजार में दबाव बढ़ जाता है। दूसरी ओर घरेलू संस्थागत निवेशक यानी DII खरीदारी करते रहे हैं, लेकिन विदेशी निवेशकों की बिकवाली का असर अभी भी साफ दिखाई दे रहा है।
एशियाई बाजारों से नहीं मिले अच्छे संकेत मंगलवार सुबह जापान, हांगकांग, चीन और दक्षिण कोरिया के प्रमुख शेयर बाजारों में भी गिरावट दर्ज की गई। एशियाई बाजारों की कमजोरी का असर भारतीय बाजार पर भी पड़ा।
भारतीय बाजार अक्सर एशियाई बाजारों के शुरुआती रुख का अनुसरण करते हैं। जब वहां कमजोरी रहती है तो भारत में भी निवेशक सतर्क हो जाते हैं।
अमेरिकी बाजार भी रहे कमजोर सोमवार को अमेरिका के प्रमुख शेयर बाजार भी गिरावट के साथ बंद हुए। इससे निवेशकों का भरोसा कुछ कमजोर हुआ। अमेरिकी बाजारों में आई गिरावट का असर अगले दिन एशियाई और भारतीय बाजारों में भी देखने को मिला।
वैश्विक बाजार आज पहले की तुलना में ज्यादा जुड़े हुए हैं। इसलिए किसी एक बड़े देश में होने वाली आर्थिक या राजनीतिक घटना का असर दूसरे देशों के बाजारों पर भी पड़ता है।
किन सेक्टरों में रही सबसे ज्यादा कमजोरी? आज के कारोबार में बैंकिंग, ऑटो, मेटल और ऊर्जा क्षेत्र के शेयरों पर सबसे ज्यादा दबाव दिखाई दिया। कई बड़ी कंपनियों के शेयर लाल निशान में कारोबार करते रहे।
हालांकि कुछ आईटी कंपनियों के शेयरों में सीमित खरीदारी देखने को मिली, लेकिन इससे पूरे बाजार को ज्यादा सहारा नहीं मिल पाया।
निवेशकों के लिए इसका क्या मतलब है? शेयर बाजार में गिरावट का मतलब हमेशा नुकसान नहीं होता। कई बार बाजार अंतरराष्ट्रीय घटनाओं की वजह से कुछ समय के लिए नीचे आता है और बाद में फिर संभल जाता है।
जो लोग लंबे समय के लिए निवेश करते हैं, उनके लिए ऐसे उतार-चढ़ाव सामान्य माने जाते हैं। लेकिन छोटे समय के निवेशकों को बाजार की हर बड़ी खबर पर नजर रखनी चाहिए।
आगे किन बातों पर रहेगी नजर? आने वाले दिनों में निवेशकों की नजर सबसे पहले अमेरिका और ईरान के बीच की स्थिति पर रहेगी। अगर तनाव कम होता है तो बाजार को राहत मिल सकती है। वहीं अगर हालात और बिगड़ते हैं तो बाजार पर दबाव बना रह सकता है।
इसके अलावा कच्चे तेल की कीमतें, विदेशी निवेशकों की खरीद-बिक्री और कंपनियों के तिमाही नतीजे भी बाजार की दिशा तय करेंगे। अगर कंपनियों के नतीजे उम्मीद से बेहतर आते हैं तो बाजार में फिर से तेजी लौट सकती है।
बाजार में निवेश करते समय क्या रखें ध्यान? बाजार में गिरावट देखकर घबराकर फैसला लेना सही नहीं माना जाता। किसी भी शेयर में निवेश करने से पहले कंपनी के कारोबार, उसकी कमाई और भविष्य की योजनाओं को समझना जरूरी है।
निवेशकों को केवल अफवाहों या सोशल मीडिया पर चल रही खबरों के आधार पर निवेश नहीं करना चाहिए। सही जानकारी और सोच-समझकर लिया गया फैसला लंबे समय में बेहतर साबित हो सकता है। अगर बाजार में ज्यादा उतार-चढ़ाव हो तो अपने निवेश की समीक्षा करना अच्छा रहता है। जरूरत पड़ने पर वित्तीय सलाहकार की राय भी ली जा सकती है।
फिलहाल क्या है स्थिति? फिलहाल भारतीय शेयर बाजार पर वैश्विक हालात का असर साफ दिखाई दे रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव, महंगा होता कच्चा तेल और विदेशी निवेशकों की बिकवाली निवेशकों की चिंता बढ़ा रहे हैं। वहीं घरेलू निवेशक खरीदारी कर बाजार को कुछ सहारा देने की कोशिश कर रहे हैं।
आने वाले कारोबारी दिनों में दुनिया के बाजारों का रुख, तेल की कीमतों में बदलाव और कंपनियों के तिमाही नतीजे यह तय करेंगे कि भारतीय शेयर बाजार में फिर से तेजी लौटती है या दबाव कुछ समय तक बना रहता है।
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डिस्क्लेमर: इस पोस्ट में दिया गया कंटेंट केवल जानकारी और शिक्षा के उद्देश्य से है। यह कोई निवेश सलाह, स्टॉक की सिफारिश, या किसी भी सिक्योरिटी को खरीदने या बेचने का ऑफर नहीं है। पाठकों को सलाह दी जाती है कि निवेश से पहले खुद रिसर्च करें या SEBI में रजिस्टर्ड किसी निवेश सलाहकार से सलाह लें। लेखक SEBI-रजिस्टर्ड निवेश सलाहकार नहीं है।
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