कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने राज्य के विधायकों, अधिकारियों और न्यायाधीशों को तिरुमला मंदिर की विशेष ‘नित्य आरती दर्शन’ सुविधा देने की घोषणा की है। इस पर टीटीडी बोर्ड सदस्य जी. भानुप्रकाश रेड्डी ने आपत्ति जताते हुए कहा कि यह सम्मान ऐतिहासिक रूप से मैसूर महाराजा और उनके प्रतिनिधियों तक सीमित है और इसे बिना टीटीडी की मंजूरी के किसी अन्य को नहीं दिया जा सकता। उन्होंने इसे ‘अधिकार क्षेत्र से बाहर का कदम’ बताया और कहा कि मामला मंगलवार को टीटीडी ट्रस्ट बोर्ड की बैठक में चर्चा के लिए रखा जाएगा।
कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार द्वारा राज्य के विधायकों, जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों और न्यायाधीशों को ‘तिरुमला नित्य आरती दर्शन’ की सुविधा देने की घोषणा पर तिरुमला तिरुपति देवस्थानम (टीटीडी) में विवाद खड़ा हो गया है। टीटीडी बोर्ड सदस्य जी. भानुप्रकाश रेड्डी ने इसे बिना परामर्श किया गया ‘अधिकार क्षेत्र से बाहर का कदम’ बताया है और कहा कि यह मामला मंगलवार को ट्रस्ट बोर्ड की बैठक में उठाया जाएगा।
कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार द्वारा तिरुमला मंदिर में ‘नित्य आरती दर्शन’ की सुविधा राज्य के विधायकों, जनप्रतिनिधियों, नौकरशाहों और न्यायाधीशों को उपलब्ध कराने की घोषणा ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। तिरुमला तिरुपति देवस्थानम (टीटीडी) के एक ट्रस्ट बोर्ड सदस्य ने इस प्रस्ताव पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा है कि ऐसा निर्णय टीटीडी से परामर्श किए बिना नहीं लिया जा सकता।
यह मुद्दा तब सामने आया जब डी.के. शिवकुमार ने हाल ही में तिरुपति जिले स्थित भगवान वेंकटेश्वर मंदिर में पूजा-अर्चना के दौरान घोषणा की कि कर्नाटक सरकार प्रोटोकॉल के अनुसार राज्य के प्रमुख जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों को ‘तिरुमला नित्य आरती दर्शन’ में भाग लेने की सुविधा दिलाने का प्रयास करेगी। उन्होंने यह भी कहा कि इस सुविधा को प्राथमिकता के आधार पर उपलब्ध कराया जाएगा।
क्या है ‘नित्य आरती दर्शन’? तिरुमला मंदिर में भगवान वेंकटेश्वर के मूल विग्रह (मूलविराट) के समक्ष गर्भगृह में प्रतिदिन विशेष आरती की जाती है। इस आरती में सामान्य श्रद्धालुओं को प्रवेश नहीं मिलता। इसमें केवल कुछ चुनिंदा पीठाधीश्वर, संत-महात्मा और विशेष प्रतिनिधि ही शामिल होते हैं। इनमें मैसूर महाराजा के प्रतिनिधि के रूप में नियुक्त विशेष अधिकारी भी शामिल होते हैं।
टीटीडी के अनुसार यह परंपरा कई दशकों पुरानी है और मैसूर राजघराने तथा तिरुमला मंदिर के बीच ऐतिहासिक संबंधों से जुड़ी हुई है। टीटीडी बोर्ड सदस्य की आपत्ति टीटीडी ट्रस्ट बोर्ड सदस्य जी. भानुप्रकाश रेड्डी ने मुख्यमंत्री शिवकुमार की घोषणा को ‘एकतरफा’ बताते हुए कहा कि यह टीटीडी के अधिकार क्षेत्र में हस्तक्षेप जैसा है। उन्होंने कहा कि नित्य आरती में भाग लेने का सम्मान टीटीडी द्वारा विशेष परिस्थितियों में मैसूर महाराजा और उनके प्रतिनिधियों को दिया गया है।
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“यह सम्मान ऐतिहासिक संबंधों, योगदान और तिरुमला मंदिर को दी गई सेवाओं के आधार पर प्रदान किया गया था। यह हस्तांतरणीय नहीं है और इसलिए इसे किसी अन्य व्यक्ति या समूह तक बढ़ाया नहीं जा सकता।” उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कर्नाटक सरकार द्वारा सिफारिश किए जाने मात्र से इस विशेषाधिकार को अन्य लोगों तक नहीं बढ़ाया जा सकता।
आंध्र प्रदेश सरकार से हुई थी क्या चर्चा? रिपोर्ट के अनुसार यह स्पष्ट नहीं है कि मुख्यमंत्री शिवकुमार ने यह घोषणा करने से पहले आंध्र प्रदेश सरकार या टीटीडी प्रबंधन से कोई औपचारिक बातचीत की थी या नहीं। इसी कारण यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या इस तरह की व्यवस्था के लिए दोनों राज्यों के बीच पहले से कोई सहमति बनी थी।
अन्य राज्यों से भी उठ सकती हैं मांगें भानुप्रकाश रेड्डी ने चिंता जताई कि यदि कर्नाटक के जनप्रतिनिधियों को इस विशेष आरती में शामिल होने की अनुमति दी जाती है, तो भविष्य में अन्य राज्यों के नेता भी ऐसी मांग कर सकते हैं। उनका कहना है कि इससे मंदिर की पारंपरिक व्यवस्था और विशेष सम्मान की मूल भावना प्रभावित हो सकती है।
“यदि एक राज्य के लिए यह दरवाजा खोला गया तो अन्य राज्यों से भी समान मांगें आने लगेंगी, जिससे व्यवस्था पर दबाव बढ़ेगा।” राजनीतिक रंग न देने की अपील जी. भानुप्रकाश रेड्डी, जो भारतीय जनता पार्टी के राज्य प्रवक्ता भी हैं, ने मुख्यमंत्री शिवकुमार से अपील की कि वे इस विशेष धार्मिक सम्मान को राजनीतिक मुद्दा न बनाएं। उन्होंने कहा कि तिरुमला को किसी भी राज्य के नेताओं के लिए राजनीतिक मंच या विशेषाधिकार केंद्र के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
मंगलवार को होगी चर्चा टीटीडी बोर्ड सदस्य ने बताया कि इस पूरे मामले को मंगलवार को होने वाली टीटीडी ट्रस्ट बोर्ड की बैठक में चर्चा के लिए रखा जाएगा। बैठक में यह तय किया जा सकता है कि नित्य आरती से जुड़ी मौजूदा परंपराओं और प्रोटोकॉल को लेकर आगे क्या रुख अपनाया जाए।
तिरुमला मंदिर का महत्व तिरुमला स्थित भगवान वेंकटेश्वर मंदिर दुनिया के सबसे बड़े और सबसे अधिक दर्शन किए जाने वाले हिंदू मंदिरों में शामिल है। हर महीने लाखों श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं। हाल के महीनों में मंदिर ने श्रद्धालुओं की संख्या और हुंडी संग्रह दोनों में रिकॉर्ड स्तर दर्ज किए हैं। ऐसे में मंदिर की विशेष धार्मिक परंपराओं से जुड़े किसी भी निर्णय को अत्यंत संवेदनशील माना जाता है।
विवाद का केंद्र पूरे विवाद का मुख्य प्रश्न यह है कि क्या ऐतिहासिक और परंपरागत रूप से सीमित दायरे में दिए जाने वाले ‘नित्य आरती दर्शन’ के अधिकार को व्यापक श्रेणी के जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों तक बढ़ाया जा सकता है। टीटीडी के एक वर्ग का कहना है कि यह विशेष सम्मान केवल मैसूर राजपरिवार और उनके अधिकृत प्रतिनिधियों तक सीमित है, जबकि कर्नाटक सरकार की घोषणा ने इस पर नई बहस छेड़ दी है।
अब सबकी नजर मंगलवार को होने वाली टीटीडी ट्रस्ट बोर्ड की बैठक पर है, जहां इस मुद्दे पर आधिकारिक चर्चा होने वाली है।
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