इथियोपिया ने अपने राष्ट्रीय ‘ग्रीन लेगेसी’ अभियान के तहत एक ही दिन में 70 करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य रखा है। सरकार का उद्देश्य 2026 तक कुल 50 अरब पेड़ लगाकर वनों की कटाई, मिट्टी के कटाव और सूखे जैसी पर्यावरणीय चुनौतियों से मुकाबला करना है।
"इथियोपिया ने पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वाकांक्षी कदम उठाते हुए राष्ट्रीय स्तर पर एक ही दिन में 70 करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य तय किया है। यह अभियान देश के ‘ग्रीन लेगेसी’ कार्यक्रम का हिस्सा है, जिसके तहत वर्ष 2026 तक कुल 50 अरब पेड़ों का रोपण करने का लक्ष्य रखा गया है। सरकार का मानना है कि बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण से वनों की कटाई की समस्या कम करने, मिट्टी के कटाव पर नियंत्रण पाने और सूखे के बढ़ते असर को घटाने में मदद मिलेगी।
अभियान के दौरान देशभर में लोगों की व्यापक भागीदारी देखने को मिली। उपलब्ध आधिकारिक जानकारी के अनुसार, अभियान वाले दिन सुबह छह बजे तक करीब 1.49 करोड़ नागरिक लगभग 35.5 करोड़ पौधे लगा चुके थे। इसके कुछ घंटों बाद दोपहर तक यह संख्या बढ़कर लगभग 51.7 करोड़ पौधों तक पहुंच गई। यह आंकड़ा उस दिन के 70 करोड़ पौधे लगाने के लक्ष्य का लगभग तीन-चौथाई हिस्सा था।
इस राष्ट्रीय अभियान में समाज के विभिन्न वर्गों ने हिस्सा लिया। सरकारी कर्मचारी, स्कूली बच्चे, बुज़ुर्ग, राजनयिक और विदेशी निवेशक भी वृक्षारोपण अभियान से जुड़े। सरकार का उद्देश्य इसे केवल सरकारी कार्यक्रम तक सीमित रखने के बजाय जनभागीदारी का अभियान बनाना है, ताकि पर्यावरण संरक्षण को सामाजिक जिम्मेदारी के रूप में आगे बढ़ाया जा सके।
‘ग्रीन लेगेसी’ कार्यक्रम पिछले कई वर्षों से चल रहा है। सरकार का दावा है कि इस पहल के तहत अब तक 40 अरब से अधिक पेड़ लगाए जा चुके हैं। मौजूदा अभियान उसी दीर्घकालिक योजना का विस्तार है, जिसमें केवल पौधे लगाने पर नहीं बल्कि उनकी उपयोगिता और दीर्घकालिक संरक्षण पर भी जोर दिया जा रहा है।
कार्यक्रम के तहत स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप पौधों की प्रजातियों का चयन करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। साथ ही यह सुनिश्चित करने की कोशिश की जा रही है कि पौधारोपण उन क्षेत्रों में हो जहां मिट्टी, जल संसाधन और पर्यावरणीय परिस्थितियां उनके विकास के लिए उपयुक्त हों। अधिकारियों का मानना है कि वृक्षारोपण तभी प्रभावी माना जाएगा जब लगाए गए पौधों की नियमित देखभाल भी की जाए।
पर्यावरण विशेषज्ञ लंबे समय से यह बताते रहे हैं कि केवल पौधे लगाने से ही जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियों का समाधान संभव नहीं है। पौधों का जीवित रहना, उनकी सुरक्षा, पर्याप्त सिंचाई, भूमि संरक्षण और जल संसाधनों का बेहतर प्रबंधन भी उतना ही महत्वपूर्ण है। यदि इन पहलुओं पर समान रूप से काम किया जाए तो वृक्षारोपण अभियान का सकारात्मक प्रभाव अधिक स्थायी हो सकता है।
इथियोपिया का यह अभियान दुनिया के उन प्रयासों में शामिल है, जिनमें बड़े पैमाने पर सामुदायिक भागीदारी के साथ पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा दिया जा रहा है। इससे यह भी संकेत मिलता है कि यदि सरकार, स्थानीय प्रशासन और नागरिक मिलकर काम करें तो प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण की दिशा में व्यापक अभियान चलाए जा सकते हैं।
भारत जैसे देशों के लिए भी यह पहल उपयोगी उदाहरण मानी जा सकती है, जहां हर वर्ष मानसून के दौरान बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे अभियानों की सफलता केवल लगाए गए पौधों की संख्या से नहीं बल्कि उनके संरक्षण, निगरानी और दीर्घकालिक देखभाल से तय होती है। इसी कारण वैज्ञानिक योजना, स्थानीय प्रजातियों का चयन और सामुदायिक सहभागिता किसी भी हरित अभियान की सफलता के अहम आधार माने जाते हैं।
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