मुंबई के मानखुर्द इलाके में रविवार रात भारी बारिश के बीच एक पुरानी तीन मंजिला चॉल का हिस्सा ढह गया। हादसे में छह लोगों की मौत हो गई, एक व्यक्ति घायल है और मलबे में कुछ अन्य लोगों के फंसे होने की आशंका के बीच राहत एवं बचाव कार्य जारी है।
"मुंबई के मानखुर्द इलाके में रविवार देर रात हुए दर्दनाक हादसे ने एक बार फिर शहर की पुरानी इमारतों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। जनता नगर स्थित एक तीन मंजिला पुरानी चॉल का हिस्सा अचानक भरभराकर गिर गया। शुरुआती जानकारी के अनुसार इस हादसे में कम से कम छह लोगों की मौत हो गई है, जबकि एक व्यक्ति घायल हुआ है। अधिकारियों का कहना है कि मलबे में कुछ अन्य लोगों के फंसे होने की आशंका को देखते हुए बचाव अभियान लगातार जारी है।
यह घटना मानखुर्द के जनता नगर में हनुमान मंदिर के पीछे स्थित चॉल नंबर-5 में हुई। हादसे के समय मुंबई के कई हिस्सों में लगातार तेज बारिश हो रही थी। बताया गया कि इमारत के दो से तीन टेनमेंट अचानक ढह गए, जिससे बड़ी मात्रा में मलबा जमा हो गया और कई लोग उसके नीचे दब गए।
घटना की सूचना मिलते ही ब्रिहनमुंबई म्युनिसिपल कॉरपोरेशन (बीएमसी), मुंबई फायर ब्रिगेड, पुलिस और 108 एंबुलेंस सेवा की टीमें मौके पर पहुंचीं। राहत और बचाव दलों ने रातभर मलबा हटाने का काम जारी रखा। अधिकारियों के अनुसार, बचाव अभियान में विशेष उपकरणों की मदद ली जा रही है ताकि मलबे के नीचे फंसे लोगों तक सुरक्षित पहुंचा जा सके।
अब तक मिली आधिकारिक जानकारी के अनुसार मृतकों में चार महिलाएं और दो पुरुष शामिल हैं। घायल व्यक्ति को अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उसका इलाज चल रहा है। प्रशासन का कहना है कि मलबे की पूरी तरह तलाशी पूरी होने तक बचाव अभियान जारी रहेगा और फंसे लोगों की सही संख्या का पता अभियान समाप्त होने के बाद ही चल सकेगा।
हादसे के समय मुंबई में भारी बारिश का दौर जारी था। पिछले 24 घंटों के दौरान शहर के अलग-अलग हिस्सों में 200 से 300 मिलीमीटर तक बारिश दर्ज की गई। लगातार बारिश के कारण कई इलाकों में जलभराव, पेड़ गिरने और यातायात प्रभावित होने जैसी घटनाएं भी सामने आईं। तेज हवा और कम दृश्यता की वजह से मुंबई एयरपोर्ट पर उड़ानों का संचालन भी करीब एक घंटे तक प्रभावित रहा। इसी दौरान कुरला इलाके में पेड़ गिरने की एक अलग घटना में एक व्यक्ति की मौत की भी सूचना मिली।
मानखुर्द की घटना ने एक बार फिर मुंबई की पुरानी इमारतों की स्थिति पर सवाल खड़े कर दिए हैं। शहर के कई हिस्सों, खासकर मानखुर्द, चेंबूर, दादर और दक्षिण मुंबई में बड़ी संख्या में दशकों पुरानी चॉलें और इमारतें आज भी आबाद हैं। हर मानसून के दौरान ऐसी इमारतों की मजबूती को लेकर चिंता बढ़ जाती है और कई बार जर्जर संरचनाओं के ढहने की घटनाएं सामने आती हैं।
मुंबई में बड़ी संख्या में पुरानी 'सेस्ड' और गैर-सेस्ड इमारतें हैं, जिनमें से कई का पुनर्विकास लंबे समय से लंबित है। हर बड़े हादसे के बाद भवनों के स्ट्रक्चरल ऑडिट, नोटिस जारी करने और पुनर्विकास की प्रक्रिया तेज करने की बात कही जाती है, लेकिन कई परियोजनाएं वर्षों से अधूरी हैं। यही वजह है कि मानसून के दौरान कमजोर इमारतों को लेकर खतरा बना रहता है।
फिलहाल प्रशासन का पूरा ध्यान राहत और बचाव अभियान पर है। अधिकारी मलबे की जांच कर रहे हैं और फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने का प्रयास जारी है। हादसे के कारणों की जांच भी की जाएगी। प्रशासन ने लोगों से जर्जर और कमजोर इमारतों में रहने की स्थिति में स्थानीय अधिकारियों के निर्देशों का पालन करने और भवनों की सुरक्षा संबंधी आवश्यक प्रक्रियाओं पर ध्यान देने की अपील की है।
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