दक्षिण कोरिया में कुछ कंपनियां और शोध समूह ऐसी एआई तकनीक विकसित कर रहे हैं, जो पुराने फोटो, वीडियो और ऑडियो की मदद से दिवंगत लोगों के डिजिटल वीडियो तैयार करती है। यह तकनीक कुछ परिवारों को भावनात्मक सुकून देती है, जबकि मानसिक स्वास्थ्य और नैतिक पहलुओं को लेकर कई सवाल भी उठ रहे हैं।
"दक्षिण कोरिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का इस्तेमाल अब केवल कामकाज, शिक्षा या मनोरंजन तक सीमित नहीं रह गया है। देश में कुछ कंपनियां और शोध समूह ऐसी तकनीक पर काम कर रहे हैं, जिसकी मदद से दिवंगत लोगों के डिजिटल वीडियो तैयार किए जा रहे हैं। इन वीडियो के जरिए परिवार अपने खो चुके प्रियजनों को फिर से बोलते, मुस्कुराते या कोई संदेश देते हुए देख पा रहे हैं। यह तकनीक भावनात्मक रूप से लोगों को जोड़ने की कोशिश करती है, लेकिन इसके साथ कई संवेदनशील सवाल भी सामने आ रहे हैं।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस प्रक्रिया में परिवार अपने दिवंगत परिजन की पुरानी तस्वीरें, वीडियो रिकॉर्डिंग और ऑडियो क्लिप उपलब्ध कराते हैं। एआई सिस्टम इन सामग्रियों का विश्लेषण कर संबंधित व्यक्ति के चेहरे के हावभाव, आवाज़ और बोलने के तरीके को समझता है। इसके बाद कंप्यूटर एक नया वीडियो तैयार करता है, जिसमें वह व्यक्ति वास्तविक नहीं बल्कि डिजिटल रूप में दिखाई देता है और पहले से तैयार किए गए संदेश या बातचीत का हिस्सा बनता है।
ऐसे वीडियो देखने वाले कुछ परिवारों का कहना है कि उन्हें इससे मानसिक रूप से राहत मिली। कई लोगों को ऐसा महसूस हुआ कि वे अपने प्रियजन को अंतिम बार देख सके या उनसे अधूरी रह गई भावनाओं को किसी हद तक व्यक्त कर पाए। कुछ मामलों में इसे विदाई के भावनात्मक अनुभव से भी जोड़ा जा रहा है।
दूसरी ओर, हर व्यक्ति इस तकनीक को सहज नहीं मानता। कई लोगों का मानना है कि एआई के जरिए तैयार किया गया ऐसा डिजिटल रूप वास्तविक स्मृतियों और कृत्रिम पुनर्निर्माण के बीच की दूरी को कम कर देता है। इससे यह सवाल भी उठता है कि क्या किसी व्यक्ति की यादों को इस तरह डिजिटल रूप में दोबारा प्रस्तुत करना भावनात्मक रूप से सही है या नहीं।
मानसिक स्वास्थ्य और ग्रिफ़ थेरपी से जुड़े क्षेत्रों में भी इस तकनीक को लेकर चर्चा बढ़ रही है। विशेषज्ञों के बीच यह विचार सामने आ रहा है कि कुछ परिस्थितियों में यह तकनीक शोक से उबरने की प्रक्रिया में सहायक हो सकती है, लेकिन हर व्यक्ति पर इसका असर एक जैसा नहीं होगा। बिना उचित सलाह या पेशेवर मार्गदर्शन के ऐसे एआई वीडियो का उपयोग कुछ लोगों के लिए उलझन या भावनात्मक तनाव भी पैदा कर सकता है।
तकनीक के बढ़ते उपयोग के साथ गोपनीयता और नैतिकता के मुद्दे भी महत्वपूर्ण हो गए हैं। किसी दिवंगत व्यक्ति की आवाज़, चेहरा और व्यक्तित्व का डिजिटल पुनर्निर्माण किस सीमा तक किया जाना चाहिए और इसके लिए किस तरह की सहमति या कानूनी व्यवस्था जरूरी होगी, इस पर भी चर्चा"
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