देश के कई हिस्सों में मानसून की गतिविधियां तेज हो गई हैं। भारतीय मौसम विभाग ने महाराष्ट्र, तेलंगाना और पूर्वी भारत के कई क्षेत्रों में 28 जून तक तेज बारिश और गरज-चमक के साथ मौसम खराब रहने की संभावना जताई है।
"देश में कुछ दिनों की सुस्ती के बाद दक्षिण-पश्चिम मानसून ने एक बार फिर गति पकड़ ली है। भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) के ताजा पूर्वानुमान के अनुसार महाराष्ट्र, तेलंगाना और पूर्वी भारत के कई इलाकों में अगले कुछ दिनों तक व्यापक बारिश होने की संभावना है। विभाग ने 28 जून तक कई राज्यों में भारी वर्षा, गरज-चमक और तेज हवाओं की चेतावनी जारी की है।
मौसम विभाग का कहना है कि मानसून का सक्रिय चरण अब आगे बढ़ रहा है और इसका असर मध्य तथा पूर्वी भारत के बड़े हिस्से में देखने को मिल सकता है। कई क्षेत्रों में लगातार बारिश से तापमान में कमी आने की उम्मीद है, जबकि कुछ इलाकों में जलभराव और स्थानीय स्तर पर आवागमन प्रभावित होने की आशंका भी बनी हुई है।
यह मौसमीय बदलाव ऐसे समय में आया है जब देश के कई जिले पहले से ही मौसम संबंधी जोखिमों के लिहाज से संवेदनशील माने जा रहे हैं। एल नीनो के प्रभाव को लेकर पिछले महीनों में चिंता जताई जाती रही है। मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी परिस्थितियों में कुछ क्षेत्रों में वर्षा की कमी देखने को मिल सकती है, जबकि दूसरे हिस्सों में कम समय में अधिक बारिश की घटनाएं सामने आ सकती हैं।
महाराष्ट्र और तेलंगाना के अलावा पूर्वी भारत के कई राज्यों में भी मानसूनी गतिविधियां बढ़ने की संभावना है। आईएमडी ने कई स्थानों पर व्यापक वर्षा का अनुमान जताया है। ऐसे में स्थानीय प्रशासन को निचले इलाकों, नदी किनारे बसे क्षेत्रों और जलभराव की आशंका वाले स्थानों पर निगरानी बनाए रखने की जरूरत होगी।
मानसून की सक्रियता किसानों के लिए राहत लेकर आ सकती है। खरीफ फसलों की बुआई का समय शुरू हो चुका है और शुरुआती अच्छी बारिश खेतों में नमी बढ़ाने में मददगार मानी जाती है। पर्याप्त वर्षा होने पर धान, मक्का, सोयाबीन और अन्य खरीफ फसलों की बुवाई को गति मिल सकती है। कृषि क्षेत्र लंबे समय से मानसून की स्थिर प्रगति का इंतजार कर रहा था।
दूसरी ओर, शहरी क्षेत्रों में तेज बारिश एक अलग चुनौती भी पेश करती है। पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बढ़ते शहरीकरण और पुराने जल निकासी तंत्र के कारण कई शहरों में मध्यम से तेज बारिश के दौरान सड़कों पर पानी भरने की समस्या सामने आती रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि जल निकासी व्यवस्था पर दबाव बढ़ने से छोटी अवधि की भारी बारिश भी लोगों के दैनिक जीवन को प्रभावित कर सकती है।
आपदा प्रबंधन से जुड़े जानकार लंबे समय से इस बात पर जोर देते रहे हैं कि बाढ़ और जलभराव से होने वाले नुकसान को केवल मौसम से जोड़कर नहीं देखा जा सकता। नालों पर अतिक्रमण, प्राकृतिक जलमार्गों में बाधा और अनियोजित निर्माण कई बार स्थिति को और गंभीर बना देते हैं। इसी वजह से कई राज्यों ने मानसून के दौरान अर्ली वार्निंग सिस्टम और मोबाइल अलर्ट सेवाओं को सक्रिय किया है ताकि लोगों तक समय रहते जानकारी पहुंच सके।
मौसम विभाग ने लोगों को स्थानीय प्रशासन और आधिकारिक मौसम बुलेटिन पर नजर रखने की सलाह दी है। जिन क्षेत्रों में भारी बारिश की संभावना जताई गई है, वहां यात्रा की योजना बनाते समय मौसम की स्थिति की जानकारी लेना उपयोगी रहेगा। आने वाले कुछ दिनों में मानसून की प्रगति और वर्षा की तीव्रता पर मौसम विभाग लगातार नजर बनाए हुए है।
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