दुबई से जयपुर आ रही Air India Express की फ्लाइट IX-196 में यात्रियों ने बिना AC, पानी और पर्याप्त जानकारी के घंटों तक विमान में बैठाए रखने का आरोप लगाया। एयरलाइन ने पांच घंटे की देरी के दावे को खारिज करते हुए कहा कि यात्री करीब 1 घंटे 25 मिनट ही विमान में रहे और देरी की वजह ATC कंजेशन थी।
"दुबई से जयपुर पहुंचने वाली Air India Express की फ्लाइट IX-196 इन दिनों सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो और यात्रियों के आरोपों के कारण चर्चा में है। यात्रियों का दावा है कि उन्हें भीषण गर्मी के बीच लंबे समय तक विमान के भीतर बिना एयर कंडीशनिंग, पानी और स्पष्ट जानकारी के बैठाए रखा गया। कई लोगों ने इस अनुभव को ""तंदूर जैसा माहौल"" बताते हुए अपनी नाराजगी जाहिर की है।
यह मामला 13 जून की रात का बताया जा रहा है। यात्रियों के अनुसार, उन्हें निर्धारित प्रक्रिया के तहत विमान में बोर्डिंग करा दी गई थी, लेकिन इसके बाद विमान काफी देर तक खड़ा रहा। उनका कहना है कि केबिन के भीतर गर्मी लगातार बढ़ती गई और राहत के पर्याप्त इंतजाम नहीं किए गए।
सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो और तस्वीरों में कई यात्री पसीना पोंछते नजर आए। कुछ लोग बच्चों को हाथ से हवा करते दिखाई दिए, जबकि कुछ यात्रियों को क्रू सदस्यों से स्थिति को लेकर सवाल-जवाब करते भी देखा गया। वायरल पोस्टों में बुजुर्गों और छोटे बच्चों को सबसे अधिक परेशानी होने का दावा किया गया।
दूसरी ओर, Air India Express ने यात्रियों के आरोपों का अलग पक्ष रखा है। कंपनी ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि फ्लाइट की देरी एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) कंजेशन और कुछ एयरस्पेस बंद रहने के कारण हुई। एयरलाइन के मुताबिक, बोर्डिंग रात 10 बजकर 44 मिनट पर शुरू हुई थी और विमान 12 बजकर 9 मिनट पर ""ऑफ-चॉक्स"" हुआ, यानी विमान ने पार्किंग स्थिति छोड़कर प्रस्थान की प्रक्रिया शुरू की। कंपनी का कहना है कि यात्रियों के विमान में रहने की अवधि लगभग 1 घंटा 25 मिनट थी, न कि पांच घंटे जैसा दावा किया जा रहा है।
यात्रियों की शिकायत केवल देरी तक सीमित नहीं है। कई लोगों ने आरोप लगाया कि उन्हें स्थिति के बारे में समय-समय पर स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई। उनका कहना है कि यदि देरी अपरिहार्य थी, तब भी यात्रियों को पानी, आवश्यक सुविधाएं और नियमित अपडेट उपलब्ध कराए जाने चाहिए थे।
यह घटना ऐसे समय सामने आई है जब बीते कुछ वर्षों में भारत से जुड़ी कई उड़ानों में लंबे टारमैक डिले और यात्रियों की असुविधा की शिकायतें सुर्खियां बन चुकी हैं। विमानन क्षेत्र से जुड़े जानकारों का मानना है कि तकनीकी कारणों या ATC प्रतिबंधों के चलते देरी होना असामान्य नहीं है, लेकिन उस दौरान यात्रियों की बुनियादी सुविधाओं और केबिन के तापमान का प्रबंधन एयरलाइन की जिम्मेदारी का हिस्सा माना जाता है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यूरोप और अमेरिका में टारमैक डिले को लेकर अपेक्षाकृत सख्त नियम लागू हैं। कई मामलों में नियामक संस्थाएं एयरलाइनों पर जुर्माना भी लगाती हैं और यात्रियों के अधिकारों को लेकर स्पष्ट दिशानिर्देश मौजूद हैं। भारत में भी लंबे समय से ऐसी मांग उठती रही है कि टारमैक डिले की स्थिति में यात्रियों को मिलने वाली सुविधाओं, मुआवजे और विमान से उतरने के अधिकार जैसे मुद्दों पर स्पष्ट और व्यावहारिक मानक तय किए जाएं।
दुबई-जयपुर फ्लाइट का यह विवाद केवल एक वायरल वीडियो भर नहीं रह गया है। इसने हवाई यात्रा के दौरान यात्रियों के अधिकार, एयरलाइनों की जवाबदेही और नियामकीय व्यवस्था की प्रभावशीलता को लेकर नई बहस को जन्म दिया है। फिलहाल, एयरलाइन अपने आधिकारिक पक्ष पर कायम है, जबकि यात्रियों की ओर से उठाए गए सवाल अब भी चर्चा का विषय बने हुए हैं।"
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