जोधपुर जिले के बाड़ी सीड गांव और फलौदी तहसील के बाप क्षेत्र में ACME Solar ने 33.33 मेगावॉट/120.38 मेगावॉट-घंटे क्षमता वाला बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम शुरू कर दिया है। इस नई क्षमता के जुड़ने से कंपनी की कुल BESS क्षमता 300 मेगावॉट/1404.32 मेगावॉट-घंटे तक पहुंच गई है।
राजस्थान के पश्चिमी रेगिस्तानी इलाके अब सिर्फ बड़े सोलर पार्कों की वजह से नहीं, बल्कि ऊर्जा भंडारण की नई तकनीकों के कारण भी देश के ऊर्जा मानचित्र पर अपनी मजबूत पहचान बना रहे हैं। इसी दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए ACME Solar Holdings Ltd. ने जोधपुर जिले में बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) की नई क्षमता का संचालन शुरू कर दिया है।
कंपनी ने अपनी सहायक इकाई ACME Sun Power के माध्यम से जोधपुर जिले के बाड़ी सीड गांव और फलौदी तहसील के बाप क्षेत्र में 33.33 मेगावॉट/120.38 मेगावॉट-घंटे क्षमता वाले बैटरी स्टोरेज प्रोजेक्ट को चालू किया है। कंपनी के अनुसार इस परियोजना की कमर्शियल ऑपरेशन डेट 14 जून 2026 दर्ज की गई, जबकि इसकी जानकारी 16 जून को सार्वजनिक की गई।
इस नई परियोजना के शुरू होने के बाद ACME Sun Power की कुल कमीशंड बैटरी स्टोरेज क्षमता बढ़कर 300 मेगावॉट/1404.32 मेगावॉट-घंटे हो गई है। कंपनी की यह क्षमता मुख्य रूप से राजस्थान के उन इलाकों में स्थापित की जा रही है, जहां सौर ऊर्जा उत्पादन की बड़ी संभावनाएं मौजूद हैं।
ऊर्जा क्षेत्र के जानकार लंबे समय से इस बात पर जोर देते रहे हैं कि नवीकरणीय ऊर्जा का विस्तार तभी प्रभावी हो सकता है जब उसके साथ पर्याप्त स्टोरेज क्षमता भी विकसित की जाए। सौर ऊर्जा का उत्पादन दिन के समय अधिक होता है, जबकि बिजली की मांग शाम और रात में बढ़ जाती है। ऐसे में बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम अतिरिक्त बिजली को सुरक्षित रखकर जरूरत के समय ग्रिड तक पहुंचाने का काम करता है।
स्थानीय स्तर पर इसका सीधा असर बिजली आपूर्ति की गुणवत्ता पर पड़ सकता है। दिन में पैदा होने वाली अतिरिक्त सौर ऊर्जा को बैटरियों में संग्रहित कर बाद में इस्तेमाल किया जा सकेगा। इससे ग्रिड की स्थिरता बेहतर होने की उम्मीद है और वोल्टेज में उतार-चढ़ाव या बिजली आपूर्ति में असंतुलन जैसी समस्याओं को कम करने में मदद मिल सकती है।
बेहतर गुणवत्ता वाली बिजली का लाभ घरेलू उपभोक्ताओं के साथ-साथ कृषि और छोटे औद्योगिक इकाइयों को भी मिल सकता है। स्थिर बिजली आपूर्ति से मोटर, पंप और अन्य मशीनों के संचालन पर सकारात्मक असर पड़ता है तथा वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों पर निर्भरता घटाने में भी सहायता मिलती है।
राजस्थान का जोधपुर-फलौदी क्षेत्र पहले से ही बड़े सौर ऊर्जा निवेश का केंद्र माना जाता है। पिछले कुछ वर्षों में यहां कई बड़े सोलर प्रोजेक्ट विकसित हुए हैं। ऐसे में बैटरी स्टोरेज परियोजनाओं का विस्तार इस क्षेत्र को ऊर्जा अवसंरचना के नए केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
कंपनी इससे पहले मार्च 2026 में भी राजस्थान में 155 मेगावॉट/470.25 मेगावॉट-घंटे क्षमता वाले स्टोरेज प्रोजेक्ट कमीशन कर चुकी है। ये परियोजनाएं इंटर-स्टेट ट्रांसमिशन सिस्टम से जुड़ी हैं और मर्चेंट आधार पर संचालित की जा रही हैं।
ऊर्जा संक्रमण की प्रक्रिया में बैटरी स्टोरेज तकनीक की भूमिका लगातार बढ़ रही है। जोधपुर और फलौदी क्षेत्र में शुरू हुई यह नई क्षमता न केवल नवीकरणीय ऊर्जा के बेहतर उपयोग की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि राजस्थान को स्वच्छ ऊर्जा आधारित ढांचे की ओर आगे बढ़ाने वाली पहलों में भी एक नई कड़ी के रूप में देखी जा रही है।
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