Google ने Chrome ब्राउज़र में पाई गई गंभीर सुरक्षा खामी CVE-2026-11645 को ठीक करने के लिए इमरजेंसी अपडेट जारी किया है। यह कमजोरी Chrome के V8 JavaScript इंजन में मिली थी और इसका इस्तेमाल वास्तविक साइबर हमलों में किया जा रहा था। कंपनी ने Windows, macOS और Linux यूजर्स को जल्द से जल्द ब्राउज़र अपडेट करने की सलाह दी है। Google के अनुसार, यह 2026 में Chrome की पांचवीं सक्रिय Zero-Day कमजोरी है, जिससे साइबर सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ी है।
Google ने Chrome ब्राउज़र में मिली एक गंभीर सुरक्षा खामी को दूर करने के लिए इमरजेंसी अपडेट जारी किया है। CVE-2026-11645 नाम की यह कमजोरी Chrome के V8 JavaScript इंजन में पाई गई थी और इसका इस्तेमाल साइबर हमलों में किया जा रहा था। कंपनी ने सभी यूजर्स को जल्द से जल्द ब्राउज़र अपडेट करने की सलाह दी है।
इंटरनेट का इस्तेमाल करने वाले करोड़ों लोगों के लिए Google Chrome सबसे लोकप्रिय वेब ब्राउज़र है। इसी वजह से जब Chrome में कोई बड़ी सुरक्षा खामी सामने आती है, तो उसका असर दुनिया भर के यूजर्स पर पड़ सकता है। Google ने अब ऐसी ही एक गंभीर समस्या को ठीक करने के लिए इमरजेंसी सुरक्षा अपडेट जारी किया है।
कंपनी के अनुसार, Chrome में मिली नई कमजोरी को CVE-2026-11645 नाम दिया गया है। यह खामी इतनी गंभीर मानी जा रही है कि इसका इस्तेमाल पहले से ही वास्तविक साइबर हमलों में किया जा रहा था। यही कारण है कि Google को सामान्य अपडेट चक्र का इंतजार किए बिना तुरंत सुरक्षा पैच जारी करना पड़ा।
यह 2026 में Chrome से जुड़ी पांचवीं Zero-Day कमजोरी है जिसे Google ने ठीक किया है। Zero-Day का मतलब ऐसी सुरक्षा खामी से होता है जिसकी जानकारी मिलने के बाद उससे जुड़ा हमला शुरू हो चुका हो या हमलावर पहले से उसका फायदा उठा रहे हों। ऐसे मामलों में यूजर्स के पास खुद को सुरक्षित करने के लिए बहुत कम समय होता है।
Google ने बताया कि यह कमजोरी Chrome के V8 JavaScript इंजन में मौजूद थी। V8 Chrome का एक बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा है जो वेबसाइटों पर चलने वाले JavaScript को प्रोसेस करता है। आज की लगभग हर आधुनिक वेबसाइट JavaScript का इस्तेमाल करती है, इसलिए V8 इंजन ब्राउज़र के सबसे अहम हिस्सों में से एक माना जाता है।
सुरक्षा सलाह के अनुसार, यह एक “Out-of-Bounds Read and Write” प्रकार की कमजोरी है। तकनीकी भाषा को आसान शब्दों में समझें तो इसका मतलब है कि सॉफ्टवेयर कभी-कभी तय सीमा से बाहर मौजूद मेमोरी तक पहुंच सकता है। इससे सिस्टम के भीतर मौजूद डेटा प्रभावित हो सकता है और हमलावर सुरक्षा कमजोरियों का फायदा उठा सकते हैं।
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विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी खामियां अक्सर साइबर अपराधियों के लिए बेहद उपयोगी साबित होती हैं। इनके जरिए वे सिस्टम की जानकारी हासिल करने, ब्राउज़र को अस्थिर करने या अन्य हमलों का रास्ता तैयार करने की कोशिश कर सकते हैं।
Google के मुताबिक, हमलावर इस कमजोरी का फायदा विशेष रूप से तैयार की गई वेबसाइटों या दुर्भावनापूर्ण HTML कंटेंट के जरिए उठा सकते हैं। यदि कोई यूजर ऐसी वेबसाइट खोलता है जिसमें खतरनाक कोड मौजूद हो, तो यह कमजोरी सक्रिय हो सकती है।
हालांकि Chrome में कई सुरक्षा परतें मौजूद हैं, फिर भी ऐसी कमजोरियां चिंता का विषय बन जाती हैं। Chrome का सैंडबॉक्स सिस्टम वेबसाइटों को कंप्यूटर के बाकी हिस्सों से अलग रखने का काम करता है। इसका उद्देश्य यह होता है कि अगर किसी वेबसाइट में समस्या हो तो उसका असर पूरे सिस्टम पर न पड़े। लेकिन कई बार हमलावर अलग-अलग कमजोरियों को जोड़कर अधिक जटिल हमले करने की कोशिश करते हैं।
Google ने Windows, macOS और Linux प्लेटफॉर्म के लिए अपडेट जारी कर दिया है। Windows और macOS उपयोगकर्ताओं के लिए Chrome 149. 0. 7827. 102 और 149. 0. 7827. 103 संस्करण उपलब्ध कराए गए हैं, जबकि Linux के लिए Chrome 149. 0. 7827.
102 रिलीज किया गया है। कंपनी का कहना है कि सभी यूजर्स तक यह अपडेट एक साथ नहीं पहुंचेगा। सामान्य तौर पर Chrome अपडेट चरणबद्ध तरीके से जारी किए जाते हैं। इसलिए कुछ लोगों को अपडेट तुरंत मिल सकता है, जबकि कुछ को इसके लिए कुछ दिन इंतजार करना पड़ सकता है।
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यदि आप यह जांचना चाहते हैं कि आपका Chrome अपडेट हुआ है या नहीं, तो ब्राउज़र के Settings मेनू में जाकर “About Google Chrome” सेक्शन खोल सकते हैं। यहां Chrome खुद ही नए अपडेट की जांच करता है और उपलब्ध होने पर उसे डाउनलोड करना शुरू कर देता है। अपडेट इंस्टॉल होने के बाद ब्राउज़र को दोबारा शुरू करना पड़ सकता है।
Google ने फिलहाल इस कमजोरी से जुड़ी पूरी तकनीकी जानकारी सार्वजनिक नहीं की है। कंपनी ने कहा है कि चूंकि इस खामी का इस्तेमाल वास्तविक हमलों में किया जा रहा था, इसलिए विस्तृत जानकारी को फिलहाल सीमित रखा जाएगा। ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि अन्य साइबर अपराधी इन जानकारियों का इस्तेमाल कर नए हमले विकसित न कर सकें। कंपनी ने यह भी नहीं बताया है कि इस कमजोरी का इस्तेमाल कौन कर रहा था या इसके पीछे किस तरह के हमलावर हो सकते हैं। अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि इसमें साइबर अपराधी समूह, जासूसी गतिविधियों से जुड़े संगठन या अन्य कोई पक्ष शामिल था।
साइबर सुरक्षा जगत में ब्राउज़र लंबे समय से हमलावरों के प्रमुख निशाने रहे हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि लोग ईमेल, सोशल मीडिया, बैंकिंग, ऑनलाइन शॉपिंग, क्लाउड सेवाओं और ऑफिस से जुड़े कई काम सीधे ब्राउज़र के जरिए करते हैं। ऐसे में यदि कोई हमलावर ब्राउज़र को निशाना बनाने में सफल हो जाए, तो उसे आगे के हमलों के लिए रास्ता मिल सकता है।
पिछले कुछ वर्षों में सुरक्षा एजेंसियों और शोधकर्ताओं ने कई ऐसे मामले सामने रखे हैं जिनमें ब्राउज़र कमजोरियों का इस्तेमाल पत्रकारों, सरकारी अधिकारियों, राजनीतिक कार्यकर्ताओं और कॉर्पोरेट संस्थानों को निशाना बनाने के लिए किया गया। यही कारण है कि Chrome, Firefox, Safari और Edge जैसे ब्राउज़रों की सुरक्षा पर लगातार काम किया जाता है।
2026 में यह पहला मौका नहीं है जब Google को Chrome की गंभीर कमजोरी के लिए आपातकालीन अपडेट जारी करना पड़ा हो। इससे पहले भी कंपनी कई सक्रिय Zero-Day कमजोरियों को ठीक कर चुकी है। इनमें V8 इंजन, Skia ग्राफिक्स लाइब्रेरी, CSS से जुड़े हिस्सों और WebGPU तकनीक से संबंधित खामियां शामिल थीं।
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सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि मेमोरी से जुड़ी कमजोरियां आज भी सॉफ्टवेयर सुरक्षा की सबसे बड़ी चुनौतियों में शामिल हैं। इसी वजह से Google, Microsoft और अन्य बड़ी तकनीकी कंपनियां Rust जैसी मेमोरी-सुरक्षित प्रोग्रामिंग भाषाओं के उपयोग पर जोर दे रही हैं। इन भाषाओं का उद्देश्य ऐसी गलतियों को कम करना है जो बाद में गंभीर सुरक्षा खामियों में बदल सकती हैं।
Google ने पिछले वर्ष 2025 में Chrome की आठ Zero-Day कमजोरियों को ठीक किया था। 2026 में भी लगातार सामने आ रही सुरक्षा समस्याएं दिखाती हैं कि साइबर सुरक्षा का क्षेत्र लगातार बदल रहा है और हमलावर नए तरीके खोजते रहते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि आम उपयोगकर्ताओं के लिए सबसे जरूरी कदम समय पर अपडेट इंस्टॉल करना है। अधिकांश साइबर हमले पुराने और असुरक्षित सॉफ्टवेयर को निशाना बनाते हैं। यदि सिस्टम और ब्राउज़र नियमित रूप से अपडेट किए जाते रहें, तो कई संभावित खतरों से बचा जा सकता है।
Google ने व्यक्तिगत उपयोगकर्ताओं, कंपनियों और सरकारी संस्थानों से अपील की है कि वे Chrome का नवीनतम संस्करण जल्द से जल्द इंस्टॉल करें। जिन संगठनों में Chromium आधारित अन्य ब्राउज़र इस्तेमाल किए जाते हैं, उन्हें भी संबंधित कंपनियों द्वारा जारी सुरक्षा अपडेट पर नजर रखने की सलाह दी गई है। फिलहाल Google का कहना है कि सुरक्षा पैच जारी कर दिया गया है और उपयोगकर्ताओं को अपडेट प्रक्रिया पूरी करने में देरी नहीं करनी चाहिए। सक्रिय रूप से इस्तेमाल की जा रही कमजोरियों के मामलों में समय पर अपडेट ही सबसे प्रभावी सुरक्षा उपाय माना जाता है।
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