फ्रांस के पेरिस के पास एक मानसिक स्वास्थ्य अस्पताल ने मरीजों की मदद के लिए "डॉन्की थेरेपी" शुरू की है। इस कार्यक्रम में मरीज गधों के साथ समय बिताते हैं, उन्हें खाना खिलाते हैं और उनके साथ जुड़ाव बनाते हैं। डॉक्टरों का कहना है कि गधों का शांत स्वभाव चिंता, अवसाद और PTSD जैसे मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे कुछ मरीजों को बेहतर महसूस कराने में मदद कर रहा है। यह पहल दिखाती है कि दवाओं और काउंसलिंग के साथ-साथ जानवरों और प्रकृति की मदद से भी मानसिक स्वास्थ्य देखभाल के नए रास्ते खोजे जा सकते हैं।
फ्रांस की राजधानी पेरिस के पास एक मानसिक स्वास्थ्य अस्पताल इन दिनों अपने अलग तरह के इलाज के कारण चर्चा में है। यहां मरीजों की मदद के लिए डॉक्टर केवल दवाओं और काउंसलिंग पर निर्भर नहीं हैं, बल्कि गधों की मदद भी ले रहे हैं। इस अनोखे कार्यक्रम को "डॉन्की थेरेपी" कहा जा रहा है। अस्पताल का दावा है कि इससे कई मरीजों को मानसिक रूप से बेहतर महसूस करने में मदद मिली है।
मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं आज दुनिया भर में तेजी से बढ़ रही हैं। तनाव, चिंता, अवसाद और PTSD जैसी समस्याओं से लाखों लोग जूझ रहे हैं। कई मरीज दवाओं और सामान्य थेरेपी से लाभ पाते हैं, लेकिन कुछ लोगों पर इन तरीकों का असर सीमित रहता है। ऐसे मरीजों के लिए नए विकल्प तलाशने की कोशिश लगातार की जा रही है। इसी सोच के साथ फ्रांस के इस अस्पताल ने गधों की मदद से थेरेपी शुरू की। एसोसिएटेड प्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, इस कार्यक्रम में मरीजों को गधों के साथ समय बिताने का अवसर दिया जाता है। वे उन्हें खाना खिला सकते हैं, उनके साथ टहल सकते हैं, उन्हें सहला सकते हैं और धीरे-धीरे उनके करीब आ सकते हैं। यह पूरी प्रक्रिया बहुत शांत माहौल में होती है ताकि मरीज बिना किसी दबाव के खुद को सहज महसूस कर सकें।
डॉक्टरों का कहना है कि कई बार मरीज अपनी भावनाओं को खुलकर व्यक्त नहीं कर पाते। वे लोगों के सामने बात करने से घबराते हैं या अपने अनुभव साझा करने में असहज महसूस करते हैं। लेकिन जब वे किसी जानवर के साथ समय बिताते हैं, तो धीरे-धीरे उनका तनाव कम होने लगता है। गधे की मौजूदगी उन्हें सुरक्षित और शांत महसूस करा सकती है।
गधों को आमतौर पर मेहनती और शांत स्वभाव वाला जानवर माना जाता है। वे तेज आवाज या अचानक हरकतों से बचते हैं और धीरे-धीरे प्रतिक्रिया देते हैं। यही वजह है कि कई मरीज उनके साथ समय बिताते हुए आराम महसूस करते हैं। डॉक्टरों का मानना है कि यह शांत व्यवहार मानसिक रूप से परेशान लोगों के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है।
इस कार्यक्रम में शामिल कुछ मरीज शुरुआत में गधों से दूरी बनाकर रखते हैं। कई लोग सिर्फ उन्हें देखते हैं और उनके आसपास बैठते हैं। समय के साथ वे उनके करीब जाने लगते हैं। फिर उन्हें छूते हैं, खाना खिलाते हैं और उनके साथ अधिक समय बिताते हैं। अस्पताल के विशेषज्ञों का कहना है कि यह प्रक्रिया भरोसा बनाने में मदद करती है।
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मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, भरोसा किसी भी थेरेपी का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। जब कोई व्यक्ति किसी जानवर के साथ जुड़ाव महसूस करता है, तो उसके भीतर सकारात्मक भावनाएं विकसित हो सकती हैं। इससे अकेलेपन की भावना कम हो सकती है और आत्मविश्वास बढ़ सकता है।
Continue Reading4 जून 2026
यह पहली बार नहीं है जब जानवरों को इलाज का हिस्सा बनाया गया हो। दुनिया के कई देशों में कुत्तों, घोड़ों और बिल्लियों के साथ भी ऐसी थेरेपी की जाती है। अस्पतालों, पुनर्वास केंद्रों और मानसिक स्वास्थ्य संस्थानों में जानवरों की मदद से लोगों को भावनात्मक समर्थन देने की कोशिश की जाती रही है।
लेकिन गधों को लेकर ऐसी पहल कम देखने को मिलती है। आम तौर पर लोग उन्हें खेतों में काम करने वाले या सामान ढोने वाले जानवर के रूप में देखते हैं। इसलिए पेरिस के पास शुरू हुआ यह कार्यक्रम लोगों का ध्यान खींच रहा है। यह दिखाता है कि एक साधारण समझे जाने वाले जानवर की भूमिका भी मानसिक स्वास्थ्य सुधारने में महत्वपूर्ण हो सकती है।
विशेषज्ञ बताते हैं कि जानवर किसी इंसान को जज नहीं करते। वे यह नहीं देखते कि सामने वाला व्यक्ति कैसा दिखता है, क्या बोलता है या उसका अतीत क्या रहा है। यही बात कई मरीजों को उनके करीब आने में मदद करती है। वे बिना डर और झिझक के उनके साथ समय बिता पाते हैं।
आज की तेज रफ्तार जिंदगी में मानसिक तनाव एक बड़ी समस्या बन चुका है। काम का दबाव, आर्थिक चुनौतियां, सामाजिक अपेक्षाएं और अकेलापन लोगों के मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर रहे हैं। कई बार लोग अपनी परेशानियों के बारे में खुलकर बात भी नहीं कर पाते। ऐसे में अलग-अलग तरह की थेरेपी लोगों के लिए मददगार साबित हो सकती हैं।
डॉन्की थेरेपी का मकसद दवाओं की जगह लेना नहीं है। डॉक्टर इसे एक अतिरिक्त सहायता के रूप में देखते हैं। यह उन तरीकों में से एक है जो मरीजों को बेहतर महसूस कराने में मदद कर सकता है। अस्पताल का कहना है कि दवा, काउंसलिंग और अन्य उपचारों के साथ इसका उपयोग किया जा रहा है।
इस कार्यक्रम के दौरान मरीजों को प्रकृति के करीब रहने का भी मौका मिलता है। वे खुले वातावरण में समय बिताते हैं और रोजमर्रा के तनाव से कुछ देर के लिए दूर हो जाते हैं। कई मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ मानते हैं कि प्रकृति के साथ समय बिताना मानसिक शांति पाने में मदद कर सकता है।
Continue Reading4 जून 2026
फ्रांस में चल रहे इस प्रयोग ने दुनिया भर के स्वास्थ्य विशेषज्ञों का ध्यान आकर्षित किया है। कई लोग यह जानना चाहते हैं कि ऐसे कार्यक्रमों का लंबे समय में क्या असर पड़ता है और क्या इन्हें बड़े स्तर पर अपनाया जा सकता है। फिलहाल अस्पताल इसके परिणामों पर नजर रख रहा है।
मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में पिछले कुछ वर्षों में कई नए प्रयोग हुए हैं। कहीं संगीत का इस्तेमाल किया जा रहा है, कहीं कला और पेंटिंग को थेरेपी का हिस्सा बनाया जा रहा है। कुछ जगहों पर बागवानी और प्रकृति से जुड़ी गतिविधियों को भी मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रमों में शामिल किया गया है। डॉन्की थेरेपी भी इसी तरह की एक पहल है।
इस खबर का एक बड़ा संदेश यह भी है कि मानसिक स्वास्थ्य का इलाज केवल अस्पताल के कमरे तक सीमित नहीं है। कई बार इंसानों, जानवरों और प्रकृति के बीच का संबंध भी किसी व्यक्ति की भावनात्मक स्थिति को बेहतर बनाने में भूमिका निभा सकता है।
हालांकि विशेषज्ञ यह भी कहते हैं कि हर मरीज की जरूरत अलग होती है। जो तरीका एक व्यक्ति के लिए फायदेमंद हो सकता है, जरूरी नहीं कि वही दूसरे व्यक्ति पर भी समान असर दिखाए। इसलिए किसी भी थेरेपी को डॉक्टरों और प्रशिक्षित विशेषज्ञों की देखरेख में ही अपनाया जाना चाहिए।
फिलहाल पेरिस के पास चल रहा यह कार्यक्रम छोटे स्तर पर जारी है। शुरुआती अनुभवों ने इसे चर्चा में ला दिया है। यदि आने वाले समय में इसके परिणाम सकारात्मक बने रहते हैं, तो संभव है कि अन्य अस्पताल और मानसिक स्वास्थ्य केंद्र भी ऐसे मॉडल पर विचार करें।
Continue Reading3 जून 2026
एक ऐसे दौर में जब मानसिक स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता बढ़ रही है, गधों के साथ की जा रही यह थेरेपी लोगों को यह याद दिलाती है कि मदद और राहत कभी-कभी सबसे साधारण दिखने वाली चीजों से भी मिल सकती है। यही वजह है कि फ्रांस का यह अनोखा प्रयोग दुनिया भर में चर्चा का विषय बना हुआ है।
इस खबर का एक बड़ा संदेश यह भी है कि मानसिक स्वास्थ्य का इलाज केवल अस्पताल के कमरे तक सीमित नहीं है। कई बार इंसानों, जानवरों और प्रकृति के बीच का संबंध भी किसी व्यक्ति की भावनात्मक स्थिति को बेहतर बनाने में भूमिका निभा सकता है।
हालांकि विशेषज्ञ यह भी कहते हैं कि हर मरीज की जरूरत अलग होती है। जो तरीका एक व्यक्ति के लिए फायदेमंद हो सकता है, जरूरी नहीं कि वही दूसरे व्यक्ति पर भी समान असर दिखाए। इसलिए किसी भी थेरेपी को डॉक्टरों और प्रशिक्षित विशेषज्ञों की देखरेख में ही अपनाया जाना चाहिए।
फिलहाल पेरिस के पास चल रहा यह कार्यक्रम छोटे स्तर पर जारी है। शुरुआती अनुभवों ने इसे चर्चा में ला दिया है। यदि आने वाले समय में इसके परिणाम सकारात्मक बने रहते हैं, तो संभव है कि अन्य अस्पताल और मानसिक स्वास्थ्य केंद्र भी ऐसे मॉडल पर विचार करें।
एक ऐसे दौर में जब मानसिक स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता बढ़ रही है, गधों के साथ की जा रही यह थेरेपी लोगों को यह याद दिलाती है कि मदद और राहत कभी-कभी सबसे साधारण दिखने वाली चीजों से भी मिल सकती है। यही वजह है कि फ्रांस का यह अनोखा प्रयोग दुनिया भर में चर्चा का विषय बना हुआ है।
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Images are for illustrative purposes only and some editing of images done by using AI.
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4 जून 2026