Norway Chess के छठे राउंड में भारतीय खिलाड़ियों के लिए दिन निराशाजनक रहा। डी. गुकेश, आर. प्रज्ञानानंदा और दिव्या देशमुख अपने-अपने क्लासिकल मुकाबले हार गए, जबकि मैग्नस कार्लसन ने जीत के साथ वापसी की।
नॉर्वे में खेले जा रहे प्रतिष्ठित Norway Chess टूर्नामेंट के छठे राउंड में भारतीय खिलाड़ियों का प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा। भारत के तीन प्रमुख युवा सितारे डी. गुकेश, आर. प्रज्ञानानंदा और दिव्या देशमुख अपने-अपने क्लासिकल मुकाबलों में हार का सामना करने को मजबूर हुए। इस राउंड के नतीजों ने भारतीय चुनौती को झटका दिया है, क्योंकि तीनों खिलाड़ी टूर्नामेंट में मजबूत प्रदर्शन की उम्मीदों के साथ उतरे थे।
ओपन वर्ग में विश्व शतरंज के उभरते सितारों में शामिल डी. गुकेश को जर्मनी के ग्रैंडमास्टर विन्सेंट कीमर ने हराया। मुकाबले के दौरान कीमर ने लगातार दबाव बनाए रखा और महत्वपूर्ण मौकों पर बेहतर चालें चलते हुए बढ़त हासिल की। गुकेश वापसी की कोशिश करते रहे, लेकिन अंततः उन्हें हार स्वीकार करनी पड़ी।
दूसरे भारतीय खिलाड़ी आर. प्रज्ञानानंदा को अमेरिकी ग्रैंडमास्टर वेस्ली सो के खिलाफ हार का सामना करना पड़ा। मुकाबला लंबे समय तक संतुलित दिखाई दिया, लेकिन एंडगेम में वेस्ली सो ने अधिक सटीक खेल दिखाया। धीरे-धीरे उन्होंने स्थिति को अपने पक्ष में मोड़ लिया और महत्वपूर्ण अंक हासिल किए। प्रज्ञानानंदा के लिए यह हार इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि वह टूर्नामेंट में शीर्ष खिलाड़ियों के बीच लगातार प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं।
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महिला वर्ग में भारत की युवा खिलाड़ी दिव्या देशमुख का सामना मौजूदा महिला विश्व चैंपियन जू वेनजुन से था। अनुभव और नियंत्रण का फायदा उठाते हुए जू वेनजुन ने मुकाबले पर पकड़ बनाए रखी और अंत में जीत दर्ज की। दिव्या ने कई मौकों पर संघर्ष दिखाया, लेकिन विश्व चैंपियन के सामने उन्हें सफलता नहीं मिल सकी।
छठे राउंड का एक और प्रमुख परिणाम मैग्नस कार्लसन की जीत रही। नॉर्वे के स्टार खिलाड़ी ने अलीरेज़ा फिरोज़ा को हराकर टूर्नामेंट में मजबूत वापसी का संकेत दिया। शुरुआती दौर में अपेक्षित लय नहीं पकड़ पाने वाले कार्लसन के लिए यह जीत महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इस परिणाम से उनकी स्थिति अंक तालिका में और मजबूत हुई है।
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भारतीय अनुभवी ग्रैंडमास्टर कोनेरू हम्पी भी दिन का अंत जीत के साथ नहीं कर सकीं। उनका मुकाबला आर्मागेडन टाईब्रेक तक पहुंचा, लेकिन निर्णायक चरण में उन्हें हार का सामना करना पड़ा। इससे महिला वर्ग में भारत की चुनौती को अतिरिक्त नुकसान हुआ।
Norway Chess दुनिया के सबसे मजबूत शतरंज टूर्नामेंटों में गिना जाता है, जहां खिलाड़ियों को लगभग हर राउंड में विश्व स्तरीय प्रतिद्वंद्वियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे टूर्नामेंट में छोटी गलतियां भी परिणाम बदल सकती हैं। यही वजह है कि लगातार अच्छा प्रदर्शन बनाए रखना किसी भी खिलाड़ी के लिए चुनौतीपूर्ण माना जाता है।
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भारतीय शतरंज के लिए पिछले कुछ वर्षों में गुकेश और प्रज्ञानानंदा बड़ी उम्मीदों के रूप में उभरे हैं। दोनों खिलाड़ियों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई शीर्ष ग्रैंडमास्टर्स को हराकर अपनी पहचान बनाई है। दूसरी ओर, दिव्या देशमुख भी महिला शतरंज में तेजी से आगे बढ़ती प्रतिभाओं में शामिल हैं। ऐसे में एक कठिन राउंड निश्चित रूप से निराशाजनक रहा, लेकिन टूर्नामेंट अभी जारी है और खिलाड़ियों के पास आगामी मुकाबलों में वापसी का अवसर मौजूद है।
अब सभी की नजरें अगले राउंड पर होंगी, जहां भारतीय खिलाड़ी बेहतर प्रदर्शन के साथ अंक तालिका में अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश करेंगे। Norway Chess जैसे उच्च स्तरीय टूर्नामेंट में हर मुकाबला नई चुनौती लेकर आता है और यही इसकी सबसे बड़ी विशेषता भी है।
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3 जून 2026