दिल्ली के साकेत इलाके में पांच मंजिला इमारत गिरने से जान गंवाने वालों की संख्या छह पहुंच गई है। हादसे के बाद एमसीडी ने दो इंजीनियरों को निलंबित करते हुए मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए हैं।
दिल्ली के साकेत क्षेत्र में पांच मंजिला इमारत ढहने की घटना में मृतकों की संख्या बढ़कर छह हो गई है। हादसे के बाद राहत और बचाव कार्य लगातार चलाया गया, जिसके दौरान मलबे में फंसे लोगों को निकालने के लिए कई एजेंसियों की टीमें मौके पर जुटीं। इस घटना ने राजधानी में इमारतों की सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी तंत्र को लेकर नए सिरे से चिंता बढ़ा दी है।
जानकारी के अनुसार, इमारत अचानक भरभराकर गिर गई, जिससे आसपास के इलाके में अफरा-तफरी मच गई। मलबे के नीचे कई लोगों के दबे होने की आशंका के बीच राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ), दमकल विभाग और दिल्ली पुलिस की टीमों ने संयुक्त अभियान चलाया। कई घंटों तक चले रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद प्रभावित लोगों को बाहर निकाला गया।
हादसे के बाद नगर निगम (एमसीडी) ने प्रारंभिक स्तर पर प्रशासनिक कार्रवाई करते हुए दो इंजीनियरों को निलंबित कर दिया है। साथ ही पूरे मामले की जांच के लिए मजिस्ट्रियल जांच के आदेश जारी किए गए हैं। जांच में यह पता लगाया जाएगा कि इमारत का निर्माण स्वीकृत मानकों के अनुरूप था या नहीं और कहीं निर्माण या निगरानी में कोई लापरवाही तो नहीं हुई।
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अधिकारियों की जांच का एक महत्वपूर्ण हिस्सा यह भी होगा कि भवन के रखरखाव और संरचनात्मक स्थिति को लेकर पहले कोई संकेत या शिकायत सामने आई थी या नहीं। यदि ऐसी कोई जानकारी उपलब्ध थी, तो उस पर क्या कार्रवाई की गई और संबंधित विभागों ने अपनी जिम्मेदारी किस तरह निभाई।
दिल्ली जैसे बड़े शहरों में भवन सुरक्षा का मुद्दा समय-समय पर सामने आता रहा है। घनी आबादी वाले इलाकों में कई पुरानी इमारतें मौजूद हैं, जिनकी संरचनात्मक मजबूती को लेकर नियमित जांच की आवश्यकता बताई जाती रही है। ऐसे मामलों में निर्माण मानकों का पालन और समय-समय पर निरीक्षण महत्वपूर्ण माना जाता है।
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साकेत की घटना के बाद एक बार फिर यह सवाल उठने लगे हैं कि भवन निर्माण नियमों के अनुपालन की निगरानी कितनी प्रभावी है। शहरी क्षेत्रों में अवैध निर्माण, स्वीकृति से अधिक मंजिलों का निर्माण या रखरखाव में लापरवाही जैसी समस्याएं पहले भी विभिन्न हादसों के बाद चर्चा में रही हैं। हालांकि, इस मामले में किसी भी कारण की आधिकारिक पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
मजिस्ट्रियल जांच की रिपोर्ट आने के बाद यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि हादसे के पीछे कौन से कारण जिम्मेदार थे और क्या किसी स्तर पर नियमों का उल्लंघन हुआ था। प्रशासन ने संकेत दिया है कि जांच के निष्कर्षों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
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फिलहाल प्रभावित क्षेत्र में स्थिति पर नजर रखी जा रही है और संबंधित एजेंसियां घटना से जुड़े सभी पहलुओं की जांच में जुटी हुई हैं। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद विस्तृत रिपोर्ट सार्वजनिक की जाएगी, जिससे हादसे की वास्तविक वजह सामने आ सके।
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2 जून 2026