यूरोपीय संघ का AI Act अब अपने सबसे अहम चरण में प्रवेश कर रहा है। 2 अगस्त 2026 से हाई-रिस्क AI सिस्टम, पारदर्शिता संबंधी नियम और कई अनुपालन आवश्यकताएं लागू होंगी, जिनका असर यूरोप में सेवाएं देने वाली वैश्विक AI कंपनियों पर भी पड़ेगा।
यूरोपीय संघ का बहुचर्चित AI Act अब उस चरण में पहुंच रहा है जहां इसके अधिकांश प्रमुख प्रावधान व्यावहारिक रूप से लागू होने लगेंगे। अगस्त 2024 में कानून प्रभावी होने के बाद इसे चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा रहा था, लेकिन 2 अगस्त 2026 को इसकी सबसे महत्वपूर्ण समयसीमाओं में से एक माना जा रहा है। इस तारीख से हाई-रिस्क AI सिस्टम से जुड़े नियम, पारदर्शिता संबंधी प्रावधान और इनोवेशन सैंडबॉक्स जैसी व्यवस्थाएं व्यापक रूप से लागू हो जाएंगी।
AI Act को दुनिया के सबसे व्यापक AI नियामक ढांचे में गिना जा रहा है। इसका उद्देश्य कृत्रिम बुद्धिमत्ता के विकास को पूरी तरह रोकना नहीं, बल्कि उसके उपयोग को सुरक्षित, जवाबदेह और पारदर्शी बनाना है। यूरोपीय संघ का मानना है कि AI तकनीक के तेजी से बढ़ते उपयोग के बीच नागरिकों के अधिकारों और सार्वजनिक सुरक्षा की रक्षा के लिए स्पष्ट नियम जरूरी हैं।
इस कानून की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता इसका जोखिम-आधारित ढांचा है। AI सिस्टम को चार अलग-अलग श्रेणियों में बांटा गया है। न्यूनतम जोखिम वाले सिस्टम में साधारण उपयोग के चैटबॉट और सामान्य डिजिटल टूल शामिल हो सकते हैं। सीमित जोखिम श्रेणी में कई जनरल-पर्पज़ AI मॉडल और बड़े भाषा मॉडल आते हैं, जिनका उपयोग विभिन्न प्रकार के कार्यों के लिए किया जाता है।
Continue Reading3 जून 2026
इसके अलावा हाई-रिस्क श्रेणी में वे AI सिस्टम रखे गए हैं जिनका असर लोगों के अधिकारों, अवसरों या सुरक्षा पर पड़ सकता है। उदाहरण के तौर पर भर्ती प्रक्रियाओं में इस्तेमाल होने वाले AI टूल, क्रेडिट स्कोरिंग सिस्टम या महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे से जुड़े स्वचालित निर्णय लेने वाले सिस्टम इस श्रेणी में आ सकते हैं। इन प्रणालियों के लिए सख्त परीक्षण, निगरानी और दस्तावेजीकरण आवश्यक होगा।
कानून की सबसे कड़ी श्रेणी “अनएक्सेप्टेबल रिस्क” है। इस श्रेणी में आने वाले AI उपयोगों पर सीधे प्रतिबंध लगाया गया है। यूरोपीय संघ ने गैर-सहमति से तैयार किए गए न्यूड या अंतरंग डिजिटल कंटेंट और तथाकथित AI nudification एप्लिकेशन पर रोक लगाने का प्रावधान किया है। ऐसे सिस्टम भी प्रतिबंधित किए गए हैं जो लोगों की सुरक्षा या बुनियादी अधिकारों को गंभीर नुकसान पहुंचा सकते हैं।
2 अगस्त 2026 से लागू होने वाले पारदर्शिता नियमों का असर विशेष रूप से जनरेटिव AI सेवाओं पर दिखाई देगा। इन नियमों के तहत AI से तैयार किए गए कंटेंट को पहचानने योग्य बनाना जरूरी होगा। कई मामलों में उपयोगकर्ताओं को स्पष्ट रूप से बताया जाना होगा कि कोई सामग्री इंसान द्वारा नहीं बल्कि AI की मदद से तैयार की गई है। डीपफेक वीडियो और सार्वजनिक सूचना से जुड़े कंटेंट पर यह आवश्यकता और अधिक महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
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जनरल-पर्पज़ AI मॉडल विकसित करने वाली कंपनियों को भी नई जिम्मेदारियों का सामना करना पड़ेगा। उन्हें तकनीकी दस्तावेज तैयार रखने होंगे, संभावित जोखिमों का आकलन करना होगा, सिस्टम की निगरानी करनी होगी और यह सुनिश्चित करना होगा कि आवश्यक मानव निगरानी की व्यवस्था मौजूद रहे। इसका उद्देश्य यह है कि AI सिस्टम के कारण उत्पन्न होने वाले जोखिमों को समय रहते पहचाना और नियंत्रित किया जा सके।
AI Act की समयरेखा पहले से चरणों में तय की गई थी। फरवरी 2025 से कुछ सामान्य प्रावधान और प्रतिबंध लागू हुए थे। इसके बाद अगस्त 2025 से जनरल-पर्पज़ AI मॉडल प्रदाताओं के लिए विशेष नियम लागू होने शुरू हुए। अब अगस्त 2026 से हाई-रिस्क सिस्टम और पारदर्शिता संबंधी प्रमुख प्रावधान लागू होने जा रहे हैं। कुछ नीति चर्चाओं में हाई-रिस्क नियमों की समयसीमा आगे बढ़ाने के प्रस्तावों का उल्लेख हुआ है, लेकिन आधिकारिक ढांचा अभी भी 2026-27 की समयरेखा पर आधारित है।
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इस कानून का प्रभाव केवल यूरोपीय संघ तक सीमित नहीं रहेगा। भारत समेत उन सभी देशों की कंपनियों पर इसका असर पड़ सकता है जो यूरोपीय बाजार में AI आधारित उत्पाद या सेवाएं उपलब्ध कराती हैं। यदि कोई कंपनी यूरोपीय संघ के उपयोगकर्ताओं को लक्षित करती है, तो उसे अपने AI उत्पाद, दस्तावेजीकरण, जोखिम प्रबंधन प्रक्रियाओं और यूजर इंटरफेस को नए नियमों के अनुरूप बनाना पड़ सकता है।
विशेषज्ञों और नीति निर्माताओं के बीच यह धारणा है कि सख्त नियमन से AI सेवाओं में भरोसा और जवाबदेही बढ़ सकती है। दूसरी ओर, छोटे स्टार्टअप और उभरती कंपनियां अनुपालन लागत, कानूनी प्रक्रियाओं और तकनीकी दस्तावेजीकरण की अतिरिक्त जरूरतों का सामना कर सकती हैं। इसी वजह से AI Act को तकनीकी नवाचार और नियामक नियंत्रण के बीच संतुलन बनाने की एक महत्वपूर्ण कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
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3 जून 2026