अफ्रीका के डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (DRC) और युगांडा में फैल रहे Bundibugyo Ebola वायरस के प्रकोप को WHO ने अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य आपातकाल (PHEIC) घोषित किया है। अब तक दोनों देशों में 134 पुष्ट मामले और 18 मौतें दर्ज की गई हैं। इस स्ट्रेन के लिए फिलहाल कोई स्वीकृत वैक्सीन या विशेष इलाज उपलब्ध नहीं है, इसलिए आइसोलेशन और कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग जैसे उपाय सबसे अहम माने जा रहे हैं। भारत ने प्रभावित देशों की गैर-जरूरी यात्रा से बचने की सलाह दी है और एयरपोर्ट्स पर निगरानी बढ़ा दी है। हालांकि देश में अभी तक Bundibugyo Ebola का कोई मामला सामने नहीं आया है।
अफ्रीका एक बार फिर इबोला वायरस के खतरे का सामना कर रहा है। इस बार चिंता का कारण Bundibugyo Ebola strain है, जिसके बढ़ते मामलों को देखते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इसे “Public Health Emergency of International Concern (PHEIC)” यानी अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य आपातकाल घोषित कर दिया है। यह घोषणा ऐसे समय में हुई है जब डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (DRC) और युगांडा में संक्रमण के मामलों में लगातार वृद्धि दर्ज की जा रही है।
WHO और यूरोपीय सेंटर फॉर डिजीज प्रिवेंशन एंड कंट्रोल (ECDC) के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार 27 मई तक केवल DRC में 906 संदिग्ध मामले दर्ज किए गए हैं, जिनमें से 125 मामलों की प्रयोगशाला जांच के जरिए पुष्टि हुई है। संदिग्ध मामलों में 223 लोगों की मौत दर्ज की गई है, जबकि पुष्टि किए गए मामलों में 17 लोगों की जान जा चुकी है। DRC और युगांडा को मिलाकर अब तक 134 पुष्ट संक्रमण और 18 मौतों की जानकारी सामने आई है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यह स्थिति इसलिए अधिक गंभीर मानी जा रही है क्योंकि Bundibugyo strain के लिए अभी तक कोई लाइसेंस प्राप्त वैक्सीन उपलब्ध नहीं है। इसके अलावा इस वायरस के लिए कोई विशेष एंटीवायरल इलाज भी मौजूद नहीं है। ऐसे में संक्रमण रोकने के लिए पारंपरिक सार्वजनिक स्वास्थ्य उपायों पर ही सबसे ज्यादा निर्भर रहना पड़ रहा है।
इबोला वायरस पहली बार 1976 में पहचाना गया था और तब से इसके कई अलग-अलग स्ट्रेन सामने आ चुके हैं। Bundibugyo ebolavirus उन प्रमुख स्ट्रेनों में से एक है जो पहले भी अफ्रीकी देशों में सीमित स्तर पर प्रकोप का कारण बन चुका है। हालांकि वर्तमान प्रकोप का आकार और इसके अंतरराष्ट्रीय प्रभाव को देखते हुए WHO ने इसे गंभीर खतरे के रूप में वर्गीकृत किया है।
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3 जून 2026
विशेषज्ञ बताते हैं कि इबोला वायरस मुख्य रूप से संक्रमित व्यक्ति के खून, शरीर के तरल पदार्थ या संक्रमित वस्तुओं के संपर्क से फैलता है। बीमारी की शुरुआत आमतौर पर बुखार, कमजोरी, सिरदर्द और मांसपेशियों में दर्द जैसे लक्षणों से होती है। बाद में उल्टी, दस्त और गंभीर मामलों में आंतरिक एवं बाहरी रक्तस्राव भी हो सकता है। यूरोपीय CDC के अनुसार Bundibugyo strain का ऐतिहासिक केस फेटेलिटी रेट यानी मृत्यु दर लगभग 30 से 50 प्रतिशत के बीच रहा है। हालांकि वर्तमान प्रकोप में पुष्टि किए गए मामलों के आधार पर मृत्यु दर अभी अपेक्षाकृत कम दिखाई दे रही है। इसके बावजूद विशेषज्ञ इसे हल्के में लेने के पक्ष में नहीं हैं क्योंकि संक्रमण का फैलाव अभी भी जारी है।
WHO का कहना है कि इस प्रकोप को नियंत्रित करने के लिए संक्रमित मरीजों को तुरंत अलग रखना, उनके संपर्क में आए लोगों की पहचान करना और सुरक्षित अंतिम संस्कार प्रक्रियाओं का पालन करना बेहद जरूरी है। पिछले इबोला प्रकोपों के अनुभव बताते हैं कि समय पर कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग और सामुदायिक जागरूकता से संक्रमण की श्रृंखला को तोड़ा जा सकता है। युगांडा और DRC के कई हिस्सों में स्वास्थ्यकर्मी लगातार निगरानी अभियान चला रहे हैं। प्रभावित क्षेत्रों में अस्थायी उपचार केंद्र स्थापित किए गए हैं और हजारों लोगों की स्वास्थ्य जांच की जा रही है। स्थानीय प्रशासन और अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य एजेंसियां मिलकर संक्रमण को सीमित करने की कोशिश कर रही हैं।
भारत ने भी WHO की चेतावनी के बाद एहतियाती कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल देश में Bundibugyo Ebola का कोई मामला सामने नहीं आया है, लेकिन प्रभावित देशों की यात्रा को लेकर सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
Continue Reading3 जून 2026
सरकार ने लोगों से कहा है कि वे फिलहाल DRC, युगांडा और दक्षिण सूडान की गैर-जरूरी यात्रा से बचें। यदि किसी कारणवश यात्रा करनी पड़े तो स्वास्थ्य संबंधी सभी दिशा-निर्देशों का पालन किया जाए और संक्रमण के जोखिम वाले क्षेत्रों से दूरी बनाई जाए। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार विदेश से लौटने वाले यात्रियों को विशेष सतर्कता बरतनी चाहिए। यदि यात्रा के 21 दिनों के भीतर बुखार, अत्यधिक थकान, उल्टी, दस्त या रक्तस्राव जैसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेनी चाहिए और डॉक्टर को अपनी यात्रा का पूरा विवरण देना चाहिए।
भारत के प्रमुख अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों और पोर्ट हेल्थ यूनिट्स को भी अलर्ट पर रखा गया है। यात्रियों की निगरानी और स्वास्थ्य जांच की व्यवस्था को मजबूत करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि किसी भी संभावित जोखिम की समय रहते पहचान की जा सके। WHO और पैन अमेरिकन हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (PAHO) की गाइडलाइंस के अनुसार आम यात्रियों के लिए संक्रमण का खतरा अपेक्षाकृत कम माना गया है। लेकिन यह तभी संभव है जब वे संक्रमित लोगों या जानवरों के संपर्क से बचें और जोखिम वाले क्षेत्रों में सावधानी बरतें। विशेषज्ञों ने चमगादड़ों की कॉलोनियों वाली गुफाओं, अनौपचारिक खनन क्षेत्रों और जंगली जानवरों के मांस यानी बुशमीट के सेवन से बचने की सलाह दी है। माना जाता है कि इबोला जैसे वायरस कई बार जानवरों से इंसानों में फैलते हैं और बाद में मानव-से-मानव संक्रमण का रूप ले लेते हैं।
सबसे ज्यादा खतरा स्वास्थ्यकर्मियों और उन लोगों को माना जाता है जो संक्रमित मरीजों की देखभाल या अंतिम संस्कार की प्रक्रिया में शामिल होते हैं। यदि उचित व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण (PPE) का उपयोग नहीं किया जाए तो संक्रमण का जोखिम कई गुना बढ़ सकता है। हालांकि पिछले एक दशक में अफ्रीकी देशों की स्वास्थ्य प्रणालियों ने इबोला प्रबंधन में काफी अनुभव हासिल किया है। पश्चिम अफ्रीका और मध्य अफ्रीका में आए पिछले प्रकोपों ने स्वास्थ्य एजेंसियों को बेहतर तैयारी और प्रतिक्रिया प्रणाली विकसित करने का अवसर दिया है। महामारी विशेषज्ञों का मानना है कि कोविड-19 के बाद दुनिया ने यह सीखा है कि किसी भी संक्रामक बीमारी को केवल स्थानीय समस्या मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। वैश्विक यात्रा, व्यापार और प्रवासन के दौर में कोई भी संक्रमण कुछ ही दिनों में अंतरराष्ट्रीय चिंता का विषय बन सकता है।
Continue Reading2 जून 2026
इसी कारण WHO ने इस प्रकोप को केवल अफ्रीकी देशों तक सीमित मामला न मानते हुए अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य आपातकाल की श्रेणी में रखा है। इसका उद्देश्य वैश्विक सहयोग बढ़ाना और संसाधनों को तेजी से प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचाना है। विशेषज्ञों का कहना है कि वर्तमान समय में घबराने की नहीं, बल्कि सतर्क रहने की आवश्यकता है। भारत सहित अधिकांश देशों में स्वास्थ्य निगरानी तंत्र सक्रिय है और संक्रमण की पहचान के लिए पर्याप्त व्यवस्था मौजूद है। फिर भी यह घटना याद दिलाती है कि दुनिया अभी भी नई और पुरानी संक्रामक बीमारियों के खतरे से पूरी तरह मुक्त नहीं हुई है। वैज्ञानिक अनुसंधान, पारदर्शी डेटा साझा करना और समय पर सार्वजनिक स्वास्थ्य हस्तक्षेप ही ऐसे प्रकोपों को नियंत्रित करने का सबसे प्रभावी तरीका माना जाता है।
फिलहाल दुनिया की निगाहें DRC और युगांडा में चल रहे प्रयासों पर टिकी हैं। स्वास्थ्य एजेंसियां उम्मीद कर रही हैं कि तेज निगरानी, आइसोलेशन और सामुदायिक सहयोग की मदद से इस प्रकोप को व्यापक महामारी बनने से रोका जा सकेगा। आने वाले सप्ताह यह तय करेंगे कि Bundibugyo Ebola का यह प्रकोप कितनी तेजी से नियंत्रित किया जा सकता है और वैश्विक स्वास्थ्य व्यवस्था इस चुनौती का सामना किस तरह करती है।
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3 जून 2026