Digi Yatra के फेस-आधारित बोर्डिंग सिस्टम के जरिए 10 करोड़ से अधिक यात्राएं पूरी हो चुकी हैं। नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने इसे भारतीय विमानन क्षेत्र में डिजिटल बदलाव की बड़ी उपलब्धि बताया है।
देश के विमानन क्षेत्र में डिजिटल तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल के बीच Digi Yatra ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। फेस रिकग्निशन आधारित इस यात्रा प्रणाली के जरिए 10 करोड़ से अधिक यात्राएं पूरी हो चुकी हैं। नागरिक उड्डयन मंत्री ने इस उपलब्धि पर टीम को बधाई देते हुए इसे यात्रियों के लिए बेहतर, सुरक्षित और तेज यात्रा अनुभव की दिशा में बड़ा कदम बताया है।
Digi Yatra को एयरपोर्ट पर यात्रियों की आवाजाही को अधिक सुविधाजनक बनाने के उद्देश्य से विकसित किया गया है। इस प्रणाली के तहत यात्री अपने मोबाइल ऐप पर पहचान संबंधी जानकारी और यात्रा विवरण पंजीकृत करते हैं। इसके बाद एयरपोर्ट पर मौजूद ई-गेट्स चेहरे की पहचान के आधार पर यात्री की पुष्टि करते हैं और उन्हें विभिन्न जांच बिंदुओं से गुजरने की अनुमति देते हैं।
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इस तकनीक का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यात्रियों को बार-बार पहचान पत्र और बोर्डिंग पास दिखाने की आवश्यकता कम हो जाती है। फेस रिकग्निशन के जरिए सत्यापन होने से प्रवेश प्रक्रिया तेज होती है और एयरपोर्ट पर लगने वाली लंबी कतारों को कम करने में मदद मिलती है। इससे यात्रियों का समय बचता है और यात्रा अनुभव अधिक सहज बनता है।
विमानन क्षेत्र के अधिकारियों का कहना है कि Digi Yatra के उपयोग में लगातार वृद्धि हो रही है। देश के कई प्रमुख हवाई अड्डों पर यह सुविधा पहले से उपलब्ध है और बड़ी संख्या में यात्री इसका इस्तेमाल कर रहे हैं। तकनीक आधारित इस प्रणाली के कारण यात्रियों की आवाजाही अधिक व्यवस्थित हुई है और भीड़ प्रबंधन में भी सहायता मिली है।
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सरकार और विमानन क्षेत्र से जुड़े संस्थानों का मानना है कि डिजिटल समाधान भविष्य के एयरपोर्ट संचालन का महत्वपूर्ण हिस्सा बनने जा रहे हैं। Digi Yatra इसी दिशा में एक प्रमुख पहल मानी जा रही है, जहां पहचान सत्यापन की प्रक्रिया को आधुनिक तकनीक के माध्यम से सरल बनाया गया है। विशेषज्ञों के अनुसार फेस रिकग्निशन आधारित प्रणालियां न केवल यात्रियों की सुविधा बढ़ाती हैं, बल्कि संचालन दक्षता में भी सुधार करती हैं। एयरपोर्ट प्रबंधन को यात्रियों के प्रवाह की बेहतर निगरानी करने और विभिन्न जांच प्रक्रियाओं को तेज बनाने में मदद मिलती है।
हालांकि डिजिटल पहचान और डेटा सुरक्षा को लेकर समय-समय पर चर्चा होती रही है, लेकिन संबंधित एजेंसियों का कहना है कि यात्रियों की जानकारी की सुरक्षा और गोपनीयता सुनिश्चित करने के लिए निर्धारित मानकों का पालन किया जाता है। Digi Yatra का उपयोग पूरी तरह स्वैच्छिक है और यात्री चाहें तो पारंपरिक प्रक्रिया के जरिए भी यात्रा कर सकते हैं। 10 करोड़ यात्राओं का आंकड़ा पार करना इस बात का संकेत माना जा रहा है कि भारतीय यात्री अब डिजिटल और संपर्क रहित यात्रा सुविधाओं को तेजी से अपना रहे हैं। आने वाले समय में Digi Yatra के दायरे को और विस्तारित करने तथा अधिक हवाई अड्डों तक पहुंचाने की दिशा में भी काम जारी रहने की उम्मीद है।
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विमानन मंत्रालय का मानना है कि इस तरह की तकनीकी पहलें भारत के नागरिक उड्डयन क्षेत्र को अधिक आधुनिक, कुशल और यात्री-केंद्रित बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। Digi Yatra की यह उपलब्धि देश के डिजिटल परिवर्तन और स्मार्ट यात्रा व्यवस्था की दिशा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव के रूप में देखी जा रही है।
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3 जून 2026
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