सोशल मीडिया पर AI को लेकर “जॉब्स एपोकैलिप्स” वाले दावे फिर वायरल हैं, लेकिन OpenAI CEO Sam Altman के ताज़ा बयान तस्वीर को थोड़ा अलग दिखाते हैं। हालिया इंटरव्यूज़ और रिपोर्ट्स बताती हैं कि AI कुछ काम जरूर बदल रहा है, लेकिन अभी तक बड़े पैमाने पर नौकरी खत्म होने के ठोस संकेत नहीं मिले हैं।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को लेकर सोशल मीडिया पर फिर “जॉब्स एपोकैलिप्स” यानी बड़े पैमाने पर नौकरियां खत्म होने की चर्चाएं तेज हैं। कई पोस्ट और वीडियो में दावा किया जा रहा है कि AI आने वाले समय में लाखों लोगों की नौकरी ले लेगा। लेकिन OpenAI के CEO Sam Altman के हालिया बयान इस बहस को थोड़ा अलग दिशा देते हैं।
हाल के इंटरव्यू और सार्वजनिक बातचीत में Altman ने माना कि AI काम करने के तरीकों को तेजी से बदल रहा है। कुछ नौकरियों में बदलाव दिख रहा है और कई कंपनियां AI टूल्स का इस्तेमाल बढ़ा रही हैं। इसके बावजूद उन्होंने यह भी कहा कि अभी तक बड़े पैमाने पर रोजगार खत्म होने के साफ संकेत नहीं मिले हैं।
Altman के मुताबिक तकनीक का असर सबसे पहले उन कामों पर दिखता है जो दोहराव वाले हैं या जिन्हें सॉफ्टवेयर आसानी से संभाल सकता है। कंटेंट ड्राफ्टिंग, बेसिक डेटा प्रोसेसिंग और ग्राहक सहायता जैसे क्षेत्रों में AI टूल्स का इस्तेमाल बढ़ा है। कई कंपनियां अब कर्मचारियों की मदद के लिए AI आधारित सिस्टम अपना रही हैं ताकि काम तेज और कम लागत में हो सके।
उन्होंने यह भी कहा कि हर नई तकनीक की तरह AI भी कुछ भूमिकाओं को बदल सकता है, लेकिन इसके साथ नए तरह के काम और स्किल्स की मांग भी पैदा होती है। टेक इंडस्ट्री में पहले भी ऑटोमेशन और इंटरनेट को लेकर इसी तरह की चिंताएं उठती रही हैं। हालिया रिपोर्ट्स में भी यह तस्वीर पूरी तरह एक जैसी नहीं दिखती। कुछ कंपनियों ने AI की वजह से भर्ती की रणनीति बदली है, जबकि कई जगह AI को कर्मचारियों की जगह नहीं बल्कि सहायक टूल की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है। खासकर प्रोग्रामिंग, डिजाइन, रिसर्च और ऑफिस प्रोडक्टिविटी से जुड़े कामों में AI का उपयोग तेजी से बढ़ा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में सबसे ज्यादा असर स्किल्स पर पड़ सकता है। कंपनियां अब ऐसे कर्मचारियों को प्राथमिकता दे रही हैं जो AI टूल्स के साथ काम कर सकें। इसी वजह से कई देशों में AI ट्रेनिंग और डिजिटल स्किल्स पर जोर बढ़ा है। OpenAI समेत कई टेक कंपनियां यह भी कह चुकी हैं कि AI के इस्तेमाल को लेकर नियम और सुरक्षा ढांचा जरूरी होगा। सरकारें और नियामक एजेंसियां इस तकनीक के असर पर नजर बनाए हुए हैं, खासकर रोजगार, डेटा सुरक्षा और कॉपीराइट जैसे मुद्दों पर।
फिलहाल AI को लेकर डर और उत्साह दोनों साथ-साथ दिखाई दे रहे हैं। तकनीक तेजी से आगे बढ़ रही है, लेकिन नौकरी बाजार पर इसका वास्तविक असर अलग-अलग सेक्टर और कौशल के हिसाब से तय होगा।
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