भोपाल आधारित डीप-टेक स्टार्टअप StrainX Bioworks ने 13 मिलियन डॉलर की फंडिंग हासिल कर तीन साल के स्टेल्थ मोड से बाहर आने का ऐलान किया है। कंपनी प्रिसिजन फर्मेंटेशन तकनीक के जरिए प्लांट-बेस्ड और फंक्शनल फूड के लिए नेक्स्ट-जेन इंग्रीडिएंट तैयार करेगी।
भारत के तेजी से बढ़ते फूड-टेक सेक्टर से एक बड़ी खबर सामने आई है। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में स्थित बायोटेक स्टार्टअप StrainX Bioworks ने 13 मिलियन डॉलर यानी करीब 100 करोड़ रुपये की फंडिंग जुटाई है। खास बात यह है कि कंपनी पिछले तीन वर्षों से स्टेल्थ मोड में काम कर रही थी और अब पहली बार सार्वजनिक रूप से सामने आई है। इस निवेश को भारत के प्रिसिजन फर्मेंटेशन और फूड-इंग्रीडिएंट स्पेस की सबसे बड़ी शुरुआती डील्स में से एक माना जा रहा है।
कंपनी की ओर से जारी प्रेस रिलीज़ के मुताबिक इस फंडिंग राउंड की अगुवाई Prime Venture Partners और Leo Capital ने की है। इसके अलावा Good Startup, Sparrow Capital, Sun Icon Ventures, Dholakia Ventures और IIT दिल्ली से जुड़े Wind T Angels जैसे निवेशकों ने भी इसमें भाग लिया है। निवेशकों का मानना है कि आने वाले वर्षों में हेल्दी, सस्टेनेबल और अल्टरनेट प्रोटीन आधारित फूड प्रोडक्ट्स की मांग तेजी से बढ़ने वाली है और StrainX उसी बदलाव का हिस्सा बन सकती है।
StrainX Bioworks की स्थापना IIT दिल्ली से जुड़े वैज्ञानिकों और रिसर्च-आधारित टीम ने की है। कंपनी का मुख्य फोकस प्रिसिजन फर्मेंटेशन तकनीक पर है। यह एक ऐसी बायोटेक प्रक्रिया है जिसमें माइक्रो-ऑर्गेनिज्म की मदद से खास तरह के फूड इंग्रीडिएंट तैयार किए जाते हैं। इन इंग्रीडिएंट्स का इस्तेमाल प्लांट-बेस्ड मीट, डेयरी-फ्री उत्पाद, प्रोटीन-रिच स्नैक्स और हेल्थ-फोकस्ड फूड प्रोडक्ट्स में किया जा सकता है।
सरल भाषा में समझें तो कंपनी ऐसे “बेस इंग्रीडिएंट्स” तैयार कर रही है जो भविष्य के हेल्दी फूड प्रोडक्ट्स की नींव बन सकते हैं। इनका उद्देश्य हाई-प्रोटीन, कम फैट, बेहतर टेक्सचर और लंबे समय तक टिकने वाले फूड ऑप्शंस विकसित करना है। दुनिया भर में वैकल्पिक प्रोटीन और प्लांट-बेस्ड फूड की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है और भारत भी अब इस ट्रेंड का हिस्सा बन रहा है।
दिलचस्प बात यह है कि अब तक भारत में इस्तेमाल होने वाले कई एडवांस फूड इंग्रीडिएंट्स विदेशों से आयात किए जाते रहे हैं। इससे लागत बढ़ती है और छोटे ब्रांड्स के लिए ऐसे प्रोडक्ट्स बनाना महंगा पड़ता है। लेकिन अगर StrainX जैसी कंपनियां स्थानीय स्तर पर इन्हें विकसित करने में सफल होती हैं, तो भारतीय बाजार में प्लांट-बेस्ड फूड और हेल्दी स्नैक्स की कीमतें कम हो सकती हैं। इसका सीधा फायदा उपभोक्ताओं को मिलेगा।
पिछले कुछ वर्षों में भारत में हेल्दी लाइफस्टाइल और फिटनेस को लेकर जागरूकता तेजी से बढ़ी है। मेट्रो शहरों में प्लांट-बेस्ड मिल्क, वेगन प्रोडक्ट्स, हाई-प्रोटीन फूड और मीट अल्टरनेटिव्स की मांग लगातार बढ़ रही है। वहीं Gen-Z और युवा उपभोक्ता अब ऐसे प्रोडक्ट्स पसंद कर रहे हैं जो हेल्दी होने के साथ-साथ पर्यावरण के लिए भी बेहतर हों। यही वजह है कि निवेशकों की नजर अब फूड-बायोटेक कंपनियों पर टिकने लगी है।
यह फंडिंग सिर्फ एक स्टार्टअप के लिए निवेश नहीं, बल्कि भारत के डीप-टेक इकोसिस्टम के लिए भी एक बड़ा संकेत मानी जा रही है। अब तक देश में ज्यादातर निवेश ई-कॉमर्स, फिनटेक और क्विक-कॉमर्स जैसे सेक्टर्स में देखा जाता था। लेकिन अब वेंचर कैपिटल फर्में साइंस-ड्रिवन और रिसर्च-आधारित स्टार्टअप्स पर भी भरोसा जता रही हैं। खासकर बायोटेक, क्लीन-टेक और फूड-इनोवेशन जैसे क्षेत्रों में निवेश लगातार बढ़ रहा है।
इस पूरी कहानी का एक और अहम पहलू भोपाल का उभरता स्टार्टअप इकोसिस्टम है। लंबे समय तक भारत के टेक स्टार्टअप्स का केंद्र केवल बेंगलुरु, दिल्ली, मुंबई और हैदराबाद जैसे शहरों को माना जाता रहा। लेकिन अब भोपाल जैसे Tier-2 शहर भी डीप-टेक और साइंस-आधारित इनोवेशन के नए हब बनते दिखाई दे रहे हैं। StrainX Bioworks की सफलता यह दिखाती है कि मजबूत रिसर्च और सही विजन के दम पर छोटे शहरों से भी ग्लोबल लेवल की कंपनियां तैयार हो सकती हैं।
कंपनी ने संकेत दिया है कि नई फंडिंग का इस्तेमाल पायलट प्रोडक्शन से कमर्शियल स्केल-अप की दिशा में किया जाएगा। इसके अलावा रेगुलेटरी अप्रूवल, नई रिसर्च, टैलेंट हायरिंग और अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों पर भी फोकस रहेगा। कंपनी भारत के बड़े फूड ब्रांड्स के साथ साझेदारी बढ़ाने की तैयारी कर रही है ताकि उनके इंग्रीडिएंट्स को बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जा सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले पांच वर्षों में भारत का अल्टरनेट प्रोटीन और फंक्शनल फूड मार्केट कई गुना बढ़ सकता है। अगर StrainX Bioworks अपनी तकनीक को सफलतापूर्वक स्केल कर पाती है, तो यह सिर्फ भारतीय बाजार तक सीमित नहीं रहेगी बल्कि एक्सपोर्ट मार्केट में भी मजबूत पहचान बना सकती है।
फिलहाल इतना तय माना जा रहा है कि भोपाल की यह स्टार्टअप अब सिर्फ एक रिसर्च लैब नहीं रही, बल्कि भारत के भविष्य के फूड-टेक इकोसिस्टम का एक उभरता हुआ बड़ा नाम बन चुकी है।
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