Published by: Netgram Team. For newsroom standards, byline transparency, and correction requests, review our editorial standards and corrections policy.
Need to contact the newsroom directly? Email netgramnews@gmail.com or visit the team page.
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू आज राष्ट्रपति भवन में 66 पद्म पुरस्कार प्रदान करेंगी। इस बार पांच पद्म विभूषण में से तीन सम्मान केरल से जुड़े नामों को मिलने पर राजनीतिक हलकों में भी चर्चा तेज हो गई है।
नई दिल्ली में आज देश के सबसे प्रतिष्ठित नागरिक सम्मानों में शामिल पद्म पुरस्कारों का भव्य समारोह आयोजित होने जा रहा है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू राष्ट्रपति भवन में 2026 के लिए घोषित पद्म पुरस्कार विजेताओं में से 66 लोगों को सम्मानित करेंगी। इस समारोह पर पूरे देश की नजर बनी हुई है, क्योंकि इस बार सम्मान सूची में कई ऐसे नाम शामिल हैं जिन्होंने अपने क्षेत्र में लंबे समय तक काम किया, लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर बहुत कम चर्चा में रहे।
सबसे ज्यादा चर्चा पांच पद्म विभूषण पुरस्कारों को लेकर हो रही है। इनमें से तीन नाम केरल से जुड़े होने के कारण राजनीतिक हलकों में अलग तरह की बहस भी शुरू हो गई है। खास बात यह है कि केरल में इसी साल विधानसभा चुनाव होने हैं, ऐसे में राजनीतिक विश्लेषक इसे केवल सांस्कृतिक या सामाजिक सम्मान नहीं बल्कि दक्षिण भारत की राजनीति से जोड़कर भी देख रहे हैं।
इस बार वरिष्ठ अभिनेता धर्मेंद्र को मरणोपरांत पद्म विभूषण से सम्मानित किया जा रहा है। हिंदी सिनेमा में कई दशकों तक सक्रिय रहे धर्मेंद्र ने अपने अभिनय, संवाद शैली और लोकप्रियता से भारतीय फिल्म इंडस्ट्री में अलग पहचान बनाई थी। वहीं पूर्व केरल मुख्यमंत्री वी. एस.
अच्युतानंदन को भी मरणोपरांत पद्म विभूषण दिया जाएगा। वाम राजनीति के बड़े चेहरे माने जाने वाले अच्युतानंदन लंबे समय तक केरल की राजनीति में सक्रिय रहे और आम लोगों से जुड़ी राजनीति के लिए पहचाने जाते थे।
Continue Reading25 मई 2026
सरकारी जानकारी के मुताबिक, 2026 के लिए कुल 131 लोगों को पद्म पुरस्कारों के लिए चुना गया है। इनमें 5 पद्म विभूषण, 17 पद्म भूषण और 109 पद्मश्री शामिल हैं। आज होने वाले पहले चरण के समारोह में 66 पुरस्कार दिए जाएंगे, जबकि बाकी सम्मान बाद के कार्यक्रमों में प्रदान किए जाएंगे।
पद्म पुरस्कारों को भारत में नागरिक सम्मान की सबसे प्रतिष्ठित श्रृंखला माना जाता है। भारत रत्न के बाद इन्हें देश का सबसे बड़ा नागरिक सम्मान समझा जाता है। ये पुरस्कार कला, साहित्य, शिक्षा, चिकित्सा, विज्ञान, सामाजिक सेवा, खेल, उद्योग और सार्वजनिक जीवन जैसे क्षेत्रों में “विशिष्ट और असाधारण योगदान” के लिए दिए जाते हैं। हर साल गणतंत्र दिवस से पहले इन पुरस्कारों का एलान होता है और उसके बाद राष्ट्रपति भवन में सम्मान समारोह आयोजित किया जाता है।
इस बार की सूची को सरकार समर्थक हलकों में “समावेशी सूची” कहा जा रहा है। सूची में उत्तर–पूर्व के राज्यों, आदिवासी समुदायों, गांवों में काम करने वाले सामाजिक कार्यकर्ताओं, लोक कलाकारों, पारंपरिक चिकित्सा से जुड़े लोगों और स्थानीय स्तर पर बदलाव लाने वाले कई चेहरों को जगह दी गई है। सरकार का दावा है कि इस बार केवल बड़े और चर्चित नामों पर नहीं बल्कि “ग्राउंड लेवल” पर काम करने वाले लोगों को प्राथमिकता दी गई है।
Continue Reading25 मई 2026
हालांकि विपक्ष और सोशल मीडिया के कुछ हिस्सों में इस सूची को लेकर सवाल भी उठाए जा रहे हैं। कई लोगों का कहना है कि पुरस्कार चयन में राजनीतिक संदेश भी छिपा हुआ है। खासकर केरल और दक्षिण भारत से जुड़े नामों की संख्या को लेकर राजनीतिक चर्चा तेज है। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा दक्षिण भारत में अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है और ऐसे सम्मान उसी दिशा में एक “सॉफ्ट मैसेज” हो सकते हैं।
राजनीतिक विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि सांस्कृतिक और सामाजिक सम्मान हमेशा केवल सम्मान तक सीमित नहीं रहते। इनका प्रतीकात्मक असर भी होता है। जब किसी क्षेत्र, भाषा या समुदाय से जुड़े लोगों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलती है, तो वहां भावनात्मक जुड़ाव भी मजबूत होता है। दक्षिण भारत में लंबे समय से भाजपा को राजनीतिक चुनौती का सामना करना पड़ रहा है, इसलिए केरल और तमिलनाडु जैसे राज्यों में प्रतीकात्मक राजनीति को भी अहम माना जा रहा है।
सोशल मीडिया पर भी पद्म पुरस्कारों की सूची को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रिया दिखाई दे रही है। कुछ यूजर्स ने इसे “आम लोगों की जीत” बताया है और कहा कि पहली बार गांवों और छोटे शहरों में काम करने वाले लोगों को इतना बड़ा मंच मिला है। वहीं कुछ लोगों ने आरोप लगाया कि राजनीतिक विचारधारा से जुड़े लोगों को ज्यादा प्राथमिकता दी गई।
Continue Reading25 मई 2026
इन सबके बीच एक बड़ा सवाल यह भी है कि ऐसे पुरस्कारों का आम लोगों पर क्या असर पड़ता है। सीधे तौर पर देखें तो पद्म पुरस्कार किसी सरकारी नीति को नहीं बदलते, लेकिन समाज में यह संदेश जरूर देते हैं कि देश किन कामों को सबसे ज्यादा महत्व दे रहा है। जब गांवों में स्वास्थ्य सेवाएं देने वाले कार्यकर्ता, स्थानीय कलाकार, वैज्ञानिक, शिक्षक या समाजसेवी राष्ट्रीय मंच पर सम्मानित होते हैं, तो युवाओं के सामने नए रोल मॉडल बनते हैं।
विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर पुरस्कार केवल बड़े शहरों और चर्चित चेहरों तक सीमित न रहकर जमीनी स्तर पर काम करने वालों तक पहुंचते हैं, तो इससे समाज में सकारात्मक प्रेरणा पैदा होती है। यही वजह है कि इस बार की सूची में कई “अनसुने नाम” चर्चा में हैं।
आज राष्ट्रपति भवन में होने वाला समारोह सिर्फ पुरस्कार वितरण तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह देश की सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दिशा को लेकर भी कई संकेत देगा। अब नजर इस बात पर रहेगी कि बाकी पुरस्कार समारोहों में किन नामों को सम्मानित किया जाता है और इस सूची पर देश की राजनीतिक बहस किस दिशा में आगे बढ़ती है।
Disclaimer:
Images are for illustrative purposes only and some editing of images done by using AI.
#PadmaAwards2026 #PadmaAwards #IndiaNews #Dharmendra #Kerala #IndianPolitics #RashtrapatiBhavan #NetGramNews
25 मई 2026