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जोधपुर की मशहूर हैंडीक्राफ्ट इंडस्ट्री इस समय बड़े आर्थिक संकट से गुजर रही है। अमेरिकी टैरिफ़ पॉलिसी और पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के कारण एक्सपोर्ट बुरी तरह प्रभावित हुआ है, जिससे हजारों कारीगरों और छोटे व्यापारियों की रोज़ी-रोटी पर खतरा मंडरा रहा है।
जोधपुर की पहचान सिर्फ़ नीले शहर या ऐतिहासिक किलों से नहीं है, बल्कि यहाँ की हैंडीक्राफ्ट इंडस्ट्री भी दुनिया भर में अपनी खास जगह रखती है। लकड़ी का फर्नीचर, आयरन-आर्ट, हैंडमेड डेकोर आइटम, टेक्सटाइल और विंटेज एक्सपोर्ट प्रोडक्ट्स के कारण जोधपुर को भारत का बड़ा एक्सपोर्ट हब माना जाता है। लेकिन इस समय यही इंडस्ट्री अपने सबसे कठिन दौर से गुजर रही है। पहले अमेरिका की टैरिफ़ पॉलिसी ने कारोबार को झटका दिया और अब पश्चिम एशिया में जारी युद्ध ने हालात और बिगाड़ दिए हैं। इंडस्ट्री से जुड़े लोगों का कहना है कि कई सेक्टरों में एक्सपोर्ट लगभग आधा रह गया है। अमेरिका की टैरिफ़ पॉलिसी से शुरू हुआ दबाव पिछले कुछ समय से अमेरिका ने कई आयातित उत्पादों पर टैरिफ़ बढ़ाए, जिसका असर भारतीय एक्सपोर्टर्स पर भी पड़ा। जोधपुर के हैंडीक्राफ्ट उत्पाद अमेरिका में बड़ी मात्रा में जाते हैं। बढ़े हुए टैक्स के कारण भारतीय सामान वहाँ महँगा पड़ने लगा, जिससे विदेशी खरीदारों ने ऑर्डर कम कर दिए। पहले ही मुनाफ़ा घट रहा था और प्रतिस्पर्धा बढ़ रही थी। कई छोटे एक्सपोर्टर मुश्किल से अपने खर्च निकाल पा रहे थे। पश्चिम एशिया युद्ध ने बढ़ाई मुश्किलें अमेरिकी दबाव के बीच पश्चिम एशिया में युद्ध शुरू होने से व्यापारिक हालात अचानक और खराब हो गए। इस क्षेत्र से होकर गुजरने वाले कई प्रमुख शिपिंग रूट प्रभावित हुए। कंटेनर जहाज़ों को लंबे और महंगे रास्तों से भेजना पड़ रहा है। इसके कारण ट्रांसपोर्ट कॉस्ट तेज़ी से बढ़ गई है। पहले जो शिपमेंट समय पर पहुँच जाते थे, अब उनमें हफ्तों की देरी हो रही है। इंश्योरेंस कंपनियों ने भी जोखिम बढ़ने के कारण प्रीमियम महँगा कर दिया है। इससे एक्सपोर्ट की कुल लागत और बढ़ गई। कई विदेशी कंपनियों ने नए ऑर्डर रोक दिए हैं, जबकि कुछ पुराने ऑर्डर पोस्टपोन कर दिए गए हैं। समय पर डिलिवरी न होने से खरीदारों का भरोसा भी कमजोर पड़ रहा है। छोटे कारीगर सबसे ज्यादा प्रभावित इस संकट का सबसे बड़ा असर छोटे कारीगरों और मजदूरों पर पड़ा है। जोधपुर की हैंडीक्राफ्ट इंडस्ट्री में हजारों लोग सीधे और लाखों लोग अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े हुए हैं। इनमें लकड़ी का काम करने वाले कारीगर, पॉलिश वर्कर, वेल्डिंग स्टाफ, पैकिंग मजदूर, ड्राइवर और ट्रांसपोर्ट कर्मचारी शामिल हैं। ऑर्डर कम होने के कारण कई यूनिट्स ने काम के घंटे घटा दिए हैं। कुछ फैक्ट्रियों ने कर्मचारियों की संख्या कम कर दी है, जबकि कई छोटे वर्कशॉप अस्थायी रूप से बंद होने की स्थिति में पहुँच गए हैं। दैनिक मजदूरी पर काम करने वाले परिवारों की आय अचानक गिर गई है। स्थानीय अर्थव्यवस्था पर भी असर जब किसी बड़े उद्योग की रफ्तार धीमी पड़ती है तो उसका असर पूरे शहर की अर्थव्यवस्था पर दिखाई देता है। जोधपुर में भी यही स्थिति बन रही है। मजदूरों और कारीगरों की आय कम होने से बाजारों में खरीदारी घटी है। किराना दुकानदार, छोटे व्यापारी और स्थानीय सेवा क्षेत्र भी इसका असर महसूस कर रहे हैं। कई परिवार अब स्कूल फीस, किराया और इलाज जैसे जरूरी खर्च संभालने में मुश्किल महसूस कर रहे हैं। शहर में कैश फ्लो कम होने से छोटे व्यापारियों की बिक्री भी प्रभावित हो रही है। अगर हालात लंबे समय तक ऐसे ही रहे तो इसका असर बेरोज़गारी और आर्थिक अस्थिरता के रूप में और गहरा हो सकता है। एक्सपोर्टर्स के सामने नई चुनौती जोधपुर के एक्सपोर्टर्स का कहना है कि सिर्फ़ लागत बढ़ना ही समस्या नहीं है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मार्केट में भरोसा बनाए रखना भी बड़ी चुनौती बन गया है। विदेशी खरीदार समय पर डिलिवरी चाहते हैं। यदि भारतीय सप्लायर लगातार देरी करते हैं तो ऑर्डर दूसरे देशों को शिफ्ट हो सकते हैं। चीन, वियतनाम और अन्य एशियाई देशों से प्रतिस्पर्धा पहले ही तेज़ है। ऐसे में भारतीय एक्सपोर्टर्स के लिए बाजार बचाए रखना मुश्किल होता जा रहा है। कई व्यापारियों का मानना है कि यदि अगले कुछ महीनों में हालात नहीं सुधरे तो लंबे समय के लिए अंतरराष्ट्रीय ग्राहक खोने का खतरा बढ़ सकता है। इंडस्ट्री की मांग — राहत पैकेज और आसान कर्ज हैंडीक्राफ्ट उद्योग से जुड़े संगठन अब सरकार से राहत पैकेज की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि इस सेक्टर को बचाने के लिए तुरंत कदम उठाने की जरूरत है। इंडस्ट्री की मुख्य मांगों में शामिल हैं: एक्सपोर्ट सेक्टर के लिए टैक्स और टैरिफ राहत छोटे कारोबारियों के लिए आसान और कम ब्याज वाला लोन शिपिंग सब्सिडी और लॉजिस्टिक सपोर्ट एमएसएमई यूनिट्स के लिए विशेष सहायता पैकेज अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुँच बढ़ाने के लिए सरकारी सहयोग एक्सपोर्टर्स का मानना है कि अगर समय रहते मदद नहीं मिली तो कई छोटी यूनिट्स स्थायी रूप से बंद हो सकती हैं। नए बाजार और ई-कॉमर्स पर फोकस विशेषज्ञों का कहना है कि अब इंडस्ट्री को सिर्फ़ पारंपरिक बाजारों पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। अमेरिका और पश्चिम एशिया के अलावा नए देशों में बाजार तलाशने होंगे। साथ ही ई-कॉमर्स और डायरेक्ट-टू-कस्टमर मॉडल को तेजी से बढ़ाने की जरूरत है। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए छोटे निर्माता सीधे विदेशी ग्राहकों तक पहुँच सकते हैं। इससे बिचौलियों पर निर्भरता कम होगी और मुनाफ़ा बेहतर मिल सकता है। डिजिटल मार्केटिंग, ब्रांडिंग और ग्लोबल ऑनलाइन सेल्स अब भविष्य की बड़ी जरूरत मानी जा रही हैं। भविष्य क्या कहता है? जोधपुर की हैंडीक्राफ्ट इंडस्ट्री ने दशकों की मेहनत से दुनिया में पहचान बनाई है। यह सिर्फ़ व्यापार नहीं बल्कि हजारों परिवारों की जिंदगी और राजस्थान की सांस्कृतिक विरासत से जुड़ा हुआ सेक्टर है। लेकिन मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों ने इसे गंभीर मोड़ पर ला खड़ा किया है। अगर युद्ध और व्यापारिक तनाव लंबे समय तक जारी रहे तो इंडस्ट्री को भारी नुकसान हो सकता है। वहीं अगर सरकार, उद्योग संगठन और एक्सपोर्टर्स मिलकर नई रणनीति अपनाते हैं, तो यह संकट भविष्य में बदलाव का अवसर भी बन सकता है। सही सपोर्ट, नए बाजार और तकनीकी बदलावों के जरिए जोधपुर की यह पारंपरिक इंडस्ट्री फिर से मजबूती हासिल कर सकती है।
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22 मई 2026