फिलीपींस की राजधानी मनीला में सीनेट भवन के भीतर उस समय अफरा-तफरी मच गई जब ICC वारंट का सामना कर रहे सीनेटर रोनाल्ड डेला रोसा को हिरासत में लेने पहुंचे अधिकारियों के दौरान गोलीबारी की आवाजें सुनाई दीं। घटना ने देश में कानून के राज, मानवाधिकार और लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।
फिलीपींस की राजनीति इस समय गंभीर तनाव और अंतरराष्ट्रीय विवाद के दौर से गुजर रही है। राजधानी मनीला स्थित सीनेट भवन में हुई अचानक गोलीबारी ने पूरे देश को हिला दिया है। यह घटना उस समय सामने आई जब सुरक्षा अधिकारी मौजूदा सीनेटर और पूर्व पुलिस प्रमुख रोनाल्ड “बातो” डेला रोसा को हिरासत में लेने पहुंचे थे। डेला रोसा पर अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC) ने मानवता के खिलाफ अपराधों के आरोप में गिरफ्तारी वारंट जारी किया है।
सीनेट भवन के भीतर गोलियों की आवाज सुनते ही अफरा-तफरी मच गई। कर्मचारियों, मीडिया कर्मियों और अधिकारियों को तुरंत सुरक्षित स्थानों पर जाने के निर्देश दिए गए। कुछ लोगों ने जमीन पर लेटकर खुद को बचाने की कोशिश की। शुरुआती रिपोर्टों में यह स्पष्ट नहीं हो पाया कि फायरिंग किसने की और किस परिस्थिति में गोली चली। हालांकि राहत की बात यह रही कि किसी बड़े नुकसान या मौत की पुष्टि नहीं हुई। सुरक्षा एजेंसियों ने पूरे परिसर को घेर लिया और जांच शुरू कर दी।
डेला रोसा क्यों हैं विवादों में? रोनाल्ड डेला रोसा फिलीपींस के पूर्व राष्ट्रपति रोड्रिगो दुतेर्ते के बेहद करीबी माने जाते हैं। दुतेर्ते सरकार के दौरान उन्होंने देश के चर्चित “वार ऑन ड्रग्स” यानी ड्रग्स के खिलाफ अभियान का नेतृत्व किया था। यह अभियान अपराध और नशे के कारोबार को खत्म करने के नाम पर चलाया गया था, लेकिन इस दौरान हजारों लोगों की मौत ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारी विवाद खड़ा कर दिया। मानवाधिकार संगठनों का आरोप है कि पुलिस ऑपरेशनों में बड़ी संख्या में गरीब और निम्न वर्ग के लोगों को बिना निष्पक्ष जांच और कानूनी प्रक्रिया के मार दिया गया। कई मामलों में कथित फर्जी मुठभेड़ों के आरोप भी लगे। यही वजह है कि अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय ने इस अभियान की जांच शुरू की। ICC का कहना है कि 2016 से 2018 के बीच हुए कई ऑपरेशन केवल अपराध नियंत्रण नहीं थे, बल्कि मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन थे। अदालत ने इन्हीं आरोपों के आधार पर डेला रोसा के खिलाफ “क्राइम्स अगेंस्ट ह्यूमैनिटी” यानी मानवता के खिलाफ अपराध का मामला दर्ज किया है।
गिरफ्तारी की आशंका और बढ़ता तनाव रिपोर्टों के अनुसार, गिरफ्तारी की आशंका को देखते हुए डेला रोसा पिछले कुछ दिनों से सीनेट परिसर के अंदर ही रह रहे थे। उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए अपने समर्थकों से समर्थन की अपील भी की थी। इसके बाद बड़ी संख्या में उनके समर्थक सीनेट भवन के बाहर जमा होने लगे। जब विशेष सुरक्षा बल उन्हें हिरासत में लेने के लिए आगे बढ़े, तभी हालात अचानक तनावपूर्ण हो गए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, पहले बहस और धक्का-मुक्की जैसी स्थिति बनी और फिर गोली चलने की आवाज सुनाई दी। कुछ समय के लिए पूरे इलाके को लॉकडाउन जैसा बना दिया गया।
सरकार के भीतर भी मतभेद इस पूरे मामले पर फिलीपींस सरकार के भीतर भी अलग-अलग राय सामने आ रही है। कुछ सरकारी अधिकारियों का कहना है कि ICC को फिलीपींस में कार्रवाई करने का अधिकार नहीं है, क्योंकि देश 2019 में ICC की सदस्यता से बाहर हो चुका है। हालांकि संवैधानिक विशेषज्ञों और अंतरराष्ट्रीय कानून जानकारों का कहना है कि जिन घटनाओं की जांच हो रही है, वे उस समय की हैं जब फिलीपींस ICC का सदस्य था। इसलिए अदालत को जांच और कार्रवाई का अधिकार मिल सकता है। विपक्षी नेताओं ने सरकार से कानून का पालन करने और मामले को शांतिपूर्ण तरीके से संभालने की अपील की है। वहीं डेला रोसा समर्थकों का दावा है कि यह पूरा मामला राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ी नजर फिलीपींस में चल रहा यह विवाद अब अंतरराष्ट्रीय राजनीति और मानवाधिकार बहस का बड़ा मुद्दा बन चुका है। संयुक्त राष्ट्र और कई मानवाधिकार संगठनों ने मामले पर नजर बनाए रखी है। उनका कहना है कि किसी भी देश में अपराध के खिलाफ कार्रवाई जरूरी है, लेकिन कानून और मानवाधिकारों की अनदेखी स्वीकार नहीं की जा सकती। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह मामला फिलीपींस की न्याय व्यवस्था, लोकतंत्र और अंतरराष्ट्रीय संबंधों की बड़ी परीक्षा साबित हो सकता है। अगर ICC की कार्रवाई आगे बढ़ती है, तो यह एशिया की राजनीति में भी बड़ा प्रभाव डाल सकती है।
आगे क्या हो सकता है? फिलहाल सुरक्षा एजेंसियां सीनेट परिसर में हुई गोलीबारी की जांच कर रही हैं। सरकार ने स्थिति को नियंत्रण में होने का दावा किया है, लेकिन राजनीतिक तनाव लगातार बढ़ता दिख रहा है। आने वाले दिनों में यह तय होगा कि डेला रोसा को औपचारिक रूप से हिरासत में लिया जाएगा या सरकार ICC के खिलाफ कानूनी और राजनीतिक लड़ाई जारी रखेगी। यह घटना सिर्फ एक गिरफ्तारी विवाद नहीं, बल्कि सत्ता, कानून, मानवाधिकार और अंतरराष्ट्रीय न्याय के बीच टकराव का प्रतीक बन चुकी है।
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