नई रिसर्च में दावा किया गया है कि एक्स्ट्रीम मौसम—जैसे तेज गर्मी, कड़ाके की ठंड और भारी बारिश—दिल की बीमारियों का खतरा बढ़ा सकते हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि क्लाइमेट चेंज अब सिर्फ पर्यावरण नहीं, बल्कि इंसानी स्वास्थ्य के लिए भी बड़ा खतरा बनता जा रहा है।
दुनिया भर में बदलता मौसम अब सिर्फ असुविधा या मौसमी परेशानी का कारण नहीं रह गया है। नई रिसर्च बता रही है कि बढ़ती गर्मी, कड़ाके की ठंड और अचानक होने वाली भारी बारिश सीधे तौर पर इंसान के दिल की सेहत पर असर डाल सकती है। हाल ही में सामने आई एक स्टडी में दावा किया गया है कि एक्स्ट्रीम वेदर कंडीशंस यानी मौसम के बेहद तीखे बदलाव हार्ट डिजीज के खतरे को बढ़ा सकते हैं।
यह अध्ययन American Journal of Preventive Medicine में प्रकाशित हुआ है, जबकि इसकी रिपोर्ट ABC News ने भी प्रकाशित की। रिसर्च में वैज्ञानिकों ने पाया कि जब तापमान बहुत ज्यादा बढ़ जाता है या बेहद नीचे गिर जाता है, तब शरीर पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। इसी तरह, एक दिन में अत्यधिक बारिश भी दिल की बीमारी से जुड़े मामलों को बढ़ाने में भूमिका निभा सकती है।
वैज्ञानिकों का कहना है कि पहली नजर में यह बढ़ोतरी छोटी लग सकती है, लेकिन जब करोड़ों लोगों की आबादी और लंबे समय तक मौसम के प्रभाव को साथ जोड़कर देखा जाता है, तब यह सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए बड़ा खतरा बन सकता है।
स्टडी के मुताबिक, जब तापमान 100.4 डिग्री फ़ारेनहाइट यानी लगभग 38 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच जाता है, तब दिल से जुड़ी बीमारियों का खतरा औसतन करीब 3 प्रतिशत तक बढ़ जाता है। वहीं, जब तापमान 14 डिग्री फ़ारेनहाइट यानी लगभग माइनस 10 डिग्री सेल्सियस तक गिर जाता है, तब भी हार्ट रिस्क बढ़ने के संकेत मिले हैं। हालांकि रिसर्च में यह भी सामने आया कि अत्यधिक गर्मी का असर ठंड के मुकाबले ज्यादा गंभीर देखा गया।
Continue Reading13 मई 2026
बारिश को लेकर भी अध्ययन में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। रिसर्च के अनुसार, जिन दिनों दो इंच से ज्यादा बारिश रिकॉर्ड की गई, उन दिनों दिल की बीमारी से जुड़े जोखिम करीब 2 प्रतिशत तक बढ़े पाए गए। वैज्ञानिकों का मानना है कि लगातार बदलता मौसम शरीर के प्राकृतिक संतुलन को प्रभावित करता है, जिससे हार्ट पर दबाव बढ़ने लगता है।
विशेषज्ञ बताते हैं कि इंसानी शरीर एक निश्चित तापमान और मौसम के हिसाब से खुद को ढालता है। लेकिन जब अचानक बहुत ज्यादा गर्मी या ठंड पड़ती है, तो शरीर को एडजस्ट होने का समय नहीं मिल पाता। इसका असर ब्लड प्रेशर, हार्ट रेट और शरीर में पानी के संतुलन पर पड़ सकता है। यही वजह है कि बुजुर्गों, हार्ट पेशेंट्स और डायबिटीज या हाई BP से जूझ रहे लोगों में खतरा ज्यादा बढ़ जाता है।
डॉक्टरों का कहना है कि हीटवेव के दौरान शरीर में डिहाइड्रेशन तेजी से बढ़ता है। जब शरीर में पानी कम होता है, तब खून गाढ़ा होने लगता है और दिल को खून पंप करने में ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है। यही स्थिति हार्ट अटैक या स्ट्रोक जैसी समस्याओं का जोखिम बढ़ा सकती है।
दूसरी तरफ, बहुत ज्यादा ठंड पड़ने पर शरीर की ब्लड वेसल्स सिकुड़ने लगती हैं। इससे ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है और दिल पर अतिरिक्त दबाव आता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि ठंड और गर्मी दोनों ही स्थितियों में शरीर तनाव की अवस्था में पहुंच जाता है, जो लंबे समय में दिल की बीमारी को बढ़ावा दे सकता है।
Continue Reading9 मई 2026
क्लाइमेट चेंज पर अब तक ज्यादातर चर्चा ग्लेशियर पिघलने, समुद्र का स्तर बढ़ने और तूफानों को लेकर होती रही है। लेकिन धीरे-धीरे रिसर्च यह साबित कर रही है कि इसका सबसे खतरनाक असर इंसानी स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। बदलता मौसम अब सांस, दिमाग और दिल जैसी गंभीर बीमारियों से भी जोड़ा जा रहा है।
इस साल दुनिया के कई हिस्सों में मौसम के पैटर्न में असामान्य बदलाव देखने को मिले हैं। कहीं समय से पहले तेज गर्मी शुरू हो गई, तो कहीं अचानक भारी बारिश और ठंड ने लोगों को परेशान किया। भारत समेत कई देशों में रिकॉर्ड तोड़ हीटवेव दर्ज की गई हैं। डॉक्टरों का मानना है कि मौसम का यह अनिश्चित व्यवहार आने वाले समय में स्वास्थ्य संकट को और गंभीर बना सकता है।
विशेषज्ञ लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दे रहे हैं। उनका कहना है कि एक्स्ट्रीम वेदर के दौरान घर के अंदर तापमान संतुलित रखने की कोशिश करनी चाहिए। ज्यादा से ज्यादा पानी पीना, हल्के कपड़े पहनना और दोपहर की तेज धूप में बाहर निकलने से बचना जरूरी है।
Continue Reading13 मई 2026
हार्ट डिजीज, हाई BP या डायबिटीज से पीड़ित लोगों को खास सतर्क रहने की जरूरत बताई गई है। डॉक्टरों का कहना है कि ऐसे मरीज अपनी दवाइयां नियमित लें और किसी भी असामान्य लक्षण—जैसे सीने में दर्द, सांस फूलना, चक्कर या कमजोरी—को नजरअंदाज न करें।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक, बदलते मौसम को अब सामान्य मौसमी बदलाव समझकर अनदेखा करना भारी पड़ सकता है। क्योंकि क्लाइमेट चेंज का असर धीरे-धीरे इंसान के शरीर पर दिखाई देने लगा है।
जब अगली बार आपको लगे कि “गर्मी तो हर साल पड़ती है”, तब यह याद रखना जरूरी होगा कि आज की गर्मी पहले जैसी नहीं रही। मौसम के छोटे-छोटे बदलाव भी शरीर, खासकर दिल की सेहत पर गहरा असर डाल सकते हैं। ऐसे में थोड़ी सावधानी और समय रहते सतर्कता ही भविष्य में बड़ी स्वास्थ्य समस्याओं से बचाने का सबसे बड़ा हथियार बन सकती है।
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13 मई 2026