राजस्थान के जोधपुर में ड्रग्स तस्करों और पुलिस के बीच हुई मुठभेड़ ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी। पुलिस ने जवाबी कार्रवाई करते हुए 70 किलो डोडा पोस्त, लोडेड पिस्टल और तस्करी नेटवर्क से जुड़े आरोपियों को गिरफ्तार कर बड़ी कामयाबी हासिल की है।
राजस्थान के जोधपुर रेंज में नशे के कारोबार के खिलाफ चल रहे अभियान के बीच पुलिस और तस्करों के बीच हुई हिंसक मुठभेड़ ने कानून व्यवस्था और ड्रग्स नेटवर्क की गंभीरता को फिर सामने ला दिया है। जानकारी के मुताबिक पुलिस को लंबे समय से सक्रिय एक ड्रग्स सप्लाई नेटवर्क की मूवमेंट की गुप्त सूचना मिली थी। इसी इनपुट के आधार पर पुलिस टीम ने इलाके में नाकाबंदी और सर्च ऑपरेशन शुरू किया। कार्रवाई के दौरान संदिग्ध वाहन को रोकने की कोशिश की गई, लेकिन तस्करों ने पुलिस को देखते ही भागने का प्रयास किया और अचानक ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार कुछ देर के लिए पूरा इलाका गोलियों की आवाज से गूंज उठा। पुलिस ने भी मोर्चा संभालते हुए जवाबी कार्रवाई की और आखिरकार आरोपियों को घेरकर काबू कर लिया। ऑपरेशन के दौरान पुलिस ने करीब 70 किलो डोडा पोस्त, एक लोडेड पिस्टल और अन्य संदिग्ध सामान बरामद किया। अधिकारियों का कहना है कि पकड़े गए आरोपी लंबे समय से राजस्थान और पड़ोसी राज्यों में नशे की सप्लाई चेन से जुड़े हुए थे।
सरहदी और पश्चिमी राजस्थान के कई जिलों में पिछले कुछ वर्षों से नशे का नेटवर्क तेजी से फैलता दिखाई दिया है। खासकर जोधपुर, बाड़मेर, जैसलमेर और आसपास के इलाकों में डोडा पोस्त, अफीम, एमडी ड्रग्स और सिंथेटिक नशे की खेप पकड़े जाने के कई मामले सामने आ चुके हैं। जांच एजेंसियों के मुताबिक इन नेटवर्क्स के तार केवल स्थानीय गिरोहों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि अंतरराज्यीय तस्करी गैंग भी इसमें शामिल हैं। यही कारण है कि पुलिस लगातार स्पेशल ऑपरेशन, नाकाबंदी और रेड अभियान चला रही है।
Continue Reading12 मई 2026
पुलिस अधिकारियों का मानना है कि ड्रग्स तस्करी अब सिर्फ नशे तक सीमित अपराध नहीं रह गया है। इसके जरिए आने वाला पैसा अवैध हथियारों, गैंगवार, लूट और दूसरे संगठित अपराधों को भी बढ़ावा देता है। यही वजह है कि हाल के महीनों में राजस्थान पुलिस ने नारकोटिक्स नेटवर्क पर सख्ती बढ़ाई है। अधिकारियों का कहना है कि इस कार्रवाई का सबसे बड़ा मकसद सप्लाई चेन को तोड़ना और युवाओं तक पहुंच रहे नशे के नेटवर्क को कमजोर करना है।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच राजस्थान पुलिस का आंतरिक सिस्टम भी चर्चा में बना हुआ है। हाल ही में पुलिस विभाग में प्रमोशन को लेकर लागू “दो संतान नियम” को लेकर बहस तेज हुई थी। कई वरिष्ठ हेड कॉन्स्टेबल प्रमोशन से वंचित रह गए, जिस पर सवाल भी उठे। हालांकि इन विवादों के बीच फील्ड में पुलिस की आक्रामक कार्रवाई यह संकेत देती है कि विभाग नशे और संगठित अपराध के खिलाफ सख्त रुख बनाए हुए है।
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विशेषज्ञों का मानना है कि राजस्थान में ड्रग्स का बढ़ता कारोबार सिर्फ कानून व्यवस्था का मुद्दा नहीं बल्कि सामाजिक चुनौती भी बन चुका है। गांवों और कस्बों में बेरोजगारी, तेजी से पैसा कमाने की चाह और अपराधी नेटवर्क का दबाव युवाओं को इस दलदल की तरफ धकेल रहा है। कई मामलों में देखा गया है कि छोटे स्तर पर शुरू हुई तस्करी बाद में बड़े नेटवर्क में बदल जाती है। ऐसे में केवल पुलिस कार्रवाई लंबे समय तक समाधान नहीं दे सकती।
सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि ड्रग्स के खिलाफ लड़ाई में पुलिसिंग के साथ-साथ रोजगार, शिक्षा और काउंसलिंग जैसी योजनाओं की भी जरूरत है। अगर युवाओं को सही दिशा और अवसर नहीं मिले तो तस्कर उन्हें आसानी से अपने नेटवर्क में शामिल कर लेते हैं। यही वजह है कि विशेषज्ञ अब सामुदायिक जागरूकता अभियान और स्कूल-कॉलेज स्तर पर एंटी ड्रग्स प्रोग्राम चलाने की मांग कर रहे हैं।
Continue Reading12 मई 2026
स्थानीय लोगों ने पुलिस की कार्रवाई की सराहना की है। उनका कहना है कि खुलेआम फायरिंग जैसी घटनाएं आम लोगों में डर पैदा करती हैं और यह दिखाती हैं कि तस्करों के हौसले कितने बढ़ चुके हैं। ऐसे में सख्त कार्रवाई जरूरी है ताकि अपराधियों में कानून का डर बना रहे। हालांकि लोगों ने यह भी कहा कि लगातार बढ़ रहे नशे के कारोबार को रोकने के लिए सीमावर्ती इलाकों में निगरानी और ज्यादा मजबूत करनी होगी।
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12 मई 2026