दक्षिण अफ्रीका में हुई नई रिसर्च में पता चला है कि इंसान लगभग 2.2 लाख साल पहले भी पत्थरों की खुदाई करते थे। वैज्ञानिकों को जोजोसी नाम की जगह पर ऐसे सबूत मिले हैं, जिनसे पता चलता है कि प्राचीन लोग खास तरह के पत्थर निकालकर उनसे औजार बनाते थे। वहां बड़ी मात्रा में टूटे पत्थर और औजार बनाने के निशान मिले हैं। रिसर्च के मुताबिक, यह काम हजारों साल तक चलता रहा। इस खोज ने साबित किया है कि शुरुआती इंसान योजनाबद्ध तरीके से संसाधनों का इस्तेमाल करते थे।
वैज्ञानिकों की एक नई रिसर्च में बेहद चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। शोधकर्ताओं ने पाया है कि आज से लगभग 2 लाख 20 हजार साल पहले दक्षिण अफ्रीका में इंसान पत्थरों की खदान जैसी खुदाई करते थे। यह खोज बताती है कि शुरुआती इंसान केवल शिकार और भोजन जुटाने तक सीमित नहीं थे, बल्कि वे योजनाबद्ध तरीके से संसाधनों का इस्तेमाल भी करते थे।
यह रिसर्च दक्षिण अफ्रीका के पूर्वी इलाके में स्थित जोजोसी (Jojosi) नामक जगह पर की गई। यहां वैज्ञानिकों को ऐसे सबूत मिले हैं, जो दिखाते हैं कि प्राचीन इंसान खास तरह के पत्थर निकालने के लिए नियमित रूप से इस स्थान पर आते थे।
कौन सा पत्थर निकालते थे? शोध में पता चला कि वहां से हॉर्नफेल्स (Hornfels) नाम का एक मजबूत और महीन पत्थर निकाला जाता था। इस पत्थर का इस्तेमाल स्टोन एज यानी पाषाण युग के औजार बनाने में किया जाता था। वैज्ञानिकों को वहां बड़ी संख्या में टूटे हुए पत्थर, छोटे-छोटे टुकड़े, हथौड़े जैसे पत्थर और पत्थर काटने के निशान मिले हैं।
कैसे काम करते थे प्राचीन इंसान? रिसर्च के अनुसार, लोग वहीं पर पत्थरों को तोड़कर उनकी सही आकृति बनाते थे और फिर उन्हें दूसरी जगह ले जाकर औजार तैयार करते थे। वहां लगभग केवल पत्थर काटने का कचरा मिला, लेकिन रहने या बसने के कोई निशान नहीं मिले। इससे वैज्ञानिकों ने निष्कर्ष निकाला कि लोग सिर्फ पत्थर लेने के लिए वहां आते थे। हजारों साल तक चलता रहा काम वैज्ञानिकों ने बताया कि यह गतिविधि करीब 1 लाख 10 हजार ईसा पूर्व तक जारी रही। इसकी उम्र पता करने के लिए वैज्ञानिकों ने ल्यूमिनेसेंस डेटिंग तकनीक का इस्तेमाल किया। इस तकनीक से यह पता लगाया जाता है कि मिट्टी आखिरी बार सूरज की रोशनी के संपर्क में कब आई थी।
रिसर्च में क्या खास मिला? जोजोसी क्षेत्र समुद्र तट से लगभग 140 किलोमीटर दूर घास के मैदानों में स्थित है। यहां खुदाई का काम 2022 में शुरू हुआ था। वैज्ञानिकों ने ड्रोन और पैदल सर्वे के जरिए कई ऐसे इलाके खोजे जहां बड़ी मात्रा में पत्थरों के अवशेष मिले। खुदाई के दौरान कुछ जगहों पर प्रति घन मीटर में 2 लाख से लेकर 20 लाख तक पत्थर के टुकड़े मिले। शोधकर्ताओं ने 353 टूटे हुए पत्थरों को दोबारा जोड़कर यह समझने की कोशिश की कि उस समय इंसान किस तरह औजार बनाते थे।
Disclaimer
Disclaimer:
Images are for illustrative purposes only and some editing of images done by using AI.
Published by: Zoya. For newsroom standards, byline transparency, and correction requests, review our editorial standards and corrections policy.
Need to contact the newsroom directly? Email netgramnews@gmail.com or visit the team page.
इंसानी इतिहास को लेकर बदली सोच इस रिसर्च ने पुरानी धारणाओं को चुनौती दी है। पहले माना जाता था कि पाषाण युग के लोग रास्ते में मिलने वाले पत्थरों का ही इस्तेमाल करते थे। लेकिन अब सबूत मिले हैं कि वे खास जगहों पर जाकर योजनाबद्ध तरीके से पत्थर निकालते थे और लंबे समय तक ऐसा करते रहे। यह रिसर्च प्रतिष्ठित जर्नल Nature Communications में प्रकाशित हुई है।
History AncientHumans SouthAfrica StoneAge Archaeology ScienceNews Research HumanEvolution Discovery TrendingNews NetGramNews