पश्चिम बंगाल में पहली बार बीजेपी की सरकार बनी और शुभेंदु अधिकारी ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। बीजेपी को 207 सीटें मिलीं, जबकि टीएमसी 80 सीटों पर सिमट गई। चुनाव नतीजों के बाद ममता बनर्जी ने धांधली के आरोप लगाए, वहीं राज्य में राजनीतिक तनाव और हिंसा भी देखने को मिली।
पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बड़ा और ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिला है। लंबे समय तक तृणमूल कांग्रेस (TMC) के शासन के बाद अब राज्य में पहली बार भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सरकार बन गई है। बीजेपी नेता शुभेंदु अधिकारी ने 9 मई 2026 को पश्चिम बंगाल के नए मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। उनके साथ दिलीप घोष, अग्निमित्रा पॉल, अशोक कीर्तनिया, खुदीराम टुडू और निशिथ प्रमाणिक ने भी मंत्री पद की शपथ ली। यह शपथ ग्रहण समारोह कोलकाता में आयोजित हुआ, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह समेत बीजेपी के कई बड़े नेता मौजूद रहे। शुभेंदु अधिकारी ने बांग्ला भाषा में शपथ लेकर नई सरकार की शुरुआत की।
बीजेपी की ऐतिहासिक जीत 4 मई 2026 को आए पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव परिणामों में बीजेपी ने 293 में से 207 सीटें जीतकर भारी बहुमत हासिल किया। यह पहली बार है जब पश्चिम बंगाल में बीजेपी अपने दम पर सत्ता तक पहुंची है। दूसरी ओर, ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस केवल 80 सीटों तक सिमट गई। ममता बनर्जी पिछले 15 वर्षों से राज्य की मुख्यमंत्री थीं, इसलिए यह चुनाव परिणाम राज्य की राजनीति में बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। बीजेपी नेताओं ने इस जीत को कार्यकर्ताओं के संघर्ष और लंबे राजनीतिक अभियान का परिणाम बताया, जबकि टीएमसी ने चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाए।
ममता बनर्जी ने लगाए चुनाव में गड़बड़ी के आरोप चुनाव नतीजों के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में काफी तनाव देखने को मिला। ममता banerjee ने बीजेपी पर “वोट लूट” और चुनाव में बेईमानी के आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि 100 से अधिक सीटों पर धांधली हुई है और चुनाव आयोग ने निष्पक्ष तरीके से काम नहीं किया। उन्होंने अपने पार्टी कार्यकर्ताओं से मतगणना केंद्रों पर डटे रहने की अपील भी की थी। बाद में कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी टीएमसी के आरोपों का समर्थन करते हुए बीजेपी पर “वोट चोरी” का आरोप लगाया। हालांकि बीजेपी ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया में विश्वास रखने वाले किसी भी दल को जनता के फैसले का सम्मान करना चाहिए।
इस्तीफे से इनकार और राजनीतिक विवाद चुनाव हारने के बाद ममता बनर्जी ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने से इंकार कर दिया था। उनका कहना था कि चुनाव निष्पक्ष नहीं हुए हैं, इसलिए वे हार स्वीकार नहीं करतीं। इसके बाद राज्य में संवैधानिक और राजनीतिक विवाद और बढ़ गया। बीजेपी नेताओं ने ममता के बयान को “अलोकतांत्रिक” बताया। आखिरकार 7 मई 2026 को पश्चिम बंगाल के राज्यपाल आर.
एन. रवि ने विधानसभा भंग करने का आदेश जारी किया। इसके बाद राज्य में नई सरकार बनने का रास्ता साफ हो गया।
शुभेंदु अधिकारी कैसे बने मुख्यमंत्री? 8 मई को बीजेपी विधायक दल की बैठक कोलकाता में आयोजित की गई। इस बैठक में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और अन्य पर्यवेक्षकों की मौजूदगी में शुभेंदु अधिकारी को विधायक दल का नेता चुना गया। अमित शाह ने घोषणा करते हुए कहा कि सभी विधायकों ने एकमत से शुभेंदु अधिकारी के नाम का समर्थन किया और किसी दूसरे नाम का प्रस्ताव नहीं आया। इसके बाद शुभेंदु अधिकारी ने राज्यपाल से मिलकर सरकार बनाने का दावा पेश किया।
शुभेंदु अधिकारी का राजनीतिक सफर शुभेंदु अधिकारी कभी ममता बनर्जी के करीबी नेताओं में गिने जाते थे। उन्होंने लंबे समय तक टीएमसी में रहकर राजनीति की, लेकिन बाद में बीजेपी में शामिल हो गए। 2026 के चुनाव में उन्होंने भवानीपुर सीट से ममता बनर्जी को हराकर बड़ा राजनीतिक संदेश दिया। उनकी जीत को बीजेपी के लिए प्रतीकात्मक और रणनीतिक दोनों रूपों में बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
हिंसा और तनाव के बीच सत्ता परिवर्तन चुनाव परिणामों के बाद पश्चिम बंगाल के कई इलाकों में राजनीतिक हिंसा की खबरें भी सामने आईं। टीएमसी और बीजेपी दोनों ने एक-दूसरे पर हमलों और तोड़फोड़ के आरोप लगाए। इसी बीच शुभेंदु अधिकारी के निजी सहायक चंद्रनाथ रथ की गोली मारकर हत्या कर दी गई। बीजेपी ने इसे राजनीतिक साजिश बताया, जबकि टीएमसी ने घटना की निंदा करते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
नई सरकार के सामने बड़ी चुनौतियां बीजेपी की नई सरकार के सामने अब कई बड़ी चुनौतियां हैं। राज्य में राजनीतिक तनाव कम करना, कानून-व्यवस्था संभालना, रोजगार, उद्योग और विकास के मुद्दों पर काम करना सरकार की प्राथमिकता होगी। इसके अलावा बीजेपी के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह भी होगी कि वह बंगाल में अपनी राजनीतिक पकड़ को लंबे समय तक कैसे मजबूत बनाए रखे।
जनता के लिए इसका क्या मतलब? पश्चिम बंगाल के लिए यह केवल सरकार बदलने की घटना नहीं, बल्कि राज्य की राजनीति के नए दौर की शुरुआत मानी जा रही है। जहां बीजेपी इसे “परिवर्तन” और “नई शुरुआत” बता रही है, वहीं टीएमसी इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर सवाल उठाने वाला चुनाव मान रही है। आने वाले महीनों में यह साफ होगा कि नई सरकार जनता की उम्मीदों पर कितना खरा उतर पाती है और पश्चिम बंगाल की राजनीति किस दिशा में आगे बढ़ती है।
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