नई रिपोर्ट के मुताबिक AI मॉडल अब इतने एडवांस हो गए हैं कि वे बिना इंसानी मदद के जटिल साइबर हमले करने की क्षमता रखते हैं, और यह ताकत हर कुछ महीनों में तेजी से बढ़ रही है। टेस्ट में कुछ AI मॉडल्स ने हैकिंग जैसे मल्टी-स्टेप टास्क भी सफलतापूर्वक पूरे किए, जिससे साइबर सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले समय में AI आधारित साइबर खतरे और ज्यादा खतरनाक हो सकते हैं, इसलिए डिजिटल सुरक्षा पहले से कहीं ज्यादा जरूरी हो गई है।
एक नई रिपोर्ट “State of AI: May 2026” और यूरोपियन AI सिक्योरिटी संस्थान की स्टडी में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) मॉडल इतने एडवांस हो चुके हैं कि वे बिना इंसानी मदद के जटिल कॉर्पोरेट नेटवर्क पर साइबर हमले जैसी गतिविधियाँ कर सकते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, यह क्षमता हर 4 महीने में लगभग दोगुनी हो रही है।
UK के AI Security Institute द्वारा किए गए टेस्ट में Anthropic के Mythos मॉडल ने “The Last Ones” नाम के 32-स्टेप वाले साइबर अटैक सिमुलेशन को कई बार सफलतापूर्वक पूरा किया। इस टेस्ट में मॉडल को रिकॉनिसेंस से लेकर डोमेन टेकओवर तक की पूरी हैकिंग प्रक्रिया से गुजरना था।
Mythos ने 10 में से 3 ट्रायल में पूरा एंड-टू-एंड टास्क सॉल्व किया और लगभग 73% एक्सपर्ट-लेवल सफलता दर हासिल की। कुछ हफ्तों बाद OpenAI के GPT-5.5 मॉडल ने भी लगभग इसी स्तर का प्रदर्शन दिखाया, जिसमें 10 में से 2 ट्रायल सफल रहे और 71.4% सफलता दर दर्ज हुई।
विशेषज्ञों के अनुसार, ये टेस्ट बिना किसी डिफेंस सिस्टम के किए गए थे, इसलिए असली दुनिया में परिणाम अलग हो सकते हैं, लेकिन संकेत साफ हैं कि AI अब जटिल साइबर अटैक प्लान और एक्सीक्यूट करने की क्षमता तेजी से सीख रहा है।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि चीन की AI कंपनियां जैसे Z.ai, MiniMax, Moonshot और DeepSeek ने कोडिंग और एजेंटिक AI मॉडल्स में बड़ी प्रगति की है। इनके मॉडल्स ने SWE-Bench Pro जैसे टेस्ट में 56–59 तक के स्कोर हासिल किए हैं।
इन मॉडलों की खास बात यह है कि इन्हें ओपन-वेट्स के साथ जारी किया गया है, जिससे डेवलपर्स इन्हें अपने प्रोजेक्ट्स में आसानी से इस्तेमाल कर सकते हैं। साथ ही इनकी लागत भी पश्चिमी मॉडलों की तुलना में लगभग एक-तिहाई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अब AI विकास सिर्फ तकनीकी प्रतिस्पर्धा नहीं रहा, बल्कि यह एक “AI आर्म्स रेस” बनता जा रहा है। अमेरिका ने हाल ही में कई बड़ी टेक कंपनियों के साथ AI को सैन्य उपयोग में लाने के समझौते किए हैं, जिससे सुरक्षा चिंताएं और बढ़ गई हैं।
अगर यही रफ्तार रही तो भविष्य में AI आधारित साइबर हमले और भी खतरनाक हो सकते हैं, जहां सिस्टम इंसानों की तरह ईमेल लिखकर फिशिंग, डेटा चोरी और नेटवर्क हैकिंग जैसी गतिविधियाँ कर सकते हैं।
रिपोर्ट में यह भी चेतावनी दी गई है कि अब पुराने तरह के वायरस और साधारण हैकिंग हमले कम होते जाएंगे। उनकी जगह AI आधारित स्मार्ट हमले आ सकते हैं, जो किसी कंपनी के कर्मचारी की भाषा, व्यवहार और स्टाइल तक की नकल कर सकते हैं। ऐसे में मजबूत पासवर्ड, मल्टी-फैक्टर ऑथेंटिकेशन और संदिग्ध लिंक से दूरी पहले से ज्यादा जरूरी हो गई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले समय में साइबर सुरक्षा हर व्यक्ति के लिए उतनी ही जरूरी होगी जितनी इंटरनेट का इस्तेमाल।
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