अफ़्रीका में मलेरिया के खिलाफ़ चल रही वैक्सीनेशन मुहिम अब उम्मीद की नई कहानी बनती दिख रही है। RTS,S और R21 जैसी वैक्सीन के इस्तेमाल से कई देशों में बच्चों में गंभीर मलेरिया के मामलों और मौतों में तेज़ गिरावट दर्ज की गई है।
अफ़्रीका लंबे समय से मलेरिया की सबसे बड़ी मार झेलता आया है। हर साल लाखों लोग इस बीमारी से प्रभावित होते हैं और सबसे ज़्यादा खतरा छोटे बच्चों पर रहता है। लेकिन अब इसी महाद्वीप से एक ऐसी पॉज़िटिव खबर सामने आ रही है, जिसने दुनिया भर के स्वास्थ्य विशेषज्ञों और परिवारों के बीच उम्मीद जगा दी है। मलेरिया वैक्सीन के बड़े स्तर पर इस्तेमाल के बाद कई अफ़्रीकी देशों में बीमारी के गंभीर मामलों और मौतों में साफ़ कमी देखी जा रही है।
पिछले दो वर्षों में RTS,S और R21 नाम की मलेरिया वैक्सीन को अफ़्रीका के 25 देशों के नियमित टीकाकरण कार्यक्रम में शामिल किया गया है। यह पहली बार है जब मलेरिया जैसी पुरानी और जानलेवा बीमारी के खिलाफ़ इतने बड़े स्तर पर वैक्सीनेशन अभियान चलाया गया है। स्वास्थ्य एजेंसियों का कहना है कि शुरुआती नतीजे उम्मीद से कहीं बेहतर दिखाई दे रहे हैं।
वैक्सीन एलायंस “गावी” के मुताबिक़, 2024 के बाद से अब तक 5 करोड़ से ज़्यादा वैक्सीन डोज़ बच्चों तक पहुँचाई जा चुकी हैं। यह केवल एक आंकड़ा नहीं, बल्कि उन लाखों परिवारों के लिए राहत की खबर है जो हर साल मलेरिया के डर के साथ जीते थे। कई देशों से मिले शुरुआती डेटा में दिखा है कि वैक्सीन लगने के बाद गंभीर संक्रमण और अस्पताल में भर्ती होने के मामलों में उल्लेखनीय गिरावट आई है।
बुर्किना फासो इसका बड़ा उदाहरण बनकर सामने आया है। वहां 2024 से 2025 के बीच मलेरिया मामलों में लगभग 32 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई, जबकि मौतों में करीब 44 प्रतिशत गिरावट आई। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव केवल वैक्सीन की वजह से नहीं, बल्कि वैक्सीनेशन के साथ मच्छरदानी, दवाओं और जागरूकता अभियानों के संयुक्त असर का नतीजा है। फिर भी वैक्सीन को इस पूरी लड़ाई का सबसे अहम हथियार माना जा रहा है।
कैमरून से भी इसी तरह की सकारात्मक रिपोर्ट सामने आई हैं। वहां दो साल तक लगातार बच्चों को वैक्सीन दिए जाने के बाद मलेरिया संक्रमण के मामलों में बड़ी कमी देखी गई। स्थानीय स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि जिन इलाकों में पहले हर मौसम में बच्चों की लंबी कतारें अस्पतालों में दिखाई देती थीं, वहां अब हालात पहले से काफी बेहतर हैं।
विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी WHO के ट्रायल डेटा के अनुसार, ये वैक्सीन पहले ही साल में मलेरिया के मामलों को 50 प्रतिशत से अधिक तक कम करने में सक्षम रही हैं। खास बात यह है कि अगर इन्हें मलेरिया के मौसम से पहले दिया जाए, तो इनका असर और भी बढ़ जाता है। यही वजह है कि अब कई देश वैक्सीनेशन को मौसमी रणनीति के साथ जोड़ने की तैयारी कर रहे हैं।
मलेरिया केवल एक बीमारी नहीं, बल्कि गरीबी और आर्थिक संकट को और गहरा करने वाली समस्या भी रही है। अफ़्रीका के कई गरीब परिवारों को इलाज, दवाइयों और अस्पताल के खर्च के लिए अपनी कमाई का बड़ा हिस्सा खर्च करना पड़ता है। कई बार माता-पिता को बच्चों की देखभाल के लिए काम छोड़ना पड़ता है, जिससे परिवार की आय पर भी असर पड़ता है। ऐसे में अगर वैक्सीन के जरिए बीमारी को शुरुआत में ही रोका जा सके, तो यह लाखों परिवारों को आर्थिक राहत भी दे सकती है।
विशेषज्ञ बताते हैं कि मलेरिया दुनिया की सबसे खतरनाक बीमारियों में से एक है और हर मिनट एक बच्चे की जान ले सकता है। यही कारण है कि इस वैक्सीन अभियान को केवल स्वास्थ्य कार्यक्रम नहीं, बल्कि मानवता के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। कई स्वास्थ्य विशेषज्ञ इसे वैसा ही ऐतिहासिक कदम बता रहे हैं जैसा कभी पोलियो या चेचक के खिलाफ़ बड़े टीकाकरण अभियानों को माना गया था।
इस सफलता के पीछे विज्ञान, राजनीतिक इच्छाशक्ति और अंतरराष्ट्रीय सहयोग की बड़ी भूमिका रही है। लंबे समय तक मलेरिया वैक्सीन को विकसित करना वैज्ञानिकों के लिए चुनौती बना रहा, क्योंकि यह वायरस या बैक्टीरिया की तरह आसान लक्ष्य नहीं था। लेकिन वर्षों की रिसर्च और निवेश के बाद अब दुनिया के पास असरदार वैक्सीन मौजूद हैं। इसके बाद अफ़्रीकी सरकारों, WHO, गावी और कई अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने मिलकर इसे ज़मीन तक पहुँचाने का काम तेज़ किया।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यही रफ्तार बनी रही, तो आने वाले वर्षों में लाखों बच्चों की जान बचाई जा सकती है। अनुमान है कि 2030 तक करीब 1 लाख 80 हजार बच्चों को मौत से बचाया जा सकता है। यह आंकड़ा बताता है कि सही दिशा में उठाए गए कदम कितनी बड़ी आबादी की जिंदगी बदल सकते हैं।
अफ़्रीका से सामने आई यह खबर दुनिया के लिए एक मजबूत संदेश भी है। यह दिखाती है कि जब विज्ञान, सरकारें और वैश्विक संस्थाएं एक साथ काम करती हैं, तो बड़ी से बड़ी स्वास्थ्य चुनौती का मुकाबला किया जा सकता है। मलेरिया के खिलाफ़ यह लड़ाई अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है, लेकिन वैक्सीन ने यह साबित कर दिया है कि उम्मीद अब पहले से कहीं ज़्यादा मजबूत हो चुकी है।
Malaria Vaccine Africa WHO HealthNews MedicalScience GlobalHealth RTSS R21 Healthcare ScienceNews PositiveNews NetGramNews
Disclaimer
Disclaimer:
Images are for illustrative purposes only and some editing of images done by using AI.
Published by: Gulam Rasool. For newsroom standards, byline transparency, and correction requests, review our editorial standards and corrections policy.
Need to contact the newsroom directly? Email netgramnews@gmail.com or visit the team page.