UK के AI Security Institute (AISI) की नई रिपोर्ट ने साइबर दुनिया में बड़ा अलार्म बजा दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक Anthropic के Claude Mythos Preview और OpenAI के GPT–5.5 जैसे AI मॉडल अब ऐसे जटिल साइबर–ऑफेंस ऑपरेशन पूरा करने लगे हैं, जिन्हें पहले सिर्फ़ एक्सपर्ट हैकर्स ही अंजाम दे पाते थे।
दुनिया अब उस मोड़ पर पहुँचती दिखाई दे रही है जहाँ Artificial Intelligence यानी AI सिर्फ़ इंसानों की मदद करने वाला टूल नहीं रह गया है, बल्कि यह धीरे–धीरे डिजिटल युद्ध का नया हथियार बनता जा रहा है। UK के AI Security Institute (AISI) और Air Street Press की “State of AI: May 2026” रिपोर्ट ने ऐसे आंकड़े सामने रखे हैं, जिन्होंने साइबर–सिक्योरिटी इंडस्ट्री की चिंताएँ काफी बढ़ा दी हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक अब एडवांस AI मॉडल्स केवल छोटे–मोटे साइबर टास्क नहीं कर रहे, बल्कि पूरे साइबर–ऑफेंस ऑपरेशन को समझने और उसे अंजाम देने की क्षमता हासिल करते दिखाई दे रहे हैं। विशेषज्ञ इसे साइबर सुरक्षा की दुनिया में एक बड़े बदलाव की शुरुआत मान रहे हैं।
AI ने पूरे साइबर अटैक सिमुलेशन को किया पूरा रिपोर्ट के अनुसार Anthropic के एडवांस AI मॉडल “Claude Mythos Preview” ने “The Last Ones” (TLO) नाम के हाई–लेवल साइबर–ऑफेंस सिमुलेशन को कई रन में सफलतापूर्वक पूरा किया।
यह कोई साधारण टेस्ट नहीं था। इसमें कॉर्पोरेट नेटवर्क पर आधारित 32–स्टेप अटैक–चेन शामिल थी। इस प्रक्रिया में: नेटवर्क में घुसपैठ सिस्टम मैपिंग लैटरल मूवमेंट एक्सेस एक्सपैंशन और आखिर में डोमेन–लेवल कंट्रोल हासिल करना शामिल था। आमतौर पर ऐसे मिशन को पूरा करने में अनुभवी रेड–टीम एक्सपर्ट्स को करीब 20 घंटे तक मेहनत करनी पड़ती है। लेकिन Claude Mythos Preview ने यह काम एक ऑटोमेटेड एजेंट की तरह किया और 10 में से 3 रन में पूरी सफलता हासिल कर ली।
इसके कुछ ही समय बाद OpenAI के GPT–5. 5 ने भी लगभग समान क्षमता दिखाई। रिपोर्ट के मुताबिक GPT–5.
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5 ने 10 में से 2 रन पूरे किए और एक्सपर्ट–लेवल साइबर टास्क्स में करीब 71 से 73 प्रतिशत तक सफलता दर दर्ज की। साइबर दुनिया की पुरानी सोच बदल रही अब तक साइबर–सिक्योरिटी दुनिया में यह धारणा थी कि AI केवल सीमित स्तर तक मदद कर सकता है। माना जाता था कि AI: फ़िशिंग ईमेल लिख सकता है पासवर्ड गेसिंग में मदद कर सकता है डेटा स्क्रैपिंग जैसे छोटे टास्क कर सकता है लेकिन पूरा साइबर–ऑपरेशन — यानी शुरुआती रीकॉन से लेकर नेटवर्क टेकओवर तक — अभी भी इंसानी हैकरों की विशेषज्ञता पर निर्भर माना जाता था।
AISI की यह रिपोर्ट पहली बार यह संकेत देती है कि आधुनिक फ्रंटियर AI मॉडल अब एंड–टू–एंड साइबर–ऑफेंस चेन को समझने और उसे निष्पादित करने की क्षमता हासिल कर रहे हैं। टेस्टिंग में नहीं थे लाइव सिक्योरिटी सिस्टम हालांकि रिपोर्ट में यह भी साफ़ किया गया है कि ये सभी टेस्ट “डिफेंस–फ्री एनवायरनमेंट” में किए गए थे। इसका मतलब है कि टेस्टिंग के दौरान: कोई एक्टिव फायरवॉल नहीं था कोई सिक्योरिटी टीम मौजूद नहीं थी कोई थ्रेट–हंटर या लाइव डिफेंस सिस्टम नहीं था इसलिए इन नतीजों को सीधे वास्तविक दुनिया के साइबर–अटैक से जोड़कर नहीं देखा जा सकता। लेकिन विशेषज्ञों की असली चिंता किसी एक टेस्ट रिजल्ट को लेकर नहीं, बल्कि AI की बढ़ती गति को लेकर है।
हर चार महीने में दोगुनी हो रही क्षमता AISI का अनुमान है कि AI आधारित साइबर–ऑफेंस क्षमता अब हर चार महीने में लगभग दोगुनी हो रही है। दिलचस्प बात यह है कि 2025 के अंत तक यही अनुमान सात महीने का था। यानी AI की साइबर क्षमता पहले की तुलना में कहीं ज्यादा तेज़ी से विकसित हो रही है।
Air Street Press की रिपोर्ट के मुताबिक: Claude Mythos Preview ने लगभग 73 प्रतिशत एक्सपर्ट–लेवल सफलता हासिल की GPT–5. 5 करीब 71.
4 प्रतिशत तक पहुँचा दोनों मॉडल्स ने कई मौकों पर पूरा डोमेन–टेकओवर भी हासिल किया साइबर–सिक्योरिटी की भाषा में इसका मतलब केवल सिस्टम में घुसना नहीं होता। इसका अर्थ यह है कि AI मॉडल: नेटवर्क के अंदर रास्ते खोज सकता है दूसरे सिस्टम्स तक पहुँच सकता है यूज़र परमिशन बढ़ा सकता है और पूरे डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर पर कंट्रोल हासिल कर सकता है।
Continue Reading6 मई 2026
छोटे बिज़नेस पर सबसे बड़ा खतरा विशेषज्ञों का मानना है कि इसका असर सिर्फ़ बड़ी टेक कंपनियों तक सीमित नहीं रहेगा। सबसे ज्यादा खतरा छोटे और मिड–साइज़ बिज़नेस पर बढ़ सकता है, जिनके पास मजबूत साइबर–सिक्योरिटी इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं है।
कल्पना कीजिए किसी ऐसी कंपनी की जहाँ केवल एक–दो IT कर्मचारी हों और कोई डेडिकेटेड साइबर–सिक्योरिटी टीम न हो। अगर भविष्य में AI–पावर्ड साइबर एजेंट्स आसानी से उपलब्ध होने लगे, तो ऐसे कारोबार हाई–लेवल डिजिटल हमलों के आसान निशाने बन सकते हैं।
भारत जैसे देशों में यह खतरा और बड़ा माना जा रहा है क्योंकि यहाँ लाखों MSMEs, स्टार्टअप्स और छोटे डिजिटल बिज़नेस तेजी से ऑनलाइन शिफ्ट हो रहे हैं। अभी तक ज्यादातर कंपनियाँ बेसिक एंटी–वायरस और सामान्य सिक्योरिटी सिस्टम पर निर्भर रहती हैं। लेकिन AI–ड्रिवन साइबर–ऑफेंस के दौर में यह मॉडल शायद पर्याप्त नहीं रहेगा।
अब बदलनी होगी साइबर सुरक्षा रणनीति विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले समय में कंपनियों को केवल सॉफ्टवेयर खरीदने से काम नहीं चलेगा। उन्हें: AI–अवेयर सिक्योरिटी ट्रेनिंग प्रॉएक्टिव मॉनिटरिंग थ्रेट–डिटेक्शन सिस्टम और ऑटोमेटेड डिफेंस प्लेटफॉर्म्स में निवेश बढ़ाना पड़ेगा।
साइबर सुरक्षा अब केवल “पासवर्ड और एंटी–वायरस” तक सीमित नहीं रहेगी। AI के दौर में सुरक्षा रणनीति भी AI आधारित बनानी होगी। AI खतरा भी, समाधान भी हालांकि तस्वीर पूरी तरह नकारात्मक नहीं है। यही AI मॉडल्स डिफेंसिव साइबर–सिक्योरिटी में भी बड़ी भूमिका निभा सकते हैं। AI आधारित: लॉग–एनालिसिस थ्रेट–हंटिंग ऑटोमेटेड रिस्पॉन्स सिस्टम्स और रियल–टाइम मॉनिटरिंग टूल्स भविष्य में साइबर हमलों को रोकने में बड़ी मदद कर सकते हैं।
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विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में “AI बनाम AI” की स्थिति देखने को मिल सकती है, जहाँ एक तरफ AI–ड्रिवन हमले होंगे और दूसरी तरफ AI–आधारित सुरक्षा सिस्टम उनका मुकाबला करेंगे। सरकारों और कंपनियों के लिए नई चुनौती AI–आधारित साइबर क्षमताओं ने सरकारों और टेक कंपनियों के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। अब केवल टेक्नोलॉजी बनाना ही काफी नहीं होगा, बल्कि उसके सुरक्षित उपयोग और नियंत्रण के लिए भी मजबूत नियम और नीतियाँ बनानी होंगी।
कई विशेषज्ञ यह भी कह रहे हैं कि आने वाले वर्षों में AI सुरक्षा, परमाणु सुरक्षा और जैविक सुरक्षा जैसी वैश्विक रणनीतिक बहसों का हिस्सा बन सकती है।
निष्कर्ष AI इंडस्ट्री अब ऐसे चरण में पहुँच चुकी है जहाँ इसकी क्षमता केवल मददगार टूल तक सीमित नहीं रही। आधुनिक AI मॉडल्स तेजी से जटिल साइबर–ऑपरेशन्स को समझने और निष्पादित करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। हालांकि अभी ये टेस्ट नियंत्रित वातावरण में किए गए हैं, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यह भविष्य की बड़ी तस्वीर का शुरुआती संकेत है। आने वाले वर्षों में साइबर सुरक्षा की दुनिया पूरी तरह बदल सकती है।
एक तरफ AI डिजिटल हमलों को पहले से ज्यादा शक्तिशाली बना सकता है, वहीं दूसरी तरफ यही तकनीक साइबर सुरक्षा को भी मजबूत करने में अहम भूमिका निभा सकती है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि दुनिया इस नई तकनीकी ताकत को किस दिशा में लेकर जाती है।
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7 मई 2026