भारत के कई शहरों में अब रात का तापमान भी लगातार बढ़ रहा है, जिससे लोगों को गर्मी से राहत नहीं मिल पा रही। नई स्टडी के मुताबिक यह “नाइट–टाइम हीटवेव” हार्ट, किडनी और सांस की बीमारियों का बड़ा कारण बन सकती है, खासकर उन इलाकों में जहां कूलिंग और बिजली की सुविधा सीमित है।
भारत में गर्मी का असर अब सिर्फ़ दिन तक सीमित नहीं रह गया है। एक नई स्टडी ने चेतावनी दी है कि देश के कई बड़े और मध्यम शहरों में रात के समय तापमान तेजी से बढ़ रहा है और यह ट्रेंड सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए एक “साइलेंट हेल्थ रिस्क” बनता जा रहा है।
रिसर्च में कहा गया है कि जब रात में भी तापमान सामान्य से ज्यादा बना रहता है, तो शरीर को दिनभर की गर्मी से उबरने का समय नहीं मिलता। इसका सीधा असर दिल, किडनी, सांस और मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ सकता है।
The Indian Practitioner में प्रकाशित इस स्टडी और अंतरराष्ट्रीय जलवायु–स्वास्थ्य रिपोर्टिंग के आधार पर सामने आई जानकारी बताती है कि भारत के शहरी इलाकों में “नाइट–टाइम हीटवेव” अब नई चुनौती बन रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह खतरा खासकर उन परिवारों के लिए ज्यादा गंभीर है, जहां एसी या बेहतर कूलिंग सिस्टम उपलब्ध नहीं हैं और बिजली कटौती आम बात है।
स्टडी में बताया गया है कि पिछले कुछ वर्षों में कई शहरों के औसत रात के तापमान में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की गई है। दिन में तेज धूप के बाद जब रात में भी तापमान ऊंचा बना रहता है, तो शरीर लगातार हीट स्ट्रेस में रहता है। इससे डीहाइड्रेशन, ब्लड प्रेशर में उतार–चढ़ाव, थकान, बेचैनी और नींद की समस्या तेजी से बढ़ सकती है। लंबे समय तक ऐसा माहौल रहने पर हीट–स्ट्रोक और हार्ट अटैक का खतरा भी बढ़ जाता है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, शहरों में बढ़ता “अर्बन हीट–आइलैंड इफेक्ट” इस समस्या की बड़ी वजह है। कंक्रीट की इमारतें, डामर की सड़कें, भारी ट्रैफिक और कम होते पेड़–पौधे दिनभर गर्मी को सोख लेते हैं और रात में धीरे–धीरे उसे छोड़ते रहते हैं। इसका असर यह होता है कि शहरों का तापमान आसपास के ग्रामीण इलाकों की तुलना में रात में भी ज्यादा बना रहता है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि बुज़ुर्ग, छोटे बच्चे, गर्भवती महिलाएं और पहले से बीमार लोग इस बढ़ती रात की गर्मी से सबसे ज्यादा प्रभावित हो सकते हैं। जिन लोगों को पहले से हार्ट डिजीज, अस्थमा, हाई ब्लड प्रेशर या किडनी की समस्या है, उनके लिए गर्म रातें जानलेवा साबित हो सकती हैं। डॉक्टरों का कहना है कि लगातार गर्म माहौल में शरीर का तापमान नियंत्रित करना मुश्किल हो जाता है, जिससे कई अंगों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है।
राजस्थान, दिल्ली, गुजरात, महाराष्ट्र और उत्तर भारत के कई हिस्सों में इस साल गर्मी के बदलते पैटर्न ने चिंता और बढ़ा दी है। कई इलाकों में दिन का तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के आसपास पहुंच चुका है, जबकि रात में भी पर्याप्त ठंडक नहीं मिल रही। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण मौसम पहले से ज्यादा अनिश्चित हो गया है। कहीं तेज आंधी और हल्की बारिश हो रही है, तो कहीं गर्म हवाओं का दौर लगातार जारी है।
ऊर्जा और स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ती रात की गर्मी सिर्फ़ मौसम का मुद्दा नहीं, बल्कि एक सामाजिक और आर्थिक चुनौती भी है। गरीब और लो–इनकम परिवारों के लिए यह समस्या ज्यादा गंभीर है क्योंकि उनके पास बेहतर वेंटिलेशन, इंसुलेटेड घर या एयर–कूलिंग जैसी सुविधाएं नहीं होतीं। कई शहरी बस्तियों में छोटे कमरे, टिन की छतें और लगातार बिजली कटौती गर्मी को और खतरनाक बना देती हैं।
स्टडी में सुझाव दिया गया है कि अब हीट–एक्शन प्लान को सिर्फ़ दिन के समय तक सीमित नहीं रखा जा सकता। विशेषज्ञ चाहते हैं कि सरकारें और स्थानीय प्रशासन “नाइट–टाइम हीट मैनेजमेंट” पर भी फोकस करें। इसमें रात में कम्युनिटी कूलिंग सेंटर खोलना, हेल्थ अलर्ट जारी करना, अस्पतालों को तैयार रखना और बिजली सप्लाई को स्थिर बनाए रखना शामिल हो सकता है।
कुछ विशेषज्ञों ने यह भी कहा है कि शहरों में ग्रीन–कवर बढ़ाना, छतों पर कूल रूफ टेक्नोलॉजी अपनाना और बेहतर शहरी प्लानिंग भविष्य में इस खतरे को कम कर सकती है। पेड़ लगाने और खुले इलाकों को बचाने जैसी पहलें रात के तापमान को कम करने में मदद कर सकती हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत में अब जलवायु और स्वास्थ्य के बीच के संबंधों पर ज्यादा गंभीरता से चर्चा होने लगी है। भारतीय न्यूज़रूम्स और रिसर्च संस्थान इस विषय पर लगातार रिपोर्टिंग और अध्ययन कर रहे हैं ताकि लोगों को समय रहते चेतावनी दी जा सके। विशेषज्ञ मानते हैं कि आने वाले वर्षों में हीटवेव सिर्फ़ दिन की समस्या नहीं रहेगी, बल्कि रात की गर्मी भी एक बड़ा स्वास्थ्य संकट बन सकती है।
आम लोगों के लिए डॉक्टरों और विशेषज्ञों ने कुछ जरूरी सलाह भी दी है। रात में पर्याप्त पानी पीना, कमरे में हवा आने–जाने की व्यवस्था रखना, भारी भोजन से बचना और जरूरत पड़ने पर मेडिकल सलाह लेना जरूरी बताया गया है। बुज़ुर्गों और बच्चों को गर्म कमरों में लंबे समय तक नहीं रहने देना चाहिए।
विशेषज्ञों का साफ कहना है कि अगर अभी से तैयारी नहीं की गई, तो बढ़ती रात की गर्मी आने वाले समय में भारत के शहरों के लिए बड़ा हेल्थ इमरजेंसी मुद्दा बन सकती है। जलवायु परिवर्तन के इस नए खतरे से निपटने के लिए सरकार, स्वास्थ्य विभाग और आम नागरिकों को मिलकर काम करना होगा।
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