Apple जल्द अपने iPhone और Mac इकोसिस्टम में थर्ड–पार्टी AI मॉडल्स को जगह दे सकता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यूज़र्स पहली बार यह तय कर पाएंगे कि Siri और दूसरे AI फीचर्स के पीछे कौन सा AI मॉडल काम करेगा।
टेक दुनिया में AI को लेकर प्रतिस्पर्धा लगातार तेज़ होती जा रही है और अब Apple भी इस रेस में बड़ा दांव खेलने की तैयारी करता दिख रहा है। ब्लूमबर्ग टेक और CNBC की रिपोर्ट्स के अनुसार, Apple अपने iPhone, iPad और Mac डिवाइसेज़ में थर्ड–पार्टी AI मॉडल्स को इंटीग्रेट करने पर काम कर रहा है। अगर यह योजना लागू होती है, तो पहली बार Apple यूज़र्स को यह चुनने की आज़ादी मिल सकती है कि वे अपने डिवाइस पर किस AI मॉडल का इस्तेमाल करना चाहते हैं।
रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि Apple अपने आने वाले iOS और macOS अपडेट्स में ऐसे सिस्टम तैयार कर रहा है, जिनके जरिए Siri और दूसरे सिस्टम–लेवल AI फीचर्स के पीछे काम करने वाला मॉडल यूज़र खुद चुन सकेगा। यानी भविष्य में iPhone सिर्फ Apple के अपने AI तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि अलग–अलग कंपनियों के AI मॉडल्स भी उसी प्लेटफॉर्म पर काम कर सकते हैं।
अब तक Apple की पहचान एक “क्लोज़्ड इकोसिस्टम” कंपनी के तौर पर रही है। कंपनी अपने हार्डवेयर, सॉफ़्टवेयर और सर्विसेज़ को पूरी तरह कंट्रोल में रखती है। यही वजह है कि Apple डिवाइसेज़ को सुरक्षित और प्राइवेसी–फ्रेंडली माना जाता है। लेकिन AI की तेज़ रफ्तार दुनिया में अब कंपनी अपना पुराना मॉडल बदलती हुई दिखाई दे रही है।
पिछले कुछ सालों में Google, OpenAI और Microsoft जैसी कंपनियों ने AI सेक्टर में तेजी से विस्तार किया है। ChatGPT, Gemini और Copilot जैसे AI टूल्स आम यूज़र्स के बीच बेहद लोकप्रिय हुए। इसके मुकाबले Apple अपेक्षाकृत शांत दिखाई दिया। कंपनी ने Siri और ऑन–डिवाइस मशीन लर्निंग को जरूर आगे बढ़ाया, लेकिन उसने बड़े स्तर पर जनरेटिव AI चैटबॉट लॉन्च नहीं किया। इसी वजह से टेक इंडस्ट्री में लगातार यह चर्चा चल रही थी कि Apple AI की दौड़ में पीछे रह गया है।
Continue Reading6 मई 2026
अब सामने आ रही नई रिपोर्ट्स इस धारणा को बदल सकती हैं। ब्लूमबर्ग के टेक रिपोर्टर मार्क गुरमन के मुताबिक, Apple चुनिंदा AI पार्टनर्स के साथ गहरे स्तर का इंटीग्रेशन करने की योजना बना रहा है। इसका मतलब यह हो सकता है कि यूज़र अलग–अलग कामों के लिए अलग AI मॉडल चुन सकें। उदाहरण के लिए, कोई यूज़र लेख लिखने के लिए एक मॉडल इस्तेमाल करे, जबकि कोडिंग, इमेज एडिटिंग या प्रोडक्टिविटी टास्क के लिए दूसरा मॉडल चुन सके।
यह बदलाव सिर्फ फीचर अपडेट नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे पूरे टेक इंडस्ट्री के लिए “प्लेटफॉर्म शिफ्ट” की तरह देखा जा रहा है। अब तक Apple अपने प्लेटफॉर्म पर बाहरी टेक्नोलॉजी को सीमित तरीके से ही जगह देता था। लेकिन अगर AI मॉडल्स के लिए प्लेटफॉर्म खोला जाता है, तो iPhone और Mac एक “AI हब” की तरह काम कर सकते हैं, जहां कई कंपनियों की AI सर्विसेज़ एक साथ मौजूद होंगी।
CNBC की रिपोर्ट बताती है कि Apple ने हाल के तिमाहियों में रिसर्च एंड डेवलपमेंट यानी R&D खर्च में काफी बढ़ोतरी की है। कंपनी का बड़ा निवेश अब AI–सपोर्टेड सिलिकॉन, ऑन–डिवाइस प्रोसेसिंग और क्लाउड–बेस्ड AI इंफ्रास्ट्रक्चर पर किया जा रहा है। इससे साफ संकेत मिलता है कि Apple सिर्फ हार्डवेयर कंपनी बने रहने के बजाय अब फुल–स्टैक AI प्लेयर बनना चाहता है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि Apple का सबसे बड़ा फोकस अभी भी प्राइवेसी रहेगा। कंपनी संभवतः ऐसे AI सिस्टम बनाएगी, जिनमें अधिकतर प्रोसेसिंग डिवाइस पर ही हो। यानी यूज़र का डेटा सीधे क्लाउड में भेजने के बजाय फोन या लैपटॉप के अंदर ही प्रोसेस किया जाएगा। यही Apple की सबसे बड़ी ताकत भी मानी जाती है, क्योंकि कंपनी लंबे समय से खुद को “प्राइवेसी–फर्स्ट” ब्रांड के रूप में पेश करती रही है।
Continue Reading5 मई 2026
हालांकि, थर्ड–पार्टी AI मॉडल्स को प्लेटफॉर्म में शामिल करना Apple के लिए आसान चुनौती नहीं होगी। इससे कंपनी के पुराने बिजनेस मॉडल पर असर पड़ सकता है। अभी तक Apple अपने “क्लोज़्ड गार्डन” सिस्टम से अच्छी कमाई करता रहा है, जहां ऐप्स और सर्विसेज़ पर उसका मजबूत नियंत्रण रहता है। लेकिन अगर बाहरी AI कंपनियों को गहरा एक्सेस मिलता है, तो सर्विसेज़ रेवेन्यू और कंट्रोल दोनों पर दबाव आ सकता है।
कुछ विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम डेवलपर्स और कंटेंट क्रिएटर्स के लिए बड़ा मौका बन सकता है। अगर AI मॉडल्स को सीधे Apple सिस्टम में जगह मिलती है, तो नए ऐप्स, AI टूल्स और स्मार्ट वर्कफ़्लो तेजी से विकसित हो सकते हैं। इससे Apple इकोसिस्टम पहले से कहीं ज्यादा ओपन और उपयोगी बन सकता है।
दूसरी तरफ, कुछ विशेषज्ञ प्राइवेसी और डेटा सिक्योरिटी को लेकर चिंता भी जता रहे हैं। अलग–अलग AI मॉडल्स के आने से डेटा शेयरिंग और परमिशन सिस्टम ज्यादा जटिल हो सकते हैं। यूज़र्स को यह समझना होगा कि कौन सा AI मॉडल उनका डेटा कैसे इस्तेमाल कर रहा है और कौन–सी जानकारी क्लाउड में जा रही है।
Continue Reading5 मई 2026
भारतीय यूज़र्स के लिए भी यह बदलाव बड़ा साबित हो सकता है। अगर Apple भारत में भी इस फीचर को रोलआउट करता है, तो iPhone और Mac इस्तेमाल करने वाले लोग अपनी जरूरत के हिसाब से AI मॉडल चुन पाएंगे। इससे पढ़ाई, ऑफिस वर्क, कंटेंट क्रिएशन, कोडिंग और डिजिटल बिजनेस करने के तरीके तेजी से बदल सकते हैं।
इसके साथ ही AI सब्सक्रिप्शन मॉडल भी बढ़ सकते हैं। संभव है कि भविष्य में कुछ AI फीचर्स मुफ्त मिलें, जबकि एडवांस मॉडल्स के लिए अलग भुगतान करना पड़े। ऐसे में यूज़र्स को सिर्फ फीचर्स ही नहीं, बल्कि डेटा प्राइवेसी, सब्सक्रिप्शन कीमत और AI सर्विस की विश्वसनीयता पर भी ध्यान देना होगा।
फिलहाल Apple ने आधिकारिक तौर पर इस योजना की पुष्टि नहीं की है, लेकिन लगातार सामने आ रही रिपोर्ट्स यह संकेत दे रही हैं कि कंपनी AI सेक्टर में बड़ा बदलाव लाने की तैयारी कर चुकी है। आने वाले महीनों में Apple के अगले सॉफ्टवेयर इवेंट्स पर पूरी दुनिया की नजर रहेगी, क्योंकि वहीं से यह साफ हो सकता है कि iPhone का भविष्य सिर्फ स्मार्टफोन तक सीमित रहेगा या वह एक ओपन AI प्लेटफॉर्म में बदलने जा रहा है।
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