भारत सरकार के Economic Survey 2025-26 में चेतावनी दी गई है कि भारत में बढ़ता जंक फूड, एनर्जी ड्रिंक्स और अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड लोगों की सेहत के लिए बड़ा खतरा बन रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक खराब खानपान की वजह से मोटापा, डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और दिल की बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं।
भारत सरकार के ताज़ा Economic Survey 2025-26 ने एक बेहद अहम चेतावनी दी है। सरकार ने साफ कहा है कि आने वाले वर्षों में देश की हेल्थ पॉलिसी का सबसे बड़ा फोकस लोगों की खाने की आदतों पर रहने वाला है। खासतौर पर एनर्जी ड्रिंक्स, अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड (UPF), ज्यादा चीनी-नमक वाले पैकेज्ड फूड और पोषण असंतुलन को देश के लिए बड़ा खतरा माना गया है।
सर्वे के मुताबिक भारत में मोटापा, डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और दिल की बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह बदलती लाइफस्टाइल और खराब खानपान को बताया गया है। आखिर सरकार क्यों चिंतित है? पिछले कुछ सालों में भारत में प्रोसेस्ड और पैकेज्ड फूड का बाजार बहुत तेजी से बढ़ा है। Economic Survey 2025-26 के अनुसार भारत दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते UPF मार्केट्स में शामिल हो चुका है। 2009 से 2023 के बीच अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड की बिक्री में 150% से ज्यादा की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
आज बच्चों से लेकर युवाओं तक की डाइट में शामिल हैं: एनर्जी ड्रिंक्स कोल्ड ड्रिंक्स इंस्टेंट नूडल्स पैकेट वाले स्नैक्स फ्रोजन फूड ज्यादा चीनी वाले सीरियल्स प्रोसेस्ड मीट इन चीजों में अक्सर जरूरत से ज्यादा नमक, चीनी, ट्रांस फैट और केमिकल एडिटिव्स पाए जाते हैं, जो शरीर पर लंबे समय में गंभीर असर डालते हैं।
Continue Reading6 मई 2026
मोटापा अब सिर्फ हेल्थ नहीं, इकोनॉमी का भी खतरा Economic Survey ने पहली बार मोटापे और खराब डाइट को सिर्फ स्वास्थ्य समस्या नहीं बल्कि आर्थिक खतरा भी बताया है। रिपोर्ट में कहा गया कि अगर यही स्थिति जारी रही तो आने वाले समय में: हेल्थकेयर खर्च बहुत बढ़ेगा काम करने वाली आबादी की उत्पादकता घटेगी सरकारी स्वास्थ्य बजट पर दबाव बढ़ेगा गरीब और मध्यम वर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे सर्वे में NFHS 2019-21 के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया गया कि भारत में 24% महिलाएं और 23% पुरुष ओवरवेट या मोटापे का शिकार हैं। बच्चों में भी मोटापा तेजी से बढ़ रहा है। एनर्जी ड्रिंक्स पर भी बढ़ सकती है सख्ती सरकार खासतौर पर एनर्जी ड्रिंक्स को लेकर सतर्क दिखाई दे रही है। इन ड्रिंक्स में हाई कैफीन और शुगर कंटेंट होने के कारण युवाओं और बच्चों की सेहत पर असर पड़ रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार एनर्जी ड्रिंक्स पीने से: हार्ट रेट बढ़ सकती है नींद खराब होती है तनाव और एंग्जायटी बढ़ सकती है डायबिटीज और मोटापे का खतरा बढ़ता है इसी वजह से आने वाले समय में इन प्रोडक्ट्स की विज्ञापन नीति, लेबलिंग और टैक्सेशन में बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
सरकार क्या कदम उठा सकती है? Economic Survey में कई संभावित सुझाव दिए गए हैं। इनमें शामिल हैं: 1. जंक फूड पर ज्यादा टैक्स सरकार सॉफ्ट ड्रिंक्स और अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड पर अतिरिक्त टैक्स लगा सकती है ताकि इनका इस्तेमाल कम हो। 2.
Continue Reading6 मई 2026
बच्चों को टारगेट करने वाले विज्ञापनों पर रोक रिपोर्ट में कहा गया कि कई कंपनियां अनहेल्दी फूड को “हेल्दी” बताकर बेच रही हैं। इस पर सख्त नियम आ सकते हैं। 3. फ्रंट पैक लेबलिंग पैकेट पर साफ लिखा जा सकता है कि किसी प्रोडक्ट में कितना नमक, चीनी और फैट है। 4.
स्कूल और कॉलेज कैंपेन बच्चों और युवाओं में हेल्दी ईटिंग की आदत बढ़ाने के लिए बड़े स्तर पर जागरूकता अभियान चलाए जा सकते हैं। 5.
पारंपरिक भारतीय भोजन को बढ़ावा सरकार मिलेट्स, दाल, ताजा भोजन और घर के खाने को बढ़ावा देने की दिशा में भी काम कर सकती है। पोषण असंतुलन भी बड़ी चुनौती सर्वे में यह भी बताया गया कि देश में सिर्फ मोटापा ही नहीं बल्कि “डबल न्यूट्रिशन प्रॉब्लम” है। यानी एक तरफ कुछ लोग ज्यादा कैलोरी वाला खराब खाना खा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ कई लोगों को जरूरी पोषण नहीं मिल पा रहा।
Continue Reading7 मई 2026
यानी भारत को अब दो मोर्चों पर लड़ना पड़ रहा है: कुपोषण ओवरन्यूट्रिशन (मोटापा और लाइफस्टाइल बीमारियां) आने वाले समय की तस्वीर विशेषज्ञ मानते हैं कि आने वाले वर्षों में भारत की हेल्थ पॉलिसी “इलाज” से ज्यादा “प्रिवेंशन” यानी बीमारी रोकने पर फोकस करेगी। इसका मतलब है कि सरकार लोगों की खाने की आदतों, फिटनेस और लाइफस्टाइल पर ज्यादा ध्यान देगी। संभव है कि भविष्य में: जंक फूड के विज्ञापन सीमित हों स्कूल कैंटीन नियम बदलें हेल्दी फूड को बढ़ावा मिले पैकेज्ड फूड कंपनियों पर सख्ती बढ़े
निष्कर्ष Economic Survey 2025-26 ने साफ संदेश दिया है कि भारत अब सिर्फ आर्थिक विकास की नहीं बल्कि “हेल्दी इंडिया” की दिशा में भी तेजी से कदम बढ़ाना चाहता है। अगर समय रहते खाने की आदतों में सुधार नहीं हुआ, तो आने वाले वर्षों में मोटापा और लाइफस्टाइल बीमारियां देश की अर्थव्यवस्था पर बड़ा बोझ बन सकती हैं। सरकार की नई हेल्थ रणनीति यही संकेत दे रही है कि अब “क्या खा रहे हैं” यह सवाल सिर्फ व्यक्तिगत पसंद नहीं बल्कि राष्ट्रीय चिंता का विषय बन चुका है
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7 मई 2026