NASA के James Webb Space Telescope ने LHS 3844 b नाम का एक दूर स्थित एक्सोप्लैनेट खोजा है, जो पृथ्वी से लगभग 48.5 प्रकाश वर्ष दूर है। यह ग्रह पृथ्वी से 30% बड़ा है, लेकिन बेहद गर्म और बंजर है। यहां का तापमान करीब 725°C तक पहुंच जाता है और इसका एक हिस्सा हमेशा अपने तारे की ओर रहता है, इसलिए यहां दिन-रात का संतुलन नहीं है। वैज्ञानिकों के अनुसार इस ग्रह पर कोई वातावरण, पानी या जीवन के संकेत नहीं हैं, और इसकी सतह बुध और चंद्रमा जैसी चट्टानी और सूखी है।
NASA के James Webb Space Telescope (JWST) ने एक बेहद दूर स्थित एक्सोप्लैनेट का अध्ययन करके ऐसा खुलासा किया है जिसने वैज्ञानिकों को भी चौंका दिया है। यह ग्रह पृथ्वी जैसा नहीं, बल्कि बुध (Mercury) और चंद्रमा (Moon) जैसा बंजर और तपता हुआ पथरीला संसार है।
🌍 कौन सा है यह ग्रह? इस एक्सोप्लैनेट का नाम है LHS 3844 b। यह पृथ्वी से लगभग 30% बड़ा है पृथ्वी से करीब 48.5 प्रकाश वर्ष दूर स्थित है यह एक रेड ड्वार्फ (ठंडे छोटे तारे) के चारों ओर घूमता है इसका एक पूरा चक्कर सिर्फ 11 घंटे में पूरा हो जाता है 👉 यानी यह अपने तारे के बेहद करीब है।
🔥 कितना खतरनाक है यह ग्रह? यह ग्रह अपने तारे के इतने पास है कि: यह tidally locked है (एक ही हिस्सा हमेशा तारे की तरफ रहता है) एक तरफ हमेशा दिन और दूसरी तरफ हमेशा रात रहती है दिन वाले हिस्से का तापमान लगभग 725°C (1340°F) तक पहुंच जाता है 👉 वैज्ञानिकों के मुताबिक, यह एक ऐसा ग्रह है जहां “रात कभी नहीं होती” (एक तरफ के हिस्से में)।
🌋 सतह कैसी है? JWST की मदद से वैज्ञानिकों ने इस ग्रह की गर्मी (infrared radiation) का अध्ययन किया और पाया कि: यहां बेसाल्ट और ऑलिविन जैसी चट्टानें हैं यह संरचना बुध और चंद्रमा जैसी है यहां पृथ्वी जैसी मिट्टी या प्लेट टेक्टॉनिक्स नहीं हैं सतह पूरी तरह सूखी, काली और बंजर है 👉 यानी यह ग्रह जीवन के लिए बिल्कुल अनुपयुक्त है।
🌫️ क्या यहां वातावरण है? नहीं। इस ग्रह पर कोई वातावरण (atmosphere) नहीं है कोई CO₂ या SO₂ जैसी गैस नहीं मिली कोई बादल या सुरक्षा कवच नहीं है 👉 इसका मतलब सूरज की किरणें और उल्कापिंड सीधे इसकी सतह पर पड़ते हैं।
🛰️ वैज्ञानिकों ने इसे कैसे देखा? वैज्ञानिक सीधे तस्वीर नहीं ले सके। इसके बजाय: उन्होंने तारे और ग्रह की संयुक्त रोशनी का अध्ययन किया जब गर्म हिस्सा सामने आता है तो हल्की infrared चमक बढ़ती है जब ठंडा हिस्सा सामने आता है तो चमक घट जाती है 👉 इसी बदलाव से ग्रह की “थर्मल मैपिंग” की गई।
🧪 वैज्ञानिकों का क्या कहना है? Max Planck Institute की वैज्ञानिक Laura Kreidberg ने कहा: “यह एक बेहद कठोर और बंजर जगह है, जहां कोई वातावरण नहीं है और सतह पूरी तरह चट्टानी है।”
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🌌 क्या यह पृथ्वी जैसा है? नहीं। यहां पानी नहीं है कोई जीवन नहीं हो सकता कोई वातावरण नहीं है तापमान अत्यधिक है 👉 वैज्ञानिकों ने साफ कहा कि यह ग्रह पृथ्वी से बिल्कुल अलग है और “जीवन योग्य दुनिया” की श्रेणी में नहीं आता।
📌 निष्कर्ष JWST की यह खोज हमें बताती है कि ब्रह्मांड में हर ग्रह पृथ्वी जैसा नहीं होता। LHS 3844 b एक ऐसा “नरक जैसा पथरीला ग्रह” है जहां अत्यधिक गर्मी, वातावरण की कमी और कठोर सतह इसे पूरी तरह निर्जीव बना देती है। 👉 यह खोज अंतरिक्ष विज्ञान के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे वैज्ञानिक दूसरे ग्रहों के वातावरण और संरचना को बेहतर समझ पा रहे हैं।
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