बजट में भारत को ग्लोबल क्लाउड और AI इंफ्रास्ट्रक्चर का अहम केंद्र बनाने पर जोर दिया गया है। विदेशी क्लाउड कंपनियों को 2047 तक टैक्स हॉलिडे, डेटा सेंटर सर्विसेज़ के लिए सेफ हार्बर और ट्रांसफर प्राइसिंग में सर्टेनिटी जैसे कदम निवेश को बढ़ावा देंगे। इससे क्लाउड, डेटा सेंटर और IT सर्विस सेक्टर में लंबे समय की ग्रोथ और AI को गवर्नेंस, एग्रीकल्चर व अन्य सेक्टर्स में तेजी से अपनाने की राह खुलेगी।
बजट में भारत को ग्लोबल क्लाउड वर्कलोड्स का बड़ा हब बनाने की साफ़ मंशा दिखाई देती है। इसी मकसद से विदेशी कंपनियों को बड़ा टैक्स हॉलिडे देने का ऐलान किया गया है। 2047 तक जो विदेशी कंपनियां भारतीय डेटा सेंटर्स का इस्तेमाल करके दुनिया भर के ग्राहकों को क्लाउड सर्विस देंगी, उन्हें टैक्स में छूट मिलेगी।
हालांकि, भारत के अंदर ग्राहकों को सर्विस देने के लिए उन्हें किसी इंडियन रीसेलर एंटिटी के ज़रिये ही काम करना होगा। यह पॉलिसी भारत को सिर्फ घरेलू डेटा सेंटर मार्केट तक सीमित रखने के बजाय, ग्लोबल क्लाउड डिमांड के लिए एक स्ट्रैटेजिक बेस के तौर पर उभारने में मदद करेगी।
इससे कोलोकेशन, पावर इंफ्रास्ट्रक्चर और फाइबर कनेक्टिविटी जैसे क्षेत्रों में बड़े और लंबे समय के निवेश आने की उम्मीद है। एनालिस्ट्स का मानना है कि भारत का पब्लिक क्लाउड सर्विसेज़ मार्केट 2029 तक बढ़कर 30.4 बिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है, जिसमें सालाना करीब 22.6% की ग्रोथ होगी।
डेटा सेंटर सर्विसेज़ के लिए 15% का सेफ हार्बर प्रस्तावित किया गया है, जिससे निवेशकों का भरोसा और मज़बूत होगा। ये सारे कदम AI के लिए ज़रूरी डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को भी मजबूत करेंगे। सरकार गवर्नेंस और सर्विस डिलीवरी में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को एक अहम टूल के रूप में देख रही है।
बजट में AI से जुड़ी पहलों को नेशनल क्वांटम मिशन और नेशनल रिसर्च फंड जैसे बड़े रिसर्च प्रोग्राम्स से जोड़ा गया है। साथ ही, एक हाई-पावर्ड स्टैंडिंग कमिटी बनाई जाएगी जो AI समेत उभरती टेक्नोलॉजीज़ का जॉब्स और स्किल्स पर पड़ने वाले असर का अध्ययन करेगी।
AI को खेती से जुड़ी सलाह सेवाओं (Bharat-VISTAAR), असिस्टिव डिवाइसेज़ और पोर्ट सिक्योरिटी स्कैनिंग जैसे कई सेक्टर्स में लागू करने की योजना है। यह दिखाता है कि सरकार सोशल और इकनॉमिक डेवलपमेंट के लिए टेक्नोलॉजी को बड़े स्तर पर अपनाने के लिए प्रतिबद्ध है।
भारत की IT एक्सपोर्ट इकोनॉमी की रीढ़ मानी जाने वाली कंपनियां जैसे TCS, Infosys, Wipro और LTIMindtree का मार्केट में बड़ा वज़न है। TCS का मार्केट कैप करीब ₹11.57 लाख करोड़ है और इसका P/E रेशियो 22.7 के आसपास है। Infosys का मार्केट कैप ₹6.71 लाख करोड़ और P/E 23.3 है।
Wipro का मार्केट कैप ₹2.57 लाख करोड़ और P/E 19.3 है, जबकि LTIMindtree का मार्केट कैप ₹1.80 लाख करोड़ और P/E 34.7 के करीब है।
बजट में ट्रांसफर प्राइसिंग से जुड़ी सर्टेनिटी और सेफ हार्बर मार्जिन में बदलाव का प्रस्ताव इन कंपनियों के लिए कंप्लायंस से जुड़े बोझ और पुराने टैक्स डिस्प्यूट्स को कम कर सकता है, जो अब तक उनके प्रॉफिट मार्जिन पर असर डालते रहे हैं।
इससे ऑपरेशनल एफिशिएंसी बेहतर होने की संभावना है, जिसका सीधा असर वैल्यूएशन पर भी पड़ सकता है। Wipro और TCS का तुलनात्मक रूप से कम P/E रेशियो शायद ग्रोथ की उम्मीदों या मार्केट की सोच में फर्क को दिखाता है, जिसे नई पॉलिसीज़ बदल सकती हैं।
भारत का क्लाउड कंप्यूटिंग मार्केट तेज़ी से आगे बढ़ रहा है और इसके 2032 तक लगभग 68.66 बिलियन डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है, जिसमें करीब 21.80% की सालाना ग्रोथ हो सकती है।
2047 तक विदेशी क्लाउड प्रोवाइडर्स को टैक्स हॉलिडे देने का फैसला ग्लोबल कैपिटल को आकर्षित करने और भारत को ग्लोबल डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर का अहम हिस्सा बनाने की दिशा में बड़ा कदम है। इस पॉलिसी के चलते डेटा सेंटर कैपेसिटी बढ़ाने की ज़रूरत भी तेजी से बढ़ेगी।
अनुमान है कि 2035 तक भारत की डेटा सेंटर क्षमता लगभग 1.5 GW से बढ़कर 14 GW तक पहुंच सकती है, जिसके लिए 70 बिलियन डॉलर से ज़्यादा के निवेश की ज़रूरत होगी। कई बड़ी टेक कंपनियां पहले ही भारत में भारी निवेश कर चुकी हैं, जो इस मार्केट पर उनके भरोसे को दिखाता है।
रिलेटेड-पार्टी डेटा सेंटर सर्विसेज़ के लिए सेफ हार्बर का प्रावधान इस कैपिटल-इंटेंसिव सेक्टर में और स्थिर निवेश को बढ़ावा देगा। बजट में AI पर दिया गया ज़ोर इसे एक अहम इकनॉमिक ड्राइवर के तौर पर स्थापित करता है।
जॉब्स और स्किल्स पर AI के असर को समझने के लिए कमिटी बनाना इस टेक्नोलॉजिकल बदलाव से निपटने का एक प्रैक्टिकल तरीका है। IT सर्विस कंपनियों के लिए यह ज़रूरी होगा कि वे अपने कर्मचारियों को अपस्किल करें और AI-फोकस्ड सॉल्यूशंस तैयार करें, ताकि नई मार्केट अपॉर्च्युनिटीज़ का पूरा फायदा उठा सकें।
गवर्नेंस से लेकर एग्रीकल्चर तक अलग-अलग सेक्टर्स में AI के इस्तेमाल से डिजिटलाइजेशन को बड़ा बूस्ट मिलेगा। इससे IT सर्विस प्रोवाइडर्स के लिए कंसल्टिंग, इम्प्लीमेंटेशन और मेंटेनेंस जैसी सर्विसेज़ की मांग और बढ़ने की उम्मीद है।
आगे की बात करें तो भारत की इकोनॉमी के FY26 में 7 से 7.5% और FY27 में 6.8 से 7.2% की दर से बढ़ने का अनुमान है, जिसे घरेलू खपत और इंफ्रास्ट्रक्चर अपग्रेड्स का सहारा मिलेगा।
बजट में IT सर्विसेज़ को आसान बनाने और क्लाउड निवेश को आकर्षित करने पर जो फोकस है, वह इन सेक्टर्स को इस ग्रोथ का फायदा उठाने के लिए अच्छी तरह तैयार करता है।
क्लाउड सर्विसेज़ के लिए लंबी अवधि का टैक्स हॉलिडे और IT एक्सपोर्टर्स के लिए बेहतर ट्रांसफर प्राइसिंग सर्टेनिटी, निवेशकों के लिए एक स्थिर और आकर्षक माहौल बनाने की कोशिश है।
‘विकसित भारत’ की थीम के तहत सरकार का विज़न टेक्नोलॉजी-ड्रिवन ग्रोथ, रोज़गार के नए मौके और भारत को एक ग्लोबल सर्विसेज़ और कंप्यूट हब के रूप में स्थापित करने के लिए लगातार पॉलिसी सपोर्ट का संकेत देता है।
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