सोशल मीडिया पर वायरल फायर–ब्रीदिंग चैलेंज को ट्राई करते समय पेंसिलवेनिया में एक 14 साल की लड़की गंभीर रूप से झुलस गई। एक्सपर्ट्स के अनुसार यह स्टंट आम लोगों के लिए बिल्कुल असुरक्षित है, भले ही “सही तरीके” का दावा किया जाए।
सोशल मीडिया पर वायरल होने वाले ट्रेंड्स आजकल सिर्फ एंटरटेनमेंट तक सीमित नहीं रहे, बल्कि कई बार ये सीधे लोगों की जान के लिए खतरा बन जाते हैं। पिछले कुछ हफ्तों में TikTok और दूसरे प्लेटफॉर्म्स पर “फायर–ब्रीदिंग चैलेंज” तेजी से ट्रेंड कर रहा है। इस चैलेंज में लोग अपने मुंह से आग की लपटें निकालते हुए वीडियो बनाते हैं, जिसे देखकर लाखों व्यूज़ और लाइक्स मिल रहे हैं। लेकिन इस खतरनाक ट्रेंड ने अब एक गंभीर मोड़ ले लिया है।
हाल ही में अमेरिका के पेंसिलवेनिया राज्य में एक 14 साल की लड़की इस चैलेंज को ट्राई करते समय बुरी तरह झुलस गई। रिपोर्ट्स के मुताबिक, उसने सोशल मीडिया पर देखे गए वीडियो से सीखकर यह स्टंट करने की कोशिश की थी। इस दौरान उसके चेहरे और शरीर के ऊपरी हिस्से पर गंभीर जलन हो गई और उसे तुरंत अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या ऐसे वायरल चैलेंज सच में सुरक्षित हैं?
सोशल मीडिया पर कई कंटेंट क्रिएटर्स यह दावा कर रहे हैं कि अगर “सही लिक्विड” जैसे आइसोप्रोपिल अल्कोहल और “सही टेक्नीक” का इस्तेमाल किया जाए, तो यह स्टंट सुरक्षित तरीके से किया जा सकता है। लेकिन सेफ्टी एक्सपर्ट्स और फायर अधिकारियों ने इस दावे को पूरी तरह गलत और भ्रामक बताया है। उनका कहना है कि फायर–ब्रीदिंग एक हाई-रिस्क स्टंट है, जिसे प्रोफेशनल परफॉर्मर्स भी कड़ी ट्रेनिंग, सुरक्षा उपकरण और सख्त नियमों के साथ करते हैं—फिर भी इसमें खतरा बना रहता है।
सेफ्टी स्टडीज़ के अनुसार, खतरनाक सोशल मीडिया चैलेंजेस के कारण अब तक 100 से ज्यादा मौतें और हजारों इमरजेंसी केस सामने आ चुके हैं। “Benadryl चैलेंज” जैसे ट्रेंड्स इसका उदाहरण हैं, जो समय-समय पर फिर से वायरल हो जाते हैं और खासकर बच्चों व किशोरों को प्रभावित करते हैं। फायर–ब्रीदिंग जैसे स्टंट्स को कई सुरक्षा संगठनों ने हाई-रिस्क कैटेगरी में रखा है, क्योंकि इसमें जलने, सांस की समस्या और यहां तक कि जान जाने का खतरा भी होता है।
विशेषज्ञों का साफ कहना है कि “सही तरीके से करें तो सुरक्षित है” वाला दावा पूरी तरह गलत है। आम लोगों के लिए यह स्टंट बिल्कुल भी सुरक्षित नहीं है, चाहे वे कितनी भी सावधानी क्यों न बरतें। खासकर बच्चों और टीनएजर्स के लिए यह बेहद खतरनाक हो सकता है, क्योंकि वे अक्सर बिना पूरी जानकारी और सुरक्षा के ऐसे ट्रेंड्स को कॉपी करने लगते हैं।
इसका असर सिर्फ व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता, बल्कि परिवार और समाज पर भी पड़ता है। माता–पिता और स्कूलों की जिम्मेदारी बनती है कि वे बच्चों से ऐसे ट्रेंड्स के बारे में खुलकर बात करें और उन्हें समझाएं कि सोशल मीडिया पर मिलने वाले लाइक्स और व्यूज़ के लिए अपनी जान जोखिम में डालना सही नहीं है। साथ ही, बच्चों को यह भी सिखाना जरूरी है कि हर वायरल चीज सुरक्षित या सही नहीं होती।
दूसरी तरफ, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की भी बड़ी जिम्मेदारी है। सिर्फ चेतावनी (warning) दिखाना काफी नहीं है। ऐसे खतरनाक कंटेंट को जल्दी पहचानकर हटाना और उसके प्रमोशन को रोकना जरूरी है, ताकि यह ज्यादा लोगों तक न पहुंचे।
कुल मिलाकर, “फायर–ब्रीदिंग चैलेंज” एक खतरनाक ट्रेंड है, जिसे किसी भी हालत में घर पर ट्राई नहीं करना चाहिए। यह घटना एक चेतावनी है कि हमें सोशल मीडिया ट्रेंड्स को आंख बंद करके फॉलो करने के बजाय समझदारी से काम लेना होगा, क्योंकि एक छोटी सी गलती जिंदगी भर का नुकसान बन सकती है।
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