भारत के मार्केट रेगुलेटर ने AI-ड्रिवन साइबर खतरों और मार्केट मैनिपुलेशन को रोकने के लिए नई टास्क फोर्स बनाई है। साथ ही ब्रोकर्स, म्यूचुअल फंड्स और डेटा प्रोवाइडर्स को साइबर सिक्योरिटी मजबूत करने की एडवाइजरी भी जारी की गई है।
देश में तेजी से बढ़ रहे AI इस्तेमाल के बीच भारतीय मार्केट रेगुलेटर ने वित्तीय बाजारों की सुरक्षा को लेकर बड़ा कदम उठाया है। AI-आधारित साइबर हमलों और डिजिटल फ्रॉड की बढ़ती आशंका को देखते हुए रेगुलेटर ने एक स्पेशल टास्क फोर्स गठित की है। इसका मुख्य उद्देश्य स्टॉक मार्केट, ब्रोकरेज प्लेटफॉर्म, ट्रेडिंग सिस्टम और निवेशकों के डेटा को AI-ड्रिवन साइबर थ्रेट्स से सुरक्षित रखना है।
जानकारी के मुताबिक, यह टास्क फोर्स हाई-फ्रीक्वेंसी ट्रेडिंग, AI ट्रेडिंग बॉट्स और डीपफेक टेक्नोलॉजी के जरिए होने वाले संभावित मार्केट मैनिपुलेशन पर नजर रखेगी। पिछले कुछ वर्षों में एल्गोरिदमिक ट्रेडिंग और ऑटोमेटेड सिस्टम्स का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। इससे ट्रेडिंग की स्पीड और मार्केट लिक्विडिटी तो बढ़ी है, लेकिन इसके साथ फर्जी ट्रेडिंग पैटर्न, फ्लैश-क्रैश और गलत सूचना फैलाने जैसे खतरे भी सामने आए हैं।
Continue Reading7 मई 2026
विशेषज्ञों का मानना है कि AI जनरेटेड डीपफेक वीडियो, नकली प्रेस रिलीज और फर्जी निवेश सलाह के जरिए निवेशकों को गुमराह करना अब पहले से ज्यादा आसान हो गया है। ऐसे में रेगुलेटर का यह कदम बाजार में पारदर्शिता और भरोसा बनाए रखने के लिए अहम माना जा रहा है।
रेगुलेटर ने ब्रोकर्स, म्यूचुअल फंड कंपनियों, रजिस्ट्री एजेंसियों और डेटा प्रोवाइडर्स के लिए नई एडवाइजरी भी जारी की है। इसमें कंपनियों को AI रिस्क मैनेजमेंट सिस्टम मजबूत करने, संदिग्ध गतिविधियों की मॉनिटरिंग बढ़ाने और साइबर सिक्योरिटी प्रोटोकॉल को अपडेट करने के निर्देश दिए गए हैं। मल्टी-फैक्टर ऑथेंटिकेशन, लॉग मॉनिटरिंग, अनयूजुअल एक्टिविटी डिटेक्शन और रेगुलर सिक्योरिटी टेस्टिंग पर खास जोर दिया गया है।
Continue Reading6 मई 2026
इसका असर आम निवेशकों पर भी दिखाई दे सकता है। आने वाले समय में ट्रेडिंग अकाउंट और KYC डेटा की सुरक्षा के लिए ज्यादा सख्त नियम लागू किए जा सकते हैं। निवेशकों को मजबूत पासवर्ड, 2FA सिक्योरिटी और संदिग्ध लिंक या मैसेज से बचने जैसी सावधानियां अपनाने की सलाह दी गई है। AI-आधारित फिशिंग स्कैम और फर्जी इन्वेस्टमेंट एडवाइजर के मामलों में बढ़ोतरी की आशंका भी जताई जा रही है।
ग्लोबल स्तर पर भी AI-ड्रिवन ट्रेडिंग और साइबर खतरों को लेकर चिंता बढ़ रही है। अमेरिका और यूरोप के कई रेगुलेटर पहले ही इस दिशा में नई गाइडलाइंस तैयार कर रहे हैं। भारत जैसे तेजी से बढ़ते निवेशक बाजार में किसी बड़े साइबर अटैक या डेटा लीक का असर सीधे निवेशकों के भरोसे पर पड़ सकता है।
Continue Reading6 मई 2026
माना जा रहा है कि भविष्य में यह टास्क फोर्स इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स और टेक्नोलॉजी संस्थानों के साथ मिलकर एक व्यापक AI रिस्क फ्रेमवर्क तैयार कर सकती है। इसके तहत AI-बेस्ड ट्रेडिंग मॉडल्स के लिए रजिस्ट्रेशन, मॉनिटरिंग और सर्टिफिकेशन जैसी व्यवस्थाएं भी लागू की जा सकती हैं, ताकि बाजार को सुरक्षित और निष्पक्ष बनाए रखा जा सके।
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7 मई 2026
6 मई 2026
6 मई 2026
6 मई 2026