अटलांटिक महासागर में चल रहे एक क्रूज़ शिप पर संदिग्ध हैंटावायरस संक्रमण से तीन लोगों की मौत हो गई है। कई यात्रियों और क्रू में गंभीर लक्षण पाए जाने के बाद जांच और निगरानी तेज कर दी गई है।
अटलांटिक महासागर में सफर कर रही एक क्रूज़ शिप पर हैंटावायरस के संदिग्ध प्रकोप ने चिंता बढ़ा दी है। अब तक कम से कम तीन लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि कई यात्रियों और क्रू मेंबर्स में तेज बुखार और सांस लेने में दिक्कत जैसे गंभीर लक्षण सामने आए हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने पुष्टि की है कि कम से कम एक मामला लैब में हैंटावायरस के रूप में कन्फर्म हुआ है, जबकि पांच अन्य मामलों की जांच जारी है।
यह घटना एमवी हॉन्डियस नाम की पोलर क्रूज़ शिप पर हुई, जिसमें करीब 170 यात्री सवार थे। जहाज़ अर्जेंटीना से केप वर्डे की ओर जा रहा था, तभी बीच सफर में कुछ लोगों की तबीयत अचानक बिगड़ने लगी। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पहला गंभीर मरीज 70 साल का एक व्यक्ति था, जिसकी मौत जहाज़ पर ही हो गई। बाद में उसका शव सेंट हेलेना में उतारा गया। वहीं उसकी पत्नी की भी दक्षिण अफ्रीका के एयरपोर्ट पर हालत बिगड़ने के बाद मौत हो गई। एक अन्य यात्री फिलहाल जोहान्सबर्ग के अस्पताल में ICU में भर्ती है।
हैंटावायरस आमतौर पर चूहों जैसे कृतंकों के संपर्क से फैलता है, खासकर उनके मूत्र या मल के जरिए। यह वायरस कई मामलों में गंभीर श्वसन बीमारी का कारण बन सकता है। इंसान से इंसान में इसका फैलना बहुत कम देखा गया है, लेकिन बंद जगहों में लंबे समय तक नजदीकी संपर्क होने पर जोखिम बढ़ सकता है।
फिलहाल जहाज़ पर मौजूद सभी यात्रियों की स्क्रीनिंग, आइसोलेशन और कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। दो गंभीर रूप से बीमार क्रू मेंबर्स को तुरंत तट पर लाने की कोशिश हो रही है। WHO और दक्षिण अफ्रीका समेत कई देशों की हेल्थ एजेंसियां मिलकर पूरे मामले का विस्तृत पब्लिक हेल्थ रिस्क असेसमेंट कर रही हैं।
जांच टीमें यह पता लगाने में जुटी हैं कि वायरस जहाज़ पर कैसे पहुंचा—क्या यह किसी संक्रमित व्यक्ति के जरिए आया या किसी पोर्ट पर दूषित माहौल के संपर्क से फैला। एहतियात के तौर पर जहाज़ के रूट में बदलाव किया जा रहा है और उसे जल्द ही नजदीकी सुरक्षित बंदरगाह पर रोका जा सकता है।
यह घटना एक बार फिर दिखाती है कि महामारी के बाद भी संक्रामक बीमारियों का खतरा खत्म नहीं हुआ है, खासकर क्रूज़ जैसे बंद और भीड़भाड़ वाले माहौल में। WHO ने इसे फिलहाल पब्लिक हेल्थ इवेंट माना है, लेकिन इसे अंतरराष्ट्रीय आपातकाल घोषित नहीं किया गया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि ज्यादातर लोगों के लिए खतरा सीमित रहेगा, अगर समय पर जांच, सफाई और निगरानी के सख्त कदम उठाए जाएं। वहीं यात्रियों को सलाह दी जा रही है कि यात्रा से पहले हेल्थ पॉलिसी, मेडिकल सुविधाएं और कैंसिलेशन नियम जरूर जांचें और किसी भी फ्लू जैसे लक्षण को नजरअंदाज न करें। यह घटना समुद्री पर्यटन इंडस्ट्री के लिए भी एक चेतावनी है कि संक्रमण से बचाव के मजबूत इंतजाम अब भी बेहद जरूरी हैं।
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