अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा संघर्ष 60 दिन से ज्यादा हो चुका है और अभी भी युद्धविराम की कोई स्पष्ट संभावना नहीं दिख रही है। ईरान के शांति प्रस्ताव को अमेरिका ने खारिज कर दिया है, जिससे तनाव और बढ़ गया है।इस टकराव का असर मध्य-पूर्व क्षेत्र के साथ-साथ वैश्विक अर्थव्यवस्था और तेल कीमतों पर भी पड़ रहा है।
संयुक्त राज्य अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा संघर्ष अब दो महीने से ज्यादा समय पार कर चुका है और हाल के घटनाक्रमों ने युद्धविराम की उम्मीदों को बड़ा झटका दिया है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के नए शांति प्रस्ताव को स्वीकार करने से इनकार कर दिया है, जिससे कूटनीतिक समाधान की राह और लंबी होती दिख रही है। शांति वार्ता पर ब्रेक मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने कुछ शर्तों के साथ युद्ध रोकने का प्रस्ताव दिया था, लेकिन व्हाइट हाउस ने इसे अपर्याप्त और अस्पष्ट बताते हुए खारिज कर दिया। इसी बीच अमेरिकी सीनेट में भी युद्ध को सीमित करने के प्रयासों पर सहमति नहीं बन पाई है, जिससे देश के अंदर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। अमेरिका की सैन्य नीति पर विवाद अमेरिकी संसद में “वार पावर्स रेजोल्यूशन” पर चर्चा जारी है, जिसका उद्देश्य राष्ट्रपति की सैन्य कार्रवाई पर संसदीय नियंत्रण बढ़ाना था। हालांकि डेमोक्रेट और कुछ रिपब्लिकन सांसद इसके समर्थन में थे, लेकिन रिपब्लिकन बहुमत ने इसे पारित नहीं होने दिया। इसका मतलब है कि फिलहाल राष्ट्रपति के पास सैन्य कार्रवाई जारी रखने की पर्याप्त स्वतंत्रता बनी हुई है। क्षेत्रीय तनाव में बढ़ोतरी पिछले कुछ हफ्तों में ईरान और उसके सहयोगियों ने खाड़ी क्षेत्र में मिसाइल और ड्रोन हमलों को तेज किया है, जिसके जवाब में अमेरिका और उसके सहयोगी देश भी लगातार हवाई और साइबर हमले कर रहे हैं। इससे पूरे मध्य-पूर्व क्षेत्र में तनाव और अस्थिरता बढ़ गई है, खासकर तेल आपूर्ति और समुद्री व्यापार मार्गों पर इसका असर दिख रहा है। वैश्विक असर विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह संघर्ष लंबा चलता है तो इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ेगा, क्योंकि पहले से ही तेल की कीमतें ऊंची बनी हुई हैं। इसका सीधा असर आम लोगों पर ईंधन और परिवहन की बढ़ती लागत के रूप में दिख रहा है। आम लोगों पर प्रभाव अमेरिका और यूरोप जैसे देशों में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी हो रही है, जबकि मध्य-पूर्व में काम कर रहे प्रवासी भारतीयों और अन्य विदेशी श्रमिकों के लिए सुरक्षा और रोजगार दोनों को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है। फिलहाल स्थिति बेहद संवेदनशील बनी हुई है और यदि जल्द कोई कूटनीतिक समाधान नहीं निकलता, तो इसका बोझ सीधे आम नागरिकों और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर और बढ़ सकता है।
USEIranTension MiddleEastCrisis GlobalNews OilPrices WorldEconomy BreakingNews NetGramNews
Disclaimer
Disclaimer:
Images are for illustrative purposes only and some editing of images done by using AI.
Published by: Gulam Rasool. For newsroom standards, byline transparency, and correction requests, review our editorial standards and corrections policy.
Need to contact the newsroom directly? Email netgramnews@gmail.com or visit the team page.