तमिलनाडु के कलपक्कम में PFBR रिएक्टर ने पहली बार “फर्स्ट क्रिटिकलिटी” हासिल की। इस उपलब्धि के साथ भारत ने अपने तीन-स्तरीय परमाणु कार्यक्रम के दूसरे चरण में एंट्री कर ली है।
भारत ने परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में एक बड़ा माइलस्टोन हासिल किया है। तमिलनाडु के कलपक्कम स्थित 500 मेगावॉट प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (PFBR) में पहली बार नियंत्रित न्यूक्लियर चेन रिएक्शन, यानी “फर्स्ट क्रिटिकलिटी” सफलतापूर्वक प्राप्त की गई। विभाग के मुताबिक यह उपलब्धि 6 अप्रैल की रात 8:25 बजे हासिल हुई, जब रिएक्टर के कोर में न्यूक्लियर फिशन इतनी स्थिर हो गई कि वह खुद को बनाए रख सके।
इस सफलता के साथ भारत ने अपने तीन-स्टेज न्यूक्लियर प्रोग्राम के दूसरे चरण में औपचारिक रूप से प्रवेश कर लिया है। इस प्रोग्राम का अंतिम लक्ष्य देश में मौजूद बड़े थोरियम भंडार का उपयोग करके ऊर्जा उत्पादन को मजबूत बनाना है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस उपलब्धि को भारत की सिविल न्यूक्लियर यात्रा का अहम मोड़ बताया। उन्होंने वैज्ञानिकों और इंजीनियरों को बधाई देते हुए कहा कि यह रिएक्टर खास इसलिए है क्योंकि यह जितना ईंधन इस्तेमाल करता है, उससे ज्यादा ईंधन पैदा करने की क्षमता रखता है। लंबे समय तक चली देरी, बढ़ती लागत और कड़े सुरक्षा परीक्षणों के बाद इस स्तर तक पहुंचना देश की तकनीकी क्षमता और धैर्य को दिखाता है।
Continue Reading30 अप्रैल 2026
फास्ट ब्रीडर रिएक्टर सामान्य रिएक्टरों से अलग होते हैं। ये यूरेनियम-प्लूटोनियम ईंधन के साथ काम करते हुए “ब्रीडिंग” प्रोसेस के जरिए अतिरिक्त फिसाइल मटेरियल तैयार करते हैं, जिसे आगे दूसरे रिएक्टरों में ईंधन के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। भारत की योजना है कि इन रिएक्टरों से पर्याप्त प्लूटोनियम तैयार कर भविष्य में थोरियम आधारित तीसरे चरण की ओर बढ़ा जाए।
आम लोगों के नजरिए से देखें तो यह उपलब्धि सस्ती, साफ और स्थिर बिजली की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है। अगर यह तकनीक कमर्शियल लेवल पर सफल होती है, तो कोयले पर निर्भरता कम होगी, प्रदूषण घटेगा और लंबे समय में बिजली की कीमतों पर भी असर पड़ सकता है।
Continue Reading1 मई 2026
हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि PFBR अभी शुरुआती स्टेज में है। पूरी क्षमता से बिजली उत्पादन शुरू होने में समय लगेगा और सुरक्षा मानकों पर लगातार निगरानी जरूरी होगी। फिलहाल उपलब्ध जानकारी सरकारी बयानों और तकनीकी रिपोर्ट्स पर आधारित है, जबकि असली लागत और फायदे का सही आकलन आने वाले वर्षों में ही साफ हो पाएगा।
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30 अप्रैल 2026