बंधेज (बांधनी): भारत की प्राचीन और लोकप्रिय वस्त्र कला

1/30/2026, 4:00:00 PM

बंधेज (बांधनी) भारत की एक पुरानी और लोकप्रिय शिल्प कला है, जिससे साड़ी, दुपट्टा, सलवार सूट, बेडशीट और सजावटी वस्तुएँ बनाई जाती हैं। इसकी मांग भारत और विदेशों दोनों में है। इसमें कपड़े की बंधाई और रंगाई की प्रक्रिया हर रंग के लिए बार-बार की जाती है। लहरिया, मोटड़ा और चुंदड़ी इसकी मुख्य शैलियाँ हैं। लहरिया-मोटड़ा सावन-भादों में पहनी जाती हैं, जबकि चुंदड़ी सबसे बारीक डिजाइन वाली होती है और शादियों में दुल्हन पहनती है। जोधपुरी बंधेज और जामनगरी बांधनी में रंग और डिजाइन का फर्क है। जोधपुर में वेजीटेबल और साल्ट कलर इस्तेमाल होते हैं, जबकि जामनगर में कास्टिक कलर प्रचलित रहे हैं। बंधेज के प्रोडक्ट कैटलॉग में साड़ी, सलवार सूट, दुपट्टा, बेडशीट, साफा और ओन्ना शामिल हैं। साथ ही इसमें इस्तेमाल होने वाले वेजीटेबल रंग प्राकृतिक सामग्री से तैयार किए जाते हैं।

बंधेज (बांधनी) भारत की एक प्राचीन शिल्प कला है, जिसमें साड़ी, दुपट्टा, सलवार सूट, बेडशीट और गृह सज्जा की वस्तुएँ बनाई जाती हैं। इसकी देश-विदेश में काफी मांग है। इस कला में कपड़े की धुलाई, टीपाव, बंधाई और रंगाई की प्रक्रिया को हर रंग के लिए बार-बार दोहराया जाता है। लहरिया, मोटड़ा और चुंदड़ी बंधेज की प्रमुख शैलियाँ हैं। लहरिया-मोटड़ा साड़ियाँ सावन-भादों में खास पहनी जाती हैं और इन्हें बनाने में कई महीनों का समय लगता है। चुंदड़ी सबसे बारीक डिजाइन वाली होती है, जो खास तौर पर शादियों में दुल्हन द्वारा पहनी जाती है, और इसका असली निखार लाल रंग में आता है। जोधपुरी बंधेज और जामनगरी बांधनी में डिजाइन, रंग और परंपराओं का अंतर है। जोधपुर में वेजीटेबल और साल्ट कलर का उपयोग होता है, जबकि जामनगर में कास्टिक कलर ज्यादा प्रचलित रहे हैं। प्रोडक्ट कैटलॉग में साड़ी, सलवार सूट, दुपट्टा, बेडशीट, साफा और ओन्ना शामिल हैं, जो अलग-अलग साइज और फैब्रिक में बनाए जाते हैं। साफा भी समाज और परंपरा के अनुसार अलग-अलग प्र