अमेरिकी FDA ने एक नई जीन थेरेपी को मंजूरी दी है, जो जन्म से बहरे बच्चों को सुनने की क्षमता दे सकती है। इसे मेडिकल साइंस में बड़ा ब्रेकथ्रू माना जा रहा है।
विज्ञान और स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि सामने आई है। अमेरिकी फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) ने एक ऐसी जीन थेरेपी को हरी झंडी दे दी है, जो दुर्लभ प्रकार के जन्मजात बहरापन से जूझ रहे बच्चों के लिए उम्मीद बनकर उभरी है। यह थेरेपी खास तौर पर उन बच्चों के लिए तैयार की गई है, जिनके कान की सुनने वाली कोशिकाओं में एक विशेष जीन की गड़बड़ी होती है और जिनका इलाज पारंपरिक तरीकों से संभव नहीं था।
रिपोर्ट्स के अनुसार, क्लिनिकल ट्रायल्स के दौरान कुछ बच्चों ने इस थेरेपी के बाद पहली बार आवाज़ें सुननी शुरू कर दीं। यह पल उनके परिवारों के लिए बेहद भावुक और यादगार रहा। इस जीन थेरेपी में सही जीन की कॉपी को सीधे कान के अंदर पहुंचाया जाता है, जिससे वहां की कोशिकाएं ध्वनि संकेतों को ठीक तरीके से पकड़ने लगती हैं।
हालांकि फिलहाल यह इलाज सीमित मरीजों और खास तरह के बहरापन तक ही सीमित है, लेकिन वैज्ञानिकों का मानना है कि यह तकनीक भविष्य में कई अन्य जीनिक बीमारियों के इलाज का रास्ता खोल सकती है।
वहीं, इस थेरेपी की एक बड़ी चुनौती इसकी कीमत है। जीन थेरेपी आमतौर पर काफी महंगी होती है और एक बार के इलाज की लागत कई लाख डॉलर तक पहुंच सकती है। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि क्या बीमा कंपनियां और सरकारी हेल्थ सिस्टम इसे कवर करेंगे या यह सुविधा केवल संपन्न परिवारों तक ही सीमित रह जाएगी।
इसके साथ ही जीन एडिटिंग से जुड़े एथिकल मुद्दों पर भी बहस तेज हो गई है। ‘डिज़ाइनर बेबी’ और जीनिक असमानता जैसे सवाल आने वाले समय में नीति-निर्माताओं के लिए बड़ी चुनौती बन सकते हैं, जिन पर स्पष्ट नियम बनाने की जरूरत होगी।
कुल मिलाकर, यह खबर उन परिवारों के लिए एक उम्मीद की किरण है, जिनके बच्चे जन्म से दुर्लभ बीमारियों से जूझ रहे हैं। साथ ही, मेडिकल और बायोटेक क्षेत्र से जुड़े छात्रों, शोधकर्ताओं और साइंस राइटर्स के लिए यह एक महत्वपूर्ण डेवलपमेंट है, जिस पर आगे रिसर्च और जागरूकता का काम किया जा सकता है।
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