इस्राइल ईरान के खिलाफ बड़े हमले की तैयारी में है और सिर्फ अमेरिका की मंजूरी का इंतजार कर रहा है। रक्षा मंत्री ने कहा कि सभी टारगेट तय हैं और जरूरत पड़ने पर कड़ी सैन्य कार्रवाई की जाएगी। वहीं अमेरिका ने परमाणु हथियार इस्तेमाल से इनकार किया है, जबकि ईरान ने खुद को एकजुट बताते हुए सभी आरोप खारिज कर दिए हैं।
पश्चिम एशिया में एक बार फिर तनाव तेजी से बढ़ता नजर आ रहा है। इस्राइल और ईरान के बीच हालात अब खुली जंग के करीब पहुंचते दिख रहे हैं। इस्राइल के रक्षा मंत्री इस्राइल काट्ज ने साफ संकेत दिए हैं कि देश ईरान के खिलाफ बड़े सैन्य अभियान के लिए पूरी तरह तैयार है और अब सिर्फ अमेरिका की हरी झंडी का इंतजार किया जा रहा है। एक सुरक्षा बैठक के दौरान काट्ज ने कहा कि इस्राइली सेना (IDF) हर स्थिति के लिए तैयार है—चाहे हमला करना हो या बचाव। उन्होंने बताया कि संभावित सभी टारगेट पहले ही चिन्हित किए जा चुके हैं। साथ ही उन्होंने ईरान पर आरोप लगाया कि वहां की सरकार अपने नागरिकों पर सख्त नियंत्रण रखती है और रिवोल्यूशनरी गार्ड्स व बसिज जैसे संगठनों के जरिए दबाव बनाती है। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान तेल की कीमतों के जरिए दुनिया पर दबाव डालने की कोशिश करता है। इस्राइल ने ईरान को सीधी चेतावनी देते हुए कहा कि अगर हालात और बिगड़ते हैं तो सैन्य कार्रवाई और ज्यादा खतरनाक होगी, जो ईरान की नींव तक हिला सकती है। काट्ज ने यह भी दावा किया कि ईरान के नेता इस समय कमजोर स्थिति में हैं और फैसले लेने में दिक्कत महसूस कर रहे हैं। दूसरी ओर, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस तनाव के बीच परमाणु हथियारों के इस्तेमाल पर अपना रुख साफ किया। उन्होंने कहा कि इस संघर्ष में परमाणु हथियारों का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा और दुनिया में किसी को भी इसका उपयोग नहीं करना चाहिए। ट्रंप ने यह भी कहा कि अमेरिका की अर्थव्यवस्था मजबूत है और देश में तेल की कोई कमी नहीं है। ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका सऊदी अरब और रूस से भी ज्यादा तेल उत्पादन कर रहा है और कई जहाज अब होर्मुज जलडमरूमध्य के बजाय अमेरिका की ओर आ रहे हैं। उन्होंने यह भी बताया कि अमेरिका इस पूरे क्षेत्र पर नजर बनाए हुए है और ईरान पर समझौते के लिए दबाव डाल रहा है। हालांकि, ईरान ने इन सभी दावों को खारिज कर दिया है। ईरानी नेताओं ने कहा कि देश पूरी तरह एकजुट है और अंदरूनी मतभेद की बातें बेबुनियाद हैं। कुल मिलाकर, हालात काफी संवेदनशील बने हुए हैं और आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि क्या यह तनाव बातचीत से सुलझता है या फिर क्षेत्र में एक बड़ा संघर्ष देखने को मिलता है।
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