2026 के विधानसभा चुनावों में आज पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में मतदान हो रहा है। बंगाल में 152 सीटों पर पहले चरण की वोटिंग हो रही है, जबकि तमिलनाडु की सभी 234 सीटों पर एक ही चरण में मतदान जारी है। बंगाल में TMC और BJP के बीच कड़ा मुकाबला है, वहीं तमिलनाडु में DMK और AIADMK-NDA गठबंधन आमने-सामने हैं। कड़ी सुरक्षा के बीच हो रहे इस चुनाव के नतीजे राष्ट्रीय राजनीति और आने वाले लोकसभा चुनावों पर बड़ा असर डाल सकते हैं।
2026 के विधानसभा चुनावों में आज पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में वोटिंग हो रही है, और ये दोनों राज्य राष्ट्रीय राजनीति के लिहाज से बेहद अहम माने जा रहे हैं। पश्चिम बंगाल में पहले चरण के तहत कुल 294 सीटों में से 152 सीटों पर मतदान हो रहा है। इस चरण में करीब 3.
6 करोड़ मतदाता 16 जिलों में अपने मताधिकार का इस्तेमाल करेंगे। वहीं तमिलनाडु में सभी 234 विधानसभा सीटों पर एक ही चरण में मतदान कराया जा रहा है। पश्चिम बंगाल: कड़ी टक्कर का मुकाबला रिपोर्ट के मुताबिक, पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच सीधा और कड़ा मुकाबला देखने को मिल रहा है। बीजेपी जहां स्थानीय मुद्दों और कथित घुसपैठ जैसे विषयों को लेकर चुनाव प्रचार कर रही है, वहीं टीएमसी अपनी सरकार के कल्याणकारी कार्यक्रमों और ‘बंगाली अस्मिता’ को प्रमुख मुद्दा बना रही है। तमिलनाडु: गठबंधनों की सीधी लड़ाई तमिलनाडु में मुकाबला डीएमके गठबंधन और एआईएडीएमके-एनडीए गठबंधन के बीच है। मुख्यमंत्री एम.
के.
स्टालिन अपनी सरकार की ‘द्रविड़ियन मॉडल’ नीतियों को दोहराते हुए एक बार फिर सत्ता में लौटने का दावा कर रहे हैं। यहां चुनाव पूरी तरह से गठबंधन आधारित रणनीति और प्रदर्शन पर टिका हुआ है। सुरक्षा और चुनावी इंतज़ाम चुनाव आयोग ने मतदान को शांतिपूर्ण और निष्पक्ष बनाने के लिए व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की है। संवेदनशील बूथों पर केंद्रीय बलों की तैनाती की गई है और मतदाताओं की लंबी लाइनों को संभालने के लिए विशेष प्रबंधन किए गए हैं। इसके अलावा, कलकत्ता हाईकोर्ट ने भी निर्देश दिया है कि किसी भी तरह की प्रिवेंटिव गिरफ्तारी कानूनी दायरे में ही हो। चुनावी माहौल के बीच नकद, शराब और उपहारों की जब्ती के मामले भी सामने आए हैं, जिनमें इस बार नए रिकॉर्ड बनने की बात कही जा रही है। राष्ट्रीय राजनीति पर असर इन चुनावों को सिर्फ राज्य स्तर तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि इनके नतीजे राष्ट्रीय राजनीति की दिशा भी तय कर सकते हैं। आने वाले लोकसभा चुनावों से पहले ये चुनाव क्षेत्रीय समीकरणों और राष्ट्रीय गठबंधनों पर बड़ा प्रभाव डाल सकते हैं। मतदाताओं के लिए अहम मुद्दे इस चुनाव में आम मतदाताओं के लिए रोजगार, महंगाई, शिक्षा, स्वास्थ्य और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दे सबसे महत्वपूर्ण हैं। अब देखना होगा कि जनता किस पार्टी के प्रदर्शन और वादों पर भरोसा जताती है।
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