सरकार ने AI को रोजगार, अर्थव्यवस्था और सुरक्षा से जोड़ते हुए AIGEG नाम की हाई-लेवल बॉडी बनाई है। यह समूह AI से जुड़े फैसलों को coordinated तरीके से आगे बढ़ाएगा।
भारत सरकार ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को सिर्फ टेक्नोलॉजी नहीं, बल्कि रोजगार, इंडस्ट्रियल पॉलिसी और नेशनल सिक्योरिटी से जुड़ा एक बड़ा रणनीतिक मुद्दा मानते हुए एक कैबिनेट-लेवल बॉडी का गठन किया है। इस नए ग्रुप का नाम “AI Governance and Economic Group (AIGEG)” रखा गया है। इसकी अध्यक्षता केंद्रीय IT मंत्री अश्विनी वैष्णव करेंगे, जबकि राज्य मंत्री जितिन प्रसाद उपाध्यक्ष की भूमिका में रहेंगे।
इस ग्रुप में कई बड़े संस्थानों और विभागों के प्रतिनिधि शामिल किए गए हैं, जैसे NITI Aayog, मुख्य आर्थिक सलाहकार, प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार, दूरसंचार विभाग, आर्थिक मामलों और विज्ञान-प्रौद्योगिकी विभाग के अधिकारी, साथ ही नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल सेक्रेटेरिएट के सदस्य। इसके साथ ही एक अलग “Technology and Policy Expert Committee” भी बनाई जाएगी, जो AI से जुड़े नए रिस्क और टेक्नोलॉजी ट्रेंड पर एक्सपर्ट सलाह देगी।
इस पहल का मकसद यह है कि AI से जुड़े फैसले अब एक ऐसे प्लेटफॉर्म पर लिए जाएं जहां टेक पॉलिसी, रोजगार पर असर, रेगुलेशन और सुरक्षा जैसे सभी पहलुओं पर साथ-साथ चर्चा हो सके। AIGEG का फोकस सिर्फ इनोवेशन और ग्रोथ तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह भी देखा जाएगा कि ऑटोमेशन और जनरेटिव AI से जॉब मार्केट में क्या बदलाव आएंगे और लोगों को किन नई स्किल्स की जरूरत होगी।
संभावना है कि शुरुआत में यह ग्रुप हेल्थ, फाइनेंस और एजुकेशन जैसे सेक्टर के लिए अलग-अलग गाइडलाइंस तैयार करेगा। आगे चलकर यह श्रम कानून, कंप्लायंस और रिपोर्टिंग जैसे बड़े मुद्दों पर भी काम कर सकता है।
वैश्विक स्तर पर भी AI तेजी से बदल रहा है। नई AI लैब्स और टूल्स में बड़े निवेश हो रहे हैं। एक नई कंपनी “Recursive Superintelligence” ने बहुत कम समय में भारी फंडिंग जुटाकर अपनी वैल्यूएशन अरबों डॉलर तक पहुंचा ली है। इसका लक्ष्य ऐसे AI सिस्टम बनाना है जो खुद ही अपनी रिसर्च और ट्रेनिंग को बेहतर करते रहें।
दूसरी तरफ, Nvidia ने एंटरप्राइज़ के लिए “Agent Toolkit” लॉन्च किया है, जिससे कंपनियां ऑटोमेटेड AI एजेंट बना सकें। कई बड़ी कंपनियों ने इसे अपनाया है। वहीं Google DeepMind के Gemini 3 “Deep Think” मोड ने रिसर्च और गणित में छोटी-छोटी लॉजिकल गलतियों को पकड़ने की क्षमता दिखाकर खास ध्यान खींचा है।
आम लोगों के लिए AIGEG का मतलब यह हो सकता है कि आने वाले समय में AI से जुड़ी सर्विसेज—जैसे चैटबॉट, हेल्थ टूल्स और फाइनेंशियल एडवाइजरी—के लिए साफ नियम और सुरक्षा मानक तय होंगे। इससे डेटा प्राइवेसी, एल्गोरिथ्मिक बायस और जॉब इम्पैक्ट जैसे मुद्दों पर सरकार की पॉलिसी और स्पष्ट हो सकती है।
अगर यह ग्रुप तेजी से काम करता है और इंडस्ट्री, अकादमिक और समाज से लगातार फीडबैक लेता है, तो भारत एक ऐसा मॉडल बना सकता है जहां इनोवेशन और जिम्मेदार AI दोनों साथ-साथ आगे बढ़ें। हालांकि, अगर नियम बहुत सख्त या अस्पष्ट हुए, तो स्टार्टअप्स और रिसर्च सेक्टर को मुश्किलें भी आ सकती हैं। फिलहाल, सरकार का रुख साफ है—AI को वह टेक ट्रेंड नहीं, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था, रोजगार और सुरक्षा से जुड़ा एक बड़ा अवसर मान रही है।
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