2026 की पहली तिमाही में भारत के स्मार्टफोन शिपमेंट में 3% की गिरावट आई है। बढ़ती मेमोरी कीमतें और एंट्री-लेवल डिमांड में कमी इसकी मुख्य वजह बताई जा रही है।
काउंटरपॉइंट रिसर्च की ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक, भारत का स्मार्टफोन मार्केट 2026 की पहली तिमाही (Q1 CY 2026) में 3% की सालाना गिरावट के साथ पिछले छह साल के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है। रिपोर्ट के अनुसार, इस गिरावट के पीछे कई कारण हैं, जिनमें सबसे अहम हैं मेमोरी (DRAM और NAND) की बढ़ती वैश्विक कीमतें, रुपये पर दबाव और एंट्री-लेवल सेगमेंट में कमजोर मांग।
“Monthly India Smartphone Tracker” के डेटा के मुताबिक, यह लगातार दूसरी तिमाही है जब शिपमेंट में गिरावट देखी गई है। इससे पहले Q4 2025 में भी 4% की सालाना गिरावट दर्ज हुई थी। एक्सपर्ट्स का मानना है कि फेस्टिव सीज़न के बाद बाजार में आई सुस्ती और कंपोनेंट्स की बढ़ती लागत ने मिलकर इस गिरावट को और गहरा किया है।
अगर ब्रांड परफॉर्मेंस की बात करें तो Vivo (iQOO को छोड़कर) 21% मार्केट शेयर के साथ नंबर वन रहा। Samsung दूसरे स्थान पर रहा, जहां उसकी A-सीरीज़ और Galaxy S26 सीरीज़ की मजबूत बिक्री ने उसे सपोर्ट किया। OPPO 14% शेयर के साथ तीसरे नंबर पर रहा और टॉप-5 ब्रांड्स में सबसे तेज़ 8% सालाना ग्रोथ दर्ज की।
Xiaomi (POCO सहित) और Realme ने 10–20 हजार रुपये वाले सेगमेंट में खासकर ऑनलाइन चैनल्स में अच्छा प्रदर्शन किया। वहीं Apple का शेयर 9% तक पहुंच गया, जिसमें iPhone 17 सीरीज़ की मांग और EMI व एक्सचेंज ऑफर्स का बड़ा योगदान रहा।
आम यूज़र्स के लिए इसका सीधा असर कीमतों पर दिख रहा है। एंट्री-लेवल फोन अब पहले से महंगे लग रहे हैं, क्योंकि मेमोरी चिप्स की कीमत बढ़ने से 4GB/6GB RAM और 64/128GB स्टोरेज वाले फोन भी प्रभावित हुए हैं। वहीं प्रीमियम और अपर-मिड सेगमेंट में कंपनियां लगातार नए लॉन्च और ऑफर्स के जरिए ग्राहकों को आकर्षित कर रही हैं, जिससे इस सेगमेंट में कॉम्पिटिशन बना हुआ है।
ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर मिलने वाले ऑफ-सीज़न सेल, बैंक ऑफर और एक्सचेंज स्कीम कुछ हद तक राहत देते हैं, लेकिन छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों के ऑफलाइन मार्केट में इसका फायदा सीमित रहता है। ऐसे में कई यूज़र्स अब अपने पुराने फोन को ज्यादा समय तक इस्तेमाल कर रहे हैं, जिससे अपग्रेड साइकिल लंबी हो गई है—यानि लोग अब 2 साल की बजाय 3 साल या उससे ज्यादा समय बाद फोन बदल रहे हैं।
आने वाले समय की बात करें तो अगर ग्लोबल लेवल पर मेमोरी की कीमतें स्थिर होती हैं और भारत में 5G कवरेज व डिजिटल सेवाओं का इस्तेमाल बढ़ता है, तो 2026 की दूसरी छमाही में बाजार में सुधार देखने को मिल सकता है।
साथ ही “मेक इन इंडिया” और PLI स्कीम के तहत लोकल मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा मिलने से लंबे समय में लागत पर कंट्रोल संभव है। फिलहाल बाजार का फोकस वॉल्यूम ग्रोथ से हटकर प्रॉफिटेबल सेगमेंट की ओर जाता दिख रहा है, जिसका असर सीधे तौर पर ग्राहकों की पसंद और बजट पर पड़ रहा है।
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