चुनाव आयोग ने सोशल मीडिया और AI-generated कंटेंट पर सख्त नए नियम जारी किए हैं। अब किसी भी गलत या नियम तोड़ने वाले पोस्ट को शिकायत मिलने के 3 घंटे के भीतर हटाना जरूरी होगा। साथ ही, AI या डीपफेक कंटेंट को साफ तौर पर “AI-Generated” या “Digitally Enhanced” जैसे लेबल के साथ दिखाना अनिवार्य किया गया है। आयोग का मकसद फेक न्यूज़ और भ्रामक प्रचार को रोककर चुनाव प्रक्रिया को ज्यादा पारदर्शी और भरोसेमंद बनाना है।
चुनावी माहौल में सोशल मीडिया और AI-generated कंटेंट के बढ़ते इस्तेमाल को देखते हुए चुनाव आयोग ने एक अहम और सख्त दिशा-निर्देश जारी किया है। इसका मकसद फेक न्यूज़, डीपफेक और भ्रामक प्रचार पर रोक लगाकर चुनाव प्रक्रिया को ज्यादा पारदर्शी और भरोसेमंद बनाना है। ⚖️ 3 घंटे में कंटेंट हटाना अनिवार्य नए नियमों के अनुसार, अगर किसी राजनीतिक दल, उम्मीदवार या उनके कैंपेन से जुड़ा कोई भी सोशल मीडिया कंटेंट कानून, मॉडल आचार संहिता (MCC) या प्लेटफॉर्म पॉलिसी का उल्लंघन करता पाया जाता है, तो उसे शिकायत मिलने या निर्देश जारी होने के 3 घंटे के भीतर हटाना अनिवार्य होगा। इस कदम को सोशल मीडिया पर तेजी से फैलने वाले गलत कंटेंट को रोकने की बड़ी कोशिश माना जा रहा है। 🤖 AI और डीपफेक पर खास नियम चुनाव आयोग ने AI-generated और डीपफेक कंटेंट पर भी सख्त रुख अपनाया है। अब अगर किसी प्रचार सामग्री में AI का इस्तेमाल किया गया है, तो उसे साफ तौर पर: “AI-Generated” “Digitally Enhanced” “Synthetic Content” जैसे लेबल के साथ दिखाना जरूरी होगा। इसके अलावा, चुनाव के अंतिम 48 घंटों (साइलेंस पीरियड) में ऐसे कंटेंट की निगरानी और भी कड़ी कर दी जाएगी। 📊 शिकायतों पर तेज कार्रवाई रिपोर्ट के मुताबिक: 15 मार्च के बाद से 11,000 से ज्यादा आपत्तिजनक पोस्ट हटाई गईं C-Vigil ऐप पर दर्ज 3,10,393 शिकायतों में से लगभग 96% का निपटारा 100 मिनट के भीतर किया गया यह दिखाता है कि आयोग डिजिटल निगरानी को काफी तेज और सक्रिय बना रहा है। 👥 आम लोगों के लिए क्या मतलब?
इन नए नियमों से मतदाताओं को फायदा मिलेगा क्योंकि: फेक न्यूज़ और गलत जानकारी पर रोक लगेगी सोशल मीडिया पर फैली अफवाहों को जल्दी हटाया जाएगा लोग भरोसेमंद और सत्यापित जानकारी तक पहुंच पाएंगे अगर किसी को कोई संदिग्ध कंटेंट दिखे, तो वह C-Vigil ऐप या अन्य आधिकारिक माध्यम से शिकायत भी कर सकता है। 🔮 आगे क्या असर होगा?
Continue Reading1 मई 2026
अगर इन नियमों का सख्ती से पालन हुआ, तो यह कदम आने वाले चुनावों में डिजिटल प्रचार के लिए एक नया मानक तय कर सकता है। साथ ही, राजनीतिक दलों को अब सोशल मीडिया पर ज्यादा जिम्मेदारी के साथ कंटेंट तैयार करना होगा। 👉 कुल मिलाकर, यह फैसला डिजिटल युग में चुनावी पारदर्शिता और जवाबदेही को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
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1 मई 2026