अरिजीत सिंह ने 27 जनवरी 2026 को बॉलीवुड प्लेबैक सिंगिंग छोड़ने का ऐलान किया, जिसे वे रिटायरमेंट नहीं बल्कि खुद को नए सिरे से खोजने की शुरुआत मानते हैं। एक जैसे गानों से ऊबकर वे अब शास्त्रीय संगीत की जड़ों की ओर लौटना चाहते हैं। इसके साथ ही वे फिल्म डायरेक्शन में कदम रख रहे हैं और अपनी पहली हिंदी फिल्म पर काम कर रहे हैं। सादगी, परिवार जैसी सोच और संगीत के प्रति ईमानदारी आज भी उनकी पहचान बनी हुई है।
27 जनवरी 2026 की सुबह भारतीय म्यूज़िक इंडस्ट्री के लिए चौंकाने वाली रही। “I am calling it off. ऐसे वक्त में, जब उन्हें 2025 में पद्म श्री मिला और 8 फिल्मफेयर अवॉर्ड उनके नाम हैं, उनका बॉलीवुड प्लेबैक सिंगिंग छोड़ना सभी के लिए हैरानी भरा है।
यह फैसला रिटायरमेंट से ज्यादा, खुद को दोबारा खोजने की कोशिश लगता है।
अरिजीत का कहना है कि बॉलीवुड में उनकी आवाज़ का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल होने लगा था। वही टाइप के गाने, वही फील—इससे वे बोर हो चुके थे। लाइव शोज़ में वे गानों का अरेंजमेंट बदलते रहते थे, ताकि कुछ नया महसूस हो। उन्होंने साफ कहा, “जिंदा रहने के लिए मुझे अलग तरह का म्यूज़िक करना होगा।”
अरिजीत की शुरुआत हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत से हुई थी। उनके घर में बॉलीवुड गाने ज़्यादा नहीं सुने जाते थे। ‘फेम गुरुकुल’ के समय पंडित जसराज ने उनसे वादा लिया था कि वे शास्त्रीय संगीत कभी नहीं छोड़ेंगे। अब अरिजीत उसी शुद्ध संगीत की ओर लौटना चाहते हैं।
बहुत कम लोग जानते हैं कि अरिजीत को फिल्ममेकिंग की गहरी समझ है। उन्होंने पहले भी म्यूज़िक प्रोग्रामिंग और स्क्रैच ट्रैक पर काम किया है। अब वे अपनी पहली हिंदी फिल्म डायरेक्ट कर रहे हैं, जो एक जंगल एडवेंचर फिल्म है। इसमें नवाजुद्दीन सिद्दीकी लीड रोल में हैं और कहानी अरिजीत ने अपनी पत्नी कोयल रॉय के साथ लिखी है।
अरिजीत खुद को सुपरस्टार नहीं मानते। वे अपने सुनने वालों को ‘फैंस’ नहीं, बल्कि ‘एक्सटेंडेड फैमिली’ कहते हैं। किसी ने जब उनसे भावुक होकर विदाई मांगी, तो उन्होंने हंसते हुए कहा— “संगीत को ही बोला है रे, पगले।”
अरिजीत आज भारत के सबसे महंगे सिंगर्स में हैं। उनकी कुल संपत्ति करीब ₹414 करोड़ बताई जाती है। महंगी गाड़ियां और घर भी हैं, लेकिन फिर भी वे मुर्शिदाबाद में अपने रेस्टोरेंट में ₹40 की थाली चलाते हैं। यही सादगी उन्हें अलग बनाती है।
अरिजीत सिंह का फैसला यह दिखाता है कि असली सफलता वही है, जहां कलाकार अपनी शर्तों पर जी सके। जैसा कि श्रेया घोषाल ने कहा— “यह अंत नहीं, एक नए रचनात्मक दौर की शुरुआत है।”
अब सवाल यह है क्या अरिजीत का यह कदम दूसरे बड़े कलाकारों को भी अपनी आज़ादी चुनने की हिम्मत देगा?
Disclaimer
Disclaimer:
Images are for illustrative purposes only.
Published by: Netgram Team. For newsroom standards, byline transparency, and correction requests, review our editorial standards and corrections policy.
Need to contact the newsroom directly? Email netgramnews@gmail.com or visit the team page.