आर्टेमिस II मिशन से लौटे अंतरिक्ष यात्रियों ने अपने अनुभव को भावनात्मक और ऐतिहासिक बताया। उन्होंने चांद के पास पहुंचकर रिकॉर्ड दूरी तय की और अंतरिक्ष से पृथ्वी को देखकर गहरा असर महसूस किया। मिशन ने न सिर्फ तकनीकी उपलब्धि हासिल की, बल्कि मानवता को जोड़ने का संदेश भी दिया।
नासा के आर्टेमिस II मिशन से लौटने के छह दिन बाद चारों अंतरिक्ष यात्रियों ने जॉनसन स्पेस सेंटर में अपनी पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस की। उनके साथ उनका ज़ीरो-ग्रैविटी मैस्कॉट “Rise” भी मौजूद था। इस ऐतिहासिक मिशन में कमांडर रीड वाइजमैन, पायलट विक्टर ग्लोवर, मिशन स्पेशलिस्ट क्रिस्टीना कोच और कनाडाई अंतरिक्ष यात्री जेरमी हैनसेन शामिल थे।
कमांडर वाइजमैन ने अपने साथियों का धन्यवाद करते हुए कहा कि यह मिशन उनके आपसी सहयोग के बिना संभव नहीं था। उन्होंने कहा कि इस मिशन ने उन्हें हमेशा के लिए जोड़ दिया है, जैसे एक परिवार।
करीब 10 दिन के इस मिशन को अंतरिक्ष यात्रियों ने तकनीकी और भावनात्मक दोनों तरह से बेहद खास बताया। वाइजमैन ने कहा कि जब वे पृथ्वी पर लौटे, तो दुनिया भर से मिले समर्थन और गर्व को देखकर वे हैरान रह गए। उनका कहना था कि इस मिशन का मकसद दुनिया को एकजुट करना भी था।
यह मिशन अपोलो युग के बाद पहली बार था जब इंसान चांद के इतना करीब गया। उड़ान के दौरान ओरियन कैप्सूल ने पृथ्वी से 252,756 मील (406,771 किमी) की दूरी तय की, जो 1970 के अपोलो 13 के रिकॉर्ड से भी ज्यादा है। यह उपलब्धि चांद के उस हिस्से पर हासिल की गई जो पृथ्वी से दिखाई नहीं देता।
क्रिस्टीना कोच ने बताया कि जब उन्हें इस मिशन के असर के बारे में पता चला, तो वे भावुक हो गईं। वहीं विक्टर ग्लोवर ने कहा कि यह उपलब्धि सिर्फ एक देश की नहीं, बल्कि पूरी मानवता की है।
अंतरिक्ष यात्रियों ने वापसी के दौरान की कठिनाई भी बताई। ग्लोवर ने कहा कि री-एंट्री ऐसा महसूस हुआ जैसे किसी ऊंची इमारत से पीछे की तरफ गिर रहे हों। वाइजमैन ने बताया कि वे तेज गति से पृथ्वी के वातावरण में दाखिल हुए और हीट शील्ड की परफॉर्मेंस का आकलन किया जा रहा है, क्योंकि उसमें कुछ नुकसान के संकेत मिले हैं।
मिशन के दौरान कुछ छोटी समस्याएं भी आईं, जैसे टॉयलेट सिस्टम का बार-बार खराब होना, लेकिन इसके बावजूद ओरियन स्पेसक्राफ्ट “Integrity” ने अच्छा प्रदर्शन किया। वाइजमैन ने इसे शानदार मशीन बताया और कहा कि अगर लैंडर होता, तो वे चांद पर उतरने की कोशिश जरूर करते।
इस मिशन का सबसे गहरा असर तब महसूस हुआ जब अंतरिक्ष यात्रियों ने अंतरिक्ष से पृथ्वी को देखा। हैनसेन ने कहा कि इससे उन्हें भविष्य के लिए उम्मीद मिली। वहीं वाइजमैन ने बताया कि चांद की दूरी से सोलर एक्लिप्स देखकर वे भावुक हो गए और उनकी आंखों में आंसू आ गए। उन्होंने कहा कि यह अनुभव इतना अलग था कि उसे शब्दों में समझाना मुश्किल है।
आखिर में, सभी अंतरिक्ष यात्रियों ने कहा कि इस मिशन ने उनके बीच का रिश्ता और भी गहरा कर दिया है। यह अनुभव उनके लिए सिर्फ एक स्पेस मिशन नहीं, बल्कि जिंदगी का एक अनोखा और भावनात्मक सफर बन गया।
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