अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इज़राइल और लेबनान के बीच 10 दिन के सीज़फायर का ऐलान किया है। इसमें हिज़्बुल्लाह भी शामिल होगा, लेकिन इज़राइल ने शर्त रखी है कि उसका निरस्त्रीकरण जरूरी है। यह कदम अमेरिका-ईरान युद्धविराम को मजबूत कर सकता है। दोनों पक्ष शांति बातचीत के करीब बताए जा रहे हैं, हालांकि जमीनी हालात अब भी तनावपूर्ण हैं।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार (16 अप्रैल 2026) को इज़राइल और लेबनान के बीच 10 दिन के सीज़फायर (युद्धविराम) का ऐलान किया, जो आधी रात से लागू होगा। ट्रंप ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, “मैंने लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ आउन और इज़राइल के प्रधानमंत्री बिबी नेतन्याहू से बहुत अच्छी बातचीत की है।
अगर यह सीज़फायर लागू होता है, तो यह 8 अप्रैल को घोषित अमेरिका-ईरान के दो हफ्ते के युद्धविराम को और मजबूत कर सकता है। ईरान लंबे समय से चाहता था कि इस समझौते में लेबनान को भी शामिल किया जाए। ट्रंप ने कहा कि इस सीज़फायर में ईरान समर्थित हिज़्बुल्लाह भी शामिल होगा।
नेतन्याहू ने कहा कि यह 10 दिन का युद्धविराम लेबनान के साथ “ऐतिहासिक शांति समझौते” का मौका दे सकता है, लेकिन उन्होंने साफ किया कि हिज़्बुल्लाह का निरस्त्रीकरण (हथियार छोड़ना) जरूरी शर्त है। उन्होंने यह भी कहा कि इज़राइल दक्षिणी लेबनान में सीमा के पास 10 किलोमीटर का “सिक्योरिटी ज़ोन” बनाए रखेगा।
हिज़्बुल्लाह के नेता इब्राहिम अल-मुसावी ने कहा कि अगर इज़राइल हमले बंद करता है, तो वे भी सावधानी के साथ युद्धविराम का पालन करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि यह पूरी तरह से लड़ाई बंद होने पर ही संभव है और इज़राइल इसका फायदा उठाकर कोई कार्रवाई न करे।
उन्होंने ईरान का धन्यवाद भी किया और कहा कि ईरान के दबाव के बिना यह सीज़फायर संभव नहीं था। इस संघर्ष का नया चरण 2 मार्च से शुरू हुआ, जब अमेरिका और इज़राइल ने ईरान के खिलाफ युद्ध शुरू किया। इसके बाद इज़राइल ने बेरूत पर बड़े हमले किए और दक्षिणी लेबनान में घुसकर हिज़्बुल्लाह को पीछे धकेलने की कोशिश की।
ट्रंप ने बताया कि उन्होंने नेतन्याहू से लेबनान पर हमले कम करने को कहा था। 14 अप्रैल को वॉशिंगटन में लेबनानी और इज़राइली अधिकारियों की बैठक भी हुई, जिसे अमेरिका ने “ऐतिहासिक कदम” बताया। ट्रंप ने कहा कि वे नेतन्याहू और आउन को व्हाइट हाउस बुलाएंगे, जहां 1983 के बाद पहली बार दोनों देशों के बीच अहम बातचीत होगी।
उन्होंने यह भी कहा कि ईरान अपने समृद्ध यूरेनियम का स्टॉक सौंपने के लिए तैयार हो गया है और दोनों पक्ष शांति समझौते के करीब हैं। 2 मार्च से अब तक इज़राइली हमलों में लेबनान में कम से कम 2000 लोग मारे गए हैं और 10 लाख से ज्यादा लोग बेघर हो चुके हैं।
वहीं, हिज़्बुल्लाह ने भी इज़राइल पर हजारों रॉकेट दागे हैं।
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