जोधपुर के शेरगढ़ में सोलर लाइन से करीब 1950 मीटर तार चोरी हो गया, जिसकी कीमत लगभग 3 लाख रुपये है, जिससे ग्रामीण बिजली सप्लाई प्रभावित हो सकती है। चोरी रात में हुई और पुलिस जांच के साथ कबाड़ी बाजारों पर नजर रख रही है। ऐसी घटनाएं बढ़ रही हैं, इसलिए सोलर प्रोजेक्ट्स की सुरक्षा के लिए बेहतर निगरानी और तकनीकी उपाय जरूरी बताए जा रहे हैं।
जोधपुर जिले के शेरगढ़ थाना क्षेत्र से सोलर ऊर्जा लाइन से जुड़े करीब 1950 मीटर तार चोरी होने का मामला सामने आया है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक चोरी हुए तार की कीमत लगभग 3 लाख रुपये आंकी जा रही है। यह तार गांवों की सोलर बिजली सप्लाई में इस्तेमाल हो रहा था, जिससे अब स्थानीय बिजली व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका है।
पुलिस में दर्ज एफआईआर के अनुसार अज्ञात चोरों ने रात के समय तार काटकर घटना को अंजाम दिया। इलाके में सोलर लाइनों का लंबा फैलाव और खुला क्षेत्र होने के कारण निगरानी पहले से ही मुश्किल बनी हुई थी। घटना के बाद पुलिस ने मौके का निरीक्षण किया है और आसपास की गतिविधियों के साथ-साथ कबाड़ी बाजारों पर नजर रखने की बात कही है।
पश्चिमी राजस्थान में पिछले कुछ वर्षों में सोलर प्रोजेक्ट्स तेजी से बढ़े हैं, लेकिन इसके साथ तार और उपकरणों की चोरी के मामले भी बढ़े हैं। कई बार चोरी किया गया कॉपर या एल्यूमिनियम तार कबाड़ी बाजार में बेच दिया जाता है, जिससे सरकारी और निजी दोनों परियोजनाओं को नुकसान उठाना पड़ता है।
ग्रामीणों के लिए यह स्थिति सीधे परेशानी बढ़ाने वाली है। तार चोरी होने से सोलर प्लांट से बिजली सप्लाई बाधित हो सकती है, जिससे खेतों की सिंचाई, पेयजल मोटर और स्ट्रीट लाइट्स पर असर पड़ता है। जिन क्षेत्रों में पहले से ही ग्रिड बिजली सीमित है, वहां ऐसी घटनाएं दोहरी दिक्कत और अतिरिक्त खर्च का कारण बनती हैं।
तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि सिर्फ पारंपरिक सुरक्षा व्यवस्था अब पर्याप्त नहीं है। सोलर लाइनों की सुरक्षा के लिए सीसीटीवी, जीपीएस-टैग्ड केबल और सामुदायिक निगरानी जैसे उपाय जरूरी हैं। कुछ राज्यों में गांवों की स्थानीय समितियां रात में गश्त कर ऐसी घटनाओं को रोकने में मदद कर रही हैं, और ऐसा मॉडल यहां भी लागू किया जा सकता है।
यह घटना एक बड़ा सवाल भी खड़ा करती है कि करोड़ों की लागत वाले नवीकरणीय ऊर्जा प्रोजेक्ट्स में सुरक्षा पर अपेक्षाकृत कम ध्यान दिया जा रहा है। अगर चोरी और नुकसान को जोड़ा जाए, तो लंबे समय में यह निवेश और महंगा साबित हो सकता है।
जोधपुर प्रशासन और ऊर्जा विभाग के लिए यह मामला साफ संकेत है कि अब सोलर इन्फ्रास्ट्रक्चर की सुरक्षा को प्राथमिकता देना जरूरी हो गया है।
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